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बसाइँ
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बसाइँ लील बहादुर क्षेत्री Nepal नेपाल नेपाली मदन पुरस्कार पुस्तकालय 9789993328964 1957 (वि.सं.२०१४) बसाइँ ne 62
बसाइँ लील बहादुर क्षेत्री द्वारा लिखित एक उपन्यास है। https://archive.nepalitimes.com/article/Book-Review/I-feel,240 I feel like I’ve come home Nepali Times 4 November 2021 https://thehimalayantimes.com/nepal/eminent-writer-of-nepali-language-lil-bahadur-chhetri-conferred-padma-shri Eminent writer of Nepali language Lil Bahadur Chhetri conferred Padma Shri Online T. H. T. 2021-11-09 The Himalayan Times en 2021-11-09 यह 1957 में साझ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया गया था। यह त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल के पाठ्यक्रम में शामिल है। http://archive.nepalitimes.com/issue/383/Review/14397 Not lost in translation Nepali Times 4 November 2021
एक असमिया नेपाली लेखक छेत्री ने भारत में नेपाली प्रवासियों के अनुभव को शामिल करते हुए इस पुस्तक को लिखा था। पुस्तक ग्रामीण पहाड़ी नेपाल में एक गरीब किसान के जीवन को दर्शाती है और उन परिस्थितियों को दर्शाती है जिसके तहत उसे अपने गांव से दूर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
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पृष्ठभूमि
यह किताब पूर्वी नेपाल के एक गुमनाम पहाड़ी गांव पर आधारित है। धन बहादुर बसनेत एक गरीब किसान हैं जो अपनी पत्नी, बहन और एक बेटे के साथ रहते हैं। किताब गांव में उसके संघर्ष को दिखाती है और बताती है कि कैसे वह दूसरों के द्वारा धोखा दिया जाता है। पुस्तक उन परिस्थितियों को दर्शाती है जिनमें गरीब नेपाली लोगों को रोजगार के लिए अपने घर से भारत में स्थानों की ओर पलायन करना पड़ता है। https://www.taipeitimes.com/News/feat/archives/2008/05/18/2003412223 From Nepal, a Himalayan pastoral 18 May 2008 Taipei Times 4 November 2021
पात्र
धन बहादुर बस्नेत 'धने' पुस्तक का मुख्य पात्र ,ग्रामीण नेपाल का एक गरीब किसान
झुमावती बस्नेत, धने की छोटी बहन
मैना, धने की पत्नी
धने और मैना का नन्हा बच्चा
बुढो बैदार, साहूकार
रिकुटे, एक भारतीय गोरखा पड़ोसी गाँव से भर्ती होता है
ठुली, झूमा का दोस्त
मुखिया, ग्राम प्रधान
मोटे कार्की, धने के मददगार दोस्त
लेउते दमाई, धने के गांव से एक ग्रामीण
नन्दे ढकाल, ग्रामीण
लुईँटेल, एक अमीर जमींदार
साने घरती, लुईँटेलल के नौकर
बुधे कामी, एक ग्रामीण
विषयों
इस पुस्तक में गरीबी, जाति और लिंग भेदभाव सम्बन्धित अन्याय प्रमुख विषय हैं। पुस्तक दिखाती है कि कैसे अमीर लोग गरीब लोगों को दबाते हैं और कैसे उन्हें गरीबी की ओर धकेलते हैं।
अनुवाद
माइकल हट द्वारा पुस्तक का अंग्रेजी में अनुवाद ' माउंटेन पेंटेड विद टर्मरिक ' के नाम में किया गया हे । https://thehimalayantimes.com/nepal/professor-michael-hutt-stresses-on-the-significance-of-translation-of-literary-creation Professor Michael Hutt stresses on the significance of translation of literary creation Joshi Kriti 21 February 2019 The Himalayan Times en 4 November 2021
अनुकूलन
2003 में सुभाष गजुरेल द्वारा पुस्तक को एक नेपाली फिल्म में रूपांतरित किया गया था। यह फिल्म सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म के अकादमी पुरस्कार के लिए नेपाल की आधिकारिक प्रविष्टि थी, हालांकि फिल्म को नामांकित नहीं किया गया था।
संदर्भ
श्रेणी:नेपाली साहित्य