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उस्ताद अलाउद्दीन खान
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सितंबर 2013
सितंबर 2013
thumb|उस्ताद अलाउद्दीन खान
उस्ताद अलाउद्दीन खाँ (1862 - 6 सितम्बर 1972) एक बहुप्रसिद्ध सरोद वादक थे साथ ही अन्य वाद्य यंत्रों को बजाने में भी पारंगत थे। वह एक अतुलनीय संगीतकार और बीसवीं सदी के सबसे महान संगीत शिक्षकों में से एक माने जाते हैं।
सन् 1935 में पंडित उदय शंकर के बैले समूह के साथ खाँ साहब ने यूरोप का दौरा किया और इसके बाद काफी लंबे समय तक उत्तराखंड के अल्मोड़ा में स्थित 'उदय शंकर इण्डिया कल्चर सेंटर' से भी जुड़े रहे। अपने जीवन काल में उन्होंने कई रागों की रचना की और विश्व संगीत जगत में विख्यात मैहर घराने की नींव रखी। उनकी सबसे खास रिकॉर्डिंग्स में से ऑल इण्डिया रेडियो के साथ 1950-60 के दशक में की गई उनकी रिकॉर्डिंग सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं।
अलाउद्दीन खाँ साहब मशहूर सरोद वादक अली अकबर खाँ और अन्नपूर्णा देवी के पिता हैं, साथ ही राजा हुसैन खाँ के चाचा भी। इतना ही नहीं बाबा अलाउद्दीन खाँ पंडित रवि शंकर, निखिल बनर्जी, पन्नालाल घोष, वसंत राय, बहादुर राय आदि सफल संगीतकारों के गुरु भी रहे। उन्होंने स्वयं गोपाल चंद्र बनर्जी, लोलो और मुन्ने खाँ जैसे संगीत के महारथियों से संगीत की दीक्षा ली। इतना ही नहीं उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद मशहूर वीणावादक रामपुर के वज़ीर खाँ साहब से भी संगीत के गुर सीखे।
उसताद अलाउद्दीन खान को कला के क्षेत्र में सन १९५८ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इससे पहले उन्हें साल 1954 में संगीत नाट्य अकादमी ने अपने सबसे बड़े सम्मान 'संगीत नाट्य अकादमी फैलोशिप ' से नवाज़ा। ये मध्य प्रदेश राज्य से हैं।
प्रारंभिक जीवन
अलाउद्दीन खाँ का जन्म बंगाल (आज का बांग्लादेश) के ब्राम्हनबरिया ज़िले के छोटे से गांव शिबपुर में हुआ था। उनके पिता का नाम सबदार हुसैन खाँ था। अलाउद्दीन के बड़े भाई फ़कीर आफ़ताबुद्दीन ने उन्हें सबसे पहले संगीत से रुबरु करवाया।
हस्ताक्षर
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श्रेणी:१९५८ पद्म भूषण