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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

आहारीय आयोडीन

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आहार संबंधी आयोडीन भौतिक तत्त्व आयोडिन तत्त्व(इसका दूसरा नाम "अवकारक लवण" भी है।) आहारीय आयोडीन मानव शरीर के अत्यावश्यक भौतिक तत्त्व है। ये अवटु ग्रंथि के सम्यक, कार्यविधि के लिए आवश्यक है जो शक्ति का निर्माण करती है, हानिप्रद कीटाणुओं को मारती है और इसके हार्मोन थांयरांक्सीजन की कमी पूरी करती है। आयोडीन मन को शांति प्रदान करती है, तनाव कम करती है, मस्तिष्क को सतर्क रखती है और बाल, नाखून, दांत और त्वचा को उत्तम स्थिति में रखने में मदद करता है। आयोडिन की कमी से गर्दन के नीचे अवटु ग्रंथि की सूजन (गलगंड) हो सकती है और हार्मोन का उत्पादन बन्द हो सकता है जिससे शरीर के सभीसंस्थान अव्यवस्थित हो सकते हैं। इसकी कमी से मन्द मानसिक प्रतिक्रियायें, धमनियों में सख्ती एवं मोटापा हो सकता है। आयोडीन एक रासायनिक तत्व है ; इसका प्रतीक I और परमाणु क्रमांक 53 है। स्थिर हैलोजनों में सबसे भारी , यह मानक परिस्थितियों में अर्ध-चमकदार, अधात्विक ठोस के रूप में मौजूद होता है जो 114 डिग्री सेल्सियस (237 डिग्री फारेनहाइट) पर पिघलकर गहरे बैंगनी रंग का द्रव बनाता है और 184 डिग्री सेल्सियस (363 डिग्री फारेनहाइट) पर उबलकर बैंगनी गैस में परिवर्तित हो जाता है। इस तत्व की खोज फ्रांसीसी रसायनज्ञ बर्नार्ड कोर्टोइस ने 1811 में की थी और दो साल बाद जोसेफ लुई गे-लुसाक ने इसका नाम प्राचीन ग्रीक शब्द Ιώδης के नाम पर रखा , जिसका अर्थ 'बैंगनी' होता है। आयोडीन कई ऑक्सीकरण अवस्थाओं में पाया जाता है, जिनमें आयोडाइड (I−), आयोडेट (IO− 3) और विभिन्न पीरियोडेट आयन शामिल हैं। सबसे भारी आवश्यक खनिज पोषक तत्व होने के नाते, आयोडीन थायरॉइड हार्मोन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है।http://lpi.oregonstate.edu/mic/minerals/iodine Iodine Micronutrient Information Center, Linus Pauling Institute, Oregon State University, Corvallis 2015 20 November 2017 17 April 2015 https://web.archive.org/web/20150417055246/http://lpi.oregonstate.edu/mic/minerals/iodine live आयोडीन की कमी लगभग दो अरब लोगों को प्रभावित करती है और बौद्धिक अक्षमताओं का प्रमुख रोके जा सकने वाला कारण है। https://query.nytimes.com/gst/fullpage.html?res=9E05E3D81231F935A25751C1A9609C8B63 The New York Times In Raising the World's I.Q., the Secret's in the Salt McNeil Jr DG 16 December 2006 21 July 2009 live https://web.archive.org/web/20100712011551/http://query.nytimes.com/gst/fullpage.html?res=9E05E3D81231F935A25751C1A9609C8B63 12 July 2010 मानव शरीर में केवल १०-१२ मिलीग्राम आयोडिन होती है किन्तु इसके बिना जीवित रहना सम्भव नहीं है। आयोडिन कोलेस्ट्रॉल की रासायनिक संशलेषण में सहायता करती है और धमनियों में कोलेस्ट्रॉल चर्बी को भी बढ़ाती है। शरीर में आयोडिन की अधिकता होने से नाक में नमी अधिक हो जाती है। जल में ली गई क्लोरीन शरीर से आयोडिन अधिकता को निकालने का कारण होती है। अधिक मात्रा में आयोडीन वाले आहार है मूली, शतावर (एस्पेरेगस रेसिमोसस), गाजर, टमाटर, पालक, आलू, मटर, खुंभी, सलाद, प्याज, केला, स्ट्राबेरी, समुद्र से प्राप्त होने वाले आहार, अंडे की जर्दी, दूध, पनीर और कॉड-लिवर तेल। आयोडिन की कमी से उत्पन्न विकारों पर नियंत्रण के लिये १९८६ में न्यूसेफ़ और आस्ट्रेलिया की सरकार के समर्थन से तीसरी दुनिया के देशों को सहायता देने के लिये एक अन्तरराष्ट्रीय परिषद स्थापित की गई थी। भारत ने १९९२ से पहले व्यापक आयोडिन युक्त नमक की नीति अपनाई थी। श्रेणी:पोषण श्रेणी:आयोडीन श्रेणी:आहार श्रेणी:अवटु ग्रंथि