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411 समाचार
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भारत में नग्नता

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पाठ=Image showing the Dancing girl of Mohenjo-Daro|अंगूठाकार|मुअनजो-दड़ो की नर्तकीभारत में नग्नता अथवा नंगापन का एक बहुआयामी इतिहास है, जो राष्ट्र की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक प्रथाओं में गहराई से निहित है। यद्यपि आधुनिक नगरीय क्षेत्रों में सार्वजनिक नग्नता को सामान्यतः अप्रिय दृष्टि से देखा जाता है, तथापि कुछ धार्मिक एवं पारम्परिक सन्दर्भों ने नग्नता के विविध रूपों को पवित्रता, संन्यास अथवा अध्यात्मिकता के प्रतीक के रूप में अपनाया है। भारतीय कला में नग्नता का चित्रण इस दावे का समर्थन नहीं करता कि समस्त जातियों एवं क्षेत्रों में सार्वजनिक नग्नता स्वीकार्य अथवा सामान्य थी। समकालीन मानकों के अनुसार, अनाच्छादित स्त्री उर्ध्वकाय को अर्धनग्न अथवा अश्लील नग्नता का सूचक माना जाता है, तथापि ऐतिहासिक रूप से वर्तमान भारत के कुछ क्षेत्रों एवं वर्गों/जातियों में इस प्रकार की सार्वजनिक नग्नता/अर्धनग्नता परम्परागत रूप से प्रचलित रही है।https://books.google.com/books?id=HIRSEAAAQBAJ&dq=nair+breast+cloth+brahmin&pg=PA91 Unruly Women: Race, Neocolonialism, and the Hijab Sheth Falguni A. 2022 Oxford University Press 978-0-19-754713-7 enCrooke W. 1919 Nudity in India in Custom and Ritual. https://www.jstor.org/stable/2843441 The Journal of the Royal Anthropological Institute of Great Britain and Ireland 49 237–251 10.2307/2843441 0307-3114 2843441 इतिहास भारत में नग्नता का इतिहास विकसित होती सांस्कृतिक, धार्मिक एवं सामाजिक मान्यताओं का एक वितान है। सहस्राब्दियों तक विस्तृत, नग्नता की अवधारणा और उसके निरूपण में महत्त्वपूर्ण रूपान्तरण हुए हैं, जो भारतीय समाज के व्यापक परिवर्तनों को प्रतिबिम्बित करते हैं। प्राचीन काल सिन्धु घाटी सभ्यता (३३००–१३०० ईसा पूर्व)- इस काल की कलाकृतियाँ, विशेषतः मृण्मूर्तियाँ, पुरुष एवं स्त्री दोनों रूपों को कभी-कभी अर्धनग्न अवस्था में प्रदर्शित करती हैं। ये चित्रण इस सभ्यता के मानव रूप के प्रति सम्भावित स्वाभाविक बोध एवं सौन्दर्यपरक अभिरुचि को उजागर करते हैं।https://books.google.com/books?id=1AJO2A-CbccC&q=dancing+girl The Ancient Indus Valley: New Perspectives McIntosh Jane 2008 Bloomsbury Academic 978-1-57607-907-2 281, 407 en नर्तकी नामक कांस्य प्रतिमा, मुअनजो-दड़ो से प्राप्त एक उल्लेखनीय कृति है, जो सिन्धु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख स्थल है। यह प्रतिमा एक युवती को अर्धनग्न अवस्था में दर्शाती है और वर्तमान में नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में स्थित है।https://books.google.com/books?id=H3lUIIYxWkEC&q=dancing+girl+harappa&pg=PA162 A History of Ancient and Early Medieval India: From the Stone Age to the 12th Century Singh Upinder 2008 Pearson Education India 978-81-317-1120-0 162 en वैदिक काल (१५००–५०० ईसा पूर्व)- ऋग्वेद, जो भारतीय प्राचीनतम ग्रन्थों में से एक है, में नग्नता का, विशेषकर तपस्वी साधनाओं के सन्दर्भ में, उल्लेख आता है।Guide to Indian Philosophy Sanyal Jagdiswar 1999 KolkataHopkins Edward Washburn 1893 Problematic Passages in the Rig-Veda https://www.jstor.org/stable/592358 Journal of the American Oriental Society 15 252–283 10.2307/592358 0003-0279 592358 subscription नग्नता को सांसारिक आसक्तियों से त्याग का एक रूप माना गया।Saptahik Bartaman Vedantaprana Pravrajika 2015 Kolkata Vol. 28, no. 23 शास्त्रीय काल बौद्ध और जैन धर्म (षष्ठ शताब्दी ईसा पूर्व से आगे)- इन दोनों धर्मों की तपश्चर्या पद्धतियों में कभी-कभी वस्त्रों का परित्याग सम्मिलित था। विशेष रूप से जैन धर्म में, दिगम्बर सम्प्रदाय (अर्थात् ‘दिशाओं अथवा आकाश को ही वस्त्र रूप में धारण करने वाले’) के साधु सम्पूर्ण अपरिग्रह के प्रतीक स्वरूप नग्नता को स्वीकार करते थे।The Jains Dundas Paul 2002 Routledge 978-0-415-26605-5 2nd Library of religious beliefs and practices London New York 2 मन्दिर कला एवं शिल्प- गुप्त एवं उत्तर-गुप्त काल के मन्दिरों, जैसे खजुराहो में, दिव्य एवं मानव आकृतियों की कामुक अथवा अकामुक नग्न मुद्राओं में जटिल शिल्पांकन प्रदर्शित हैं।https://books.google.com/books?id=09qUXlCkyVIC&q=khajuraho The Hindu Temple: Deification of Eroticism Daniélou Alain 2001 Inner Traditions / Bear & Co 978-0-89281-854-9 3, 11 en इन्हें अपवित्र नहीं, अपितु दिव्य सौन्दर्य, जीवनचक्र एवं ब्रह्माण्डीय सिद्धान्तों के पारस्परिक सम्बन्ध का प्रतीकात्मक निरूपण समझा जाता था।https://books.google.com/books?id=09qUXlCkyVIC&q=khajuraho The Hindu Temple: Deification of Eroticism Daniélou Alain 2001 Inner Traditions / Bear & Co 978-0-89281-854-9 3, 11 en इसी प्रकार की कलाकृतियाँ चोल साम्राज्य के सन्दर्भ में भी प्राप्त हुई हैं।https://books.google.com/books?id=9FrqAAAAMAAJ&q=nude Chola: Sacred Bronzes of Southern India Dehejia Vidya 2006 Royal Academy of Arts 978-1-903973-84-4 29, 37, 153 en मध्यकाल योगी प्रथाएँ- योगी ऐतिहासिक रूप से अत्यल्प वस्त्र धारण करते थे और बहुत से तो पूर्णतः नग्न रहते थे। यह प्रथा तपस्या के महत्त्व, भौतिक इच्छाओं एवं आसक्तियों से पृथक्करण में उनके विश्वास के अनुरूप है। उदाहरणार्थ, सन्त गोरखनाथ की जीवनी में हमें नग्न पुरुष एवं स्त्री योगियों के सन्दर्भ प्राप्त होते हैं, जो मध्यकालीन भारत में प्रसिद्ध अमरनाथ मन्दिर की यात्रा पर आए थे।Bharater Sadhak [Saints of India] Sankarnath Roy 1980 Hare Street, Kolkata Vol. 7 पाठ=Image of nude non-erotic sculpture at Khajuraho, showing two naked men|अंगूठाकार|खजुराहो में नग्न अकामुक शिल्प का उदाहरण इस्लामी आक्रमण (१२वीं शताब्दी से आगे)- इस्लामी शासकों के आगमन के साथ एक सांस्कृतिक विचलन आया। नवीन शासक नग्नता एवं मानव रूप के चित्रण के प्रति अधिक रूढ़िवादी दृष्टिकोण साथ लाए, जिसके फलस्वरूप सार्वजनिक स्थानों में नग्नता के कलात्मक निरूपण तथा सामान्यतः सार्वजनिक नग्नता में ह्रास हुआ।Medieval India: problems and possibilities: essays in honour of Professor A. R. Kulkarni https://archive.org/details/medievalindiapro0000unse 2006 Rawat Publications 978-81-316-0015-3 Seshan Radhika Jaipur Kulkarni Anant R. भक्ति एवं सूफ़ी आन्दोलन- जहाँ वृहत्तर समाज अधिक रूढ़िवादी हो चला था, भक्ति और सूफ़ी कवियों ने प्रायः नग्नता को पवित्रता, निष्कलुषता और सांसारिक कामनाओं से विमुक्त आत्मा के प्रतीक के रूप में उपमित किया।https://feminisminindia.com/2017/04/03/bhakti-movement-women/ The Bhakti Movement and Roots of Indian Feminism Thaosen Maduli 2017-04-02 Feminism in India en-GB 2023-11-01 ओडिशा में स्थित कोणार्क सूर्य मन्दिर में १३वीं शताब्दी ईसवी की नग्न कलाकृतियाँ विद्यमान हैं।https://books.google.com/books?id=9Yp_QgAACAAJ History of Indian and Indonesian Art Coomaraswamy Ananda Kentish 1985 Dover Publications 978-0-486-25005-2 en कहा जाता है कि कश्मीरी सन्त लल्लेश्वरी ने अपने वस्त्र त्याग कर नग्न नृत्य किया था।Ramaswamy Vijaya 1992 Rebels — Conformists? Women Saints in Medieval South India https://www.jstor.org/stable/40462578 Anthropos 87 1/3 133–146 0257-9774 40462578 पाठ=A sculpture on the temple wall|अंगूठाकार|कोणार्क सूर्य मन्दिर की भित्ति पर एक शिल्पकृति आधुनिक/औपनिवेशिक युग बरितानवी औपनिवेशिक शासन (१९वीं एवं २०वीं शताब्दी)- विक्टोरियाई नैतिकता तथा बरितानवी विधि-प्रणाली ने नग्नता के प्रति रूढ़िवादी मान्यताओं को और दृढ़ किया। वर्ष १८६० में लागू भारतीय दण्ड संहिता ने सार्वजनिक नग्नता को अपराध घोषित कर दिया। भारतीय कला जगत् में भी उल्लेखनीय परिवर्तन दृष्टिगत हुआ; नग्न रूप के चित्रण में अल्पता आई, क्योंकि कलाकार अपने औपनिवेशिक आश्रयदाताओं की रुचियों के अनुरूप सृजन करने लगे।https://books.google.com/books?id=HIRSEAAAQBAJ&dq=nair+breast+cloth+brahmin&pg=PA91 Unruly Women: Race, Neocolonialism, and the Hijab Sheth Falguni A. 2022 Oxford University Press 978-0-19-754713-7 enSharma Vishnu D. Wooldridge F. 1973 The Law Relating to Obscene Publications in India https://www.jstor.org/stable/757659 The International and Comparative Law Quarterly 22 4 632–647 10.1093/iclqaj/22.4.632 0020-5893 757659 subscription १९वीं शताब्दी के त्रावणकोर में, उच्च प्रतिष्ठा वाले व्यक्तियों के सम्मुख वक्ष-प्रदर्शन को स्त्री और पुरुष दोनों के लिए आदर का प्रतीक माना जाता था। अतः नाडार आरोहियों जैसी निम्न स्तरीय जातियों के जनों को अपना उर्ध्वकाय अनाच्छादित रखना होता था। नायर जैसी अन्य प्रभावशाली जातियों की स्त्रियों को भी ब्राह्मण पुरुषों के समक्ष अपना वक्षस्थल अनावृत रखना पड़ता था। नायर स्त्रियों को उनके सामने अपने वक्ष को ढकने का कोई अधिकार नहीं था।https://books.google.com/books?id=B_7sDwAAQBAJ&dq=nair+breast+cloth+brahmin&pg=PA49 Sensuality in Human Living: The Cultural Psychology of Affect Valsiner Jaan 2020-06-23 Springer Nature 978-3-030-41743-7 en चान्नर विद्रोह, नाडार आरोही स्त्रियों का चार दशकों से अधिक लम्बा संघर्ष था, जो ऊपरी शरीर के वस्त्र धारण करने के अधिकार के लिए किया गया। स्वातन्त्र्योत्तर युग १९४७ में स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात्, भारत में अपनी शास्त्रीय कलाओं के प्रति अभिरुचि का पुनरुत्थान हुआ, जिसके फलस्वरूप कलात्मक सन्दर्भों में नग्नता के प्रति अधिक उदार दृष्टिकोण विकसित हुआ।The Indian Postcolonial: A Critical Reader Boehmer Elleke Chaudhuri Rosinka 2010-10-04 Routledge 978-1-136-81956-8 en see Chapter:2 https://books.google.com/books?id=ufirAgAAQBAJ&dq=post+colonial+indian+nude+art+mf+husain&pg=PT74 तथापि, व्यापक सार्वजनिक क्षेत्र में नग्नता एक निषिद्ध विषय बनी रही, जो बदलते मानदण्डों और बाह्य प्रभावों की शताब्दियों से प्रभावित थी। इसके परिणाम स्वरूप मक़बूल फ़िदा हुसैन जैसे आधुनिकतावादी कलाकारों के प्रति विरोध एवं आक्रमण हुए।https://www.nytimes.com/2011/06/10/arts/design/maqbool-fida-husain-indias-most-famous-painter-dies-at-95.html Maqbool Fida Husain, India's Most Famous Painter, Dies at 95 Grimes William 2011-06-09 The New York Times 2023-11-02 en-US 0362-4331 चित्र दीर्घा सन्दर्भ श्रेणी:भारतीय संस्कृति श्रेणी:नग्नता