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खेरोजी पाटीकर
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खेरोजी पाटीकर एवं गामाजी भांगरे मराठा साम्राज्य के मावल क्षेत्र में 2 कोली जागीरदार थे इसीलिए उनको कोली मर्द मावला भी बोला जाता था क्योंकि मावल क्षेत्र में सबसे ज्यादा आबादी कोलियों की थी एवं प्रभुत्व भी कोलियों का ही था। खेरोजी पाटीकर, पाटीकर गोत्र के कोलियों के पाटिल (सरदार) थे और ऐसे ही गामाजी भांगरे भी भांगरे गोत्र के कोलियों के पाटिल (सरदार) थे। 1761 तक मराठा साम्राज्य काफी कमजोर पड़ चुका था क्योंकि मराठा साम्राज्य पर पेशवा का राज था ना कि किसी मराठा छत्रपति का, क्योंकि मराठा साम्राज्य दो रियासतों में टूट चुका था जिसमें एक रियासत थी सतारा और दूसरी रियासत थी कोल्हापुर और इनके ऊपर बैठा था पेशवा। मराठा साम्राज्य के पेशवा बालाजी बाजीराव (नाना साहब) का हैदराबाद के निजाम मीर सईद मुहम्मद खान सिद्दीकी बयाफंदी (सलाबत जंग) के साथ फरवरी 1751 से ही काफी लड़ाई झगड़े चल रहे थे लेकिन 1751 में पेशवा ने हैदराबाद को हराकर त्रिम्बक किला जीत लिया था लेकिन कुछ सालों बाद हैदराबाद के निजाम ने फ्रेंच इंडिया (French India) के साथ मिलकर पेशवा को हराकर त्रिम्बक किले को दुबारा से जीत लिया।Yang Anand A. Crime and Criminality in British India Association for Asian Studies 1985 978-0-8165-0951-5 New Delhi, India 73 en Maharashtra history of castes https://cultural.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/Ahmadnagar/people_castes.html Maharashtra history
1761 में, कोली जागीरदार खेरोजी पाटीकर एवं गामाजी भांगरे ने त्रिम्बक किले पर आक्रमण करने की योजना बनाई लेकिन ये दोनों कोली जागीरदार इतने ताकतवर नहीं थे कि हैदराबाद के निजाम की सेना का सामना कर सके क्योंकि हैदराबाद एक बड़ी रियासत थी और काफी ताकतवर सेना रखती थी। खेरोजी पाटीकर एवं गामाजी भांगरे ने मावल क्षेत्र के सभी कोलियों (कोली मावला) को एकत्र किया और सभी को हैदराबाद के त्रिम्बक किले पर हमला करने की योजना बताई जिसमें सभी कोलियों ने अपनी सहमति जताई एवं किले पर हमला करने की तैयारियों करने लगे जिसके बाद कुछ अन्य कोली सरदारों का भी खेरोजी पाटीकर एवं गामाजी भांगरे को समर्थन मिला और हमले में साथ दिया। हैदराबाद के निजाम मीर सईद मुहम्मद खान सिद्दीकी बयाफंदी (सलाबत जंग) को अपने गुप्तचरों से कोलियों के हमले की सूचना मिल चुकी थी जिसके चलते निजाम ने हैदराबाद सेना (Hyderabad state forces) को त्रिम्बक के लिए रवाना करके किले को मजबूत कर दिया। हैदराबाद की सेना त्रिम्बक पर आ चुकी है, ये सूचना खेरोजी पाटीकर एवं गामाजी भांगरे को मिली तो उन्होंने 2 दिन और इंतजार किया और 2 दिन बाद, मध्य रात्रि के समय अचानक से हैदराबाद के त्रिम्बक किले पर हमला कर दिया जिसमें कुछ कोली योद्धा मारे गए और काफी हैदराबाद सैनिक मारे गए, हैदराबाद सेना के सेनापति को मारकर खेरोजी पाटीकर एवं गामाजी भांगरे ने त्रिम्बक किले पर कब्जा कर लिया।
लेकिन त्रिम्बक किले को जीतने के बाद खेरोजी पाटीकर एवं गामाजी भांगरे ने किले को पेशवा बालाजी बाजीराव (नाना साहिब) को देने की पेशकश की और पेशवा बालाजी बाजीराव ने पेशकश स्वीकार करते हुए त्रिम्बक किले को मराठा साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया जिसके बाद पेशवा ने कोलियों से खुश होकर खेरोजी पाटीकर एवं गामाजी भांगरे को काफी धन एवं गावों को उपहार स्वरूप दिया एवं दोनों कोली जागीरदारों को देशमुख की उपाधि से सम्मानित किया और मराठा सेना में सूबेदार की पदवी से आभूषित किया।Hardiman David https://books.google.com/books?id=QNA-AQAAIAAJ Histories for the Subordinated Seagull Books 2007 978-1-905422-38-8 New Delhi, India 104 en
संदर्भ