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411 समाचार
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संकट मोचन हनुमान मंदिर

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thumb|350px|संकट मोचन मंदिर प्रवेश द्वार, वाराणसी संकट मोचन हनुमान मंदिर हिन्दू भगवान हनुमान के पवित्र मंदिरों में से एक हैं। यह वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत में स्थित है। यह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय कॆ नजदीक दुर्गा मंदिर और नयॆ विश्वनाथ मंदिर के रास्ते में स्थित हैं। संकट मोचन का अर्थ है परेशानियों अथवा दुखों को हरने वाला। इस मंदिर की रचना बनारस श्री गोस्वामी तुलसी दस जी द्वारा हुई थी । यहाँ हनुमान जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, इस दौरान एक विशेष शोभा यात्रा निकाली जाती है जो दुर्गाकुंड से सटे ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर से लेकर संकट मोचन तक चलायी जाती है। भगवान हनुमान को प्रसाद के रूप में शुद्ध घी के बेसन के लड्डू चढ़ाये जाते हैं। भगवान हनुमान के गले में गेंदे ऐवं तुलसी की माला सुशोभित रहती हैं। इस मंदिर की एक अद्भुत विशेषता यह हैं कि भगवान हनुमान की मूर्ति की स्थापना स्वयं तुलसी दास जी के द्वारा केवल मिट्टी से की है एवं भगवान श्रीराम जी के चरण संकट मोचन महराज के हृदय के ठीक सामने स्थित है. श्रद्धालुओं द्वारा निःस्वार्थ श्रद्धा से पूजा किया करते हैं। भगवान हनुमान की मूर्ति की विशेषता यह भी है कि मूर्ति मिट्टी की बनी है।संकट मोचन महराज कि मूर्ति के हृदय के ठीक सीध में श्री राम लला की मूर्ति विद्यमान है, ऐसा प्रतीत होता है संकट मोचन महराज के हृदय में श्री राम सीता जी विराज मान है। मंदिर के प्रांगण में एक अति प्राचीन कूआँ जो संत तुलसीदास जी के समय का कहा जाता है, श्रद्धालु इस कूप का शीतल जल ग्रहण करते हैं । यहाँ विस्तृत क्षेत्र में तुलसी के पौधों को लगाया गया है साथ ही आस पास पुराने रास्ते पर अनेक वृक्ष लगाने के साथ स्वक्षता का ध्यान रखा गया है जिसके कारण विषाक्त सर्पों से भय मुक्त वातावरण तैयार हुआ है |मंदिर परिसर में ऐक अत्यंत प्राचीन कुआं है श्रद्धालु इस कुएँ का पानी जरूर पीते हैं| इतिहास माना जाता हैं कि इस मंदिर की स्थापना वही हुईं हैं जहाँ महाकवि तुलसीदास को पहली बार हनुमानजी का स्वप्न आया था। संकट मोचन मंदिर की स्थापना कवि तुलसीदास ने की थी। वे वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के अवधी संस्करण रामचरितमानस के लेखक थे। संत तुलसी दास जी के अंतिम दिनों में अपने बाह ( भुजाओं) के असहनिय दर्द की अवस्था में संकट मोचन महराज के समक्ष " हनुमान बाहुक " की रचना किया था । परम्पराओं की माने तो कहा जाता हैं कि मंदिर में नियमित रूप से आगंतुकों पर भगवान हनुमान की विशेष कृपा होती हैं। हर मंगलवार और शनिवार, हज़ारों की संख्या में लोग भगवान हनुमान को पूजा अर्चना अर्पित करने के लिए कतार में खड़े रहते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार भगवान हनुमान मनुष्यों को शनि ग्रह के क्रोध से बचते हैं अथवा जिन लोगों की कुंडलियो में शनि गलत स्थान पर स्थित होता हैं वे विशेष रूप से ज्योतिषीय उपचार के लिए इस मंदिर में आते हैं। एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान हनुमान सूर्य को फल समझ कर निगल गए थे, तत्पश्चात देवी देवताओं ने उनसे बहुत याचना कर सूर्य को बाहर निकालने का आग्रह किया। कुछ ज्योतिषो का मानना हैं कि हनुमान की पूजा करने से मंगल एवं शनि ग्रह के बुरे प्रभाव अथवा मानव पर अन्य किसी और ग्रह की वजह से बुरे प्रभाव को बेअसर किया जा सकता हैं। आतंकवादी घटना 2006 वाराणसी बम विस्फोट ७ मार्च २००६ को वाराणसी में हुए आतंकवादी हमलों में से तीन विस्फोटों से एक विस्फोट मंदिर में हुआ था। उस दौरान मंदिर में आरती हो रही थी जिसमे भारी मात्रा में उपासको और शादी उपस्थितगन मौजूद थे। विस्फोट के बाद वहाँ उपस्थित भींड़ ने बचाव अभियान में एक दूसरे की सहायता की। अगले दिन फिर से श्रद्धालुओं की बड़ी सख्या के साथ मंदिर में पूजा पुनः आरंभ हुई। संकट मोचन संस्था संकट मोचन फाउंडेशन की स्थापना मंदिर के महंत श्री वीर भद्र मिश्र द्वारा १९८२ में हुई थी। वे गंगा नदी की सफ़ाई और सुरक्षा पर कई काम से जुड़े रहे हैं। इन परियोजनाओ के लिए आर्थिक सहायता अमेरिकी और स्वीडिश सरकारों द्वारा प्राप्त होती हैं। मिश्रा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) में पूर्व में सिविल इंजीनियरिंग विभाग के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। १९९२ में इन्हें संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) "ग्लोबल ५०० रोल इन होनोर " की स्थापना के लिएअ सम्मानित किया गया था और १९९९ में टाइम्स मैगज़ीन द्वारा "हीरो ऑफ़ द प्लानेट" के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह फाउंडेशन पिछले २५ साल से एक ऑस्ट्रेलिया के पर्यावरण समूह, 'ओज़ ग्रीन' नामक के साथ "स्वच्छ गंगा अभियान' संगठन के तहत काम कर रहा हैं।http://www.up-tourism.com/tourist-varanasi_circuit.htm संग्रहीत प्रति 6 फ़रवरी 2014 https://web.archive.org/web/20140123035536/http://www.up-tourism.com/tourist-varanasi_circuit.htm 23 जनवरी 2014 dead सांस्कृतिक समारोह यहाँ हनुमत॒ जयंति के दिन से संगीत समारोह आरम्भ होताा है , जिसकी शुरूआत पं० कैली महाराज ने की थी। कार्तिक मास में नवाह पाठ होता है, जिसमें विश्व के प्रसिद्ध कथा वाचक राम कथा द्वारा लोगो को मनमोहित कर देते हैं । प्रमुख रूप से राम किंकर जी कपिन्द्र जी विशेष रूप से राम नाराणय व्यास जी द्वारा हनुमत् चरित रोमांचित कर देती थी । यहाँ तक कि अन्य धर्मावलंबियों को भी निमंत्रण दिया जाता है, यह एक अत्यंत पवित्र भावना है जो "वसुधैव कुटुंबकम" के महान भारतीय दृष्टिकोण को दर्शाती है पाकिस्तान के विश्व प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक "ग़ुलाम अली साहब" का गायन मनमोहक लगा और सभी लोगों द्वारा बहुत पसंद किया गया। सन् 2020 के संगीत समारोह " कोरोना " महामारी के कारण मंदिर परिसर बंद कर दिया गया था । ऐसे समय पर आन लाईन विशेष लिंक द्वारा संचालित करने का महंत विश्वंभर जी मिश्र जी ने निर्णय लिया । मंदिर परिसर में केवल साकेतवासी व्यास श्री राम नारायण व्यास के शिष्य राघव जी ने राम कथा का प्रवचन किया । सन्दर्भ श्रेणी:उत्तर प्रदेश में हिन्दू मंदिर श्रेणी:वाराणसी श्रेणी:वाराणसी के दर्शनीय स्थल श्रेणी:वाराणसी के मन्दिर