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विग्रहराज द्वितीय
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शाकंभरी के चाहमान राजा सी॰ 971-998 सीई चौहान वंश सिंहराज दुर्लभराज द्वितीय
right|thumb|300px|विग्रहराज द्वितीय का हर्षनाथ शिलालेख
right|thumb|300px|हर्षनाथ मंदिर
विग्रहराज द्वितीय चौहान वंश के राजा थे। वह चौहान वंश के प्रारंभिक शासकों में प्रतापी राजा सिंहराज का पुत्र था। इनका राज्य अभिषेक 971 में हुआ था और इन्होंने 998 तक शासन किया। उनके शासन काल के समय कई बार बाहरी आक्रमण हुए लेकिन इन्होने आक्रमणों का बड़ी वीरता से सामना किया और विदेशी आक्रमणकारियों को भारत भूमि में घुसने नहीं दिया। इस कारण ये कुशल शासक माने जाते थे। विग्रहराज के काल का विस्तृत वर्णन 973 ई. के हर्षनाथ के अभिलेख में किया गया है। इस शिलालेख में विग्रहराज द्वितीय को सांभर के आरंभिक चौहान शासकों में सबसे प्रतापी शासक बताया है जिसने दक्षिण की ओर नर्मदा तक सैनिक अभियान किया।चौहान शासक विग्रहराज (द्वितीय) को शिलालेखों में 'मतंग' कहा गया है।http://archive.org/details/early-chauhan-dynasties-dashrath-sharma Early Chauhan Dynasties (Dashrath Sharma) Dashrath Sharma 1975
विग्रहराज द्वितीय ने गुजरात के चालुक्य शासक मूलराज को हराकर गुजरात विजय प्राप्त की तथा गुजरात के भृगुकच्छ नामक स्थान पर अपनी कुलदेवी आशापुरा माता के मंदिर का निर्माण करवाया।
सन्दर्भ
श्रेणी:भारतीय राजा
श्रेणी:१०वीं शताब्दी के भारतीय शासक
श्रेणी:शाकंभरी के चाहमान