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मोरोपन्त
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मोरोपन्त (मोरेश्वर रामजी पराडकर; १७२९–१७९४) एक मराठी कवि थे। उन्हें 'मयूर पंडित' के नाम से भी जानते हैं। मराठी साहित्य के इतिहास में प्रसिद्ध 'पण्डित कवियों' की शृंखला में वे अन्तिम पण्डित कवि थे।
कृतियाँ
उन्होने १०८ रामायण लिखने का संकल्प किया था किन्तु ९४-९५ रामायण ही लिख पाये। इनमें से कुछ रामायणों में केवल एक या दो या पाँच पद ही हैं। उन्होने एक ऐसे रामायण की रचना की जिसमें प-वर्ग (ओष्ठ्य) के सभी व्यञ्जन अनुपस्थित हैं, इस कारण इसे 'निरोष्ठ रामायण' (बिना ओष्ठ्य का रामायण) कहते हैं। उनके द्वारा रचित कुछ रामायणों में केवल एक ही छन्द प्रयुक्त हुआ है, जैसे विबुधप्रिय-रामायण और पञ्च-चामर रामायण।
वे आर्या छन्द तथा पृथ्वी छन्द में सिद्धहस्त थे। केकावली उनकी अन्तिम प्रमुख कृति है जिसका समापन उन्होने १७९० के दशक में किया।
उनकी कुछ रचनाएँ निम्नलिखित हैं-
आर्याभारत (१७१७० आर्या दोहे तथा एक चौपाई शार्दुलविक्रीडित छन्द में, एक आर्या-गीति)
मराठी रामायण (१६ हजार दोहे)
आर्याकेकावली (आर्या छन्द में ; यह उनकी केकावली नामक प्रसिद्ध कृति से भिन्न है।)
मंत्रभागवत (३५९२ दोहे)
कृष्णविजय (३६६९ दोहे)
हरिवंश (५४४४ दोहे)
ब्रह्मोत्तरखण्ड (१२०० दोहे)
केकावली (१२१ चौपाइयाँ पृथ्वी छन्द में ; अन्तिम छन्द श्रगधार में )
संशय-रत्नमाला
सतीगीत
श्रेणी:मराठी कवि