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बांग्लादेशी संविधान की प्रस्तावना
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बांग्लादेश के संविधान की प्रस्तावना संविधान की उद्देशिका है, इसमें बांग्लादेशी राष्ट्र की मूल नीतियाँ व वैचारिक नींव को अंकित किया गया है। हालाँकि, यह बांग्लादेशी संविधान का अंश है, परंतु यह एक न्यायिक लेख नहीं है, अतः किसी भी कानून या अन्य वस्तु को उद्देशिका में लिखी बातों के आधार पर न्यायिक चुनौती नहीं दी जा सकती है। इस संविधान में दिये गए मूल ढाँचे के अनुसार: देश प्रजातांत्रिक होगा, गणतंत्र होगी इसकी प्रशासनिक नींव, बांग्लादेश के जनगणन होंगे देश के सर्व शक्तियों के स्रोत और न्यायपालिका स्वतंत्रत होगी। जनता सर्व शक्तियों के स्रोत होने पर भी देश में कानून का शासन होगा। उद्देशिका में राष्ट्रवाद, समाजवाद, गणतंत्र व धर्मनिरपेक्षता को राष्ट्र परिचालन के मूल सिद्धांतों के रूप में अपनाया गया है। इसके लेख में बांग्लेदेश के संविधान-निर्माताओं ने आलेवाली सरकारों, विधी निर्माताओं व पीढ़ियों से संविधान व उनके बांग्लादेश की कल्पना के संदर्भ में, उनके विचार, मूल सिद्धांतों व संविधान सचना की मूल नीतियों को अंकित किया है।
संविधान के लेखन एवं मुद्रण का इतिहास
संविधान रचना के उद्देश्य से वर्ष १९७२ के अप्रैल मास की ११ तारीख को डाॅ. कमाल हुसैन की अध्यक्षता में ३४ सदस्यों की एक समिति गठित की गई।http://www.kalerkantho.com/print_edition/print_news.php?pub_no=334&cat_id=3&menu_id=85&news_type_id=1&index=1 संग्रहीत प्रति 7 मई 2016 19 अप्रैल 2023 https://web.archive.org/web/20230419000252/https://www.kalerkantho.com/print_edition/print_news.php?pub_no=334&cat_id=3&menu_id=85&news_type_id=1&index=1 dead
उसी वर्ष १७ अप्रैल से ३ अक्टूबर के बीच इस समिति ने विभिन्न पर्यायों पर कई बैठकें करती है। जनता की राय व विचारों को संग्रहित करने के लिए विचारों का आमंत्रण किया गया। संग्रहित विचारों में से 98 सिफारिशों को अपनाया भी गया। वर्ष १९७२, १२ अक्टूबर को गणपरिषद(संविधानसभा) के द्वितीय अधिवेशन में तत्कालीन कानून मंत्री डॉक्टर कमाल हुसैन ने संविधान के प्रारूप को विधायक के रूप में सभा के समक्ष पेश किया। गणपरिषद(संविधान सभा) में जनप्रजातंत्री बांग्लादेश की संविधान अपनायई गई एवं १६ दिसंबर १९७२ (विजय दिवस) के से परवर्तित हुई।
संविधान के लेखन पश्चात इसका बंगाली संस्करण की रचना के लिये, डाॅ. अनीसुज्जमान, संयोजक एवं सॆयद अली अहसान और मईहरुल्लाह् इस्लाम, को बतौर, भाषा विशेषज्ञ, सहित एक समिति गठित हुई। गणपरिषद भवन, जो वर्तमान में प्रधानमंत्री का राजआवास है, में संविधान प्रणयन समिति की बैठक में ब्रिटिश संसद के प्रारूपण सांसद आई गैथरील भी शरीक हुए। संविधान को छापने में कुल १४ हजार टाका व्यय हुए थे।हसीम खान अलंकरण के दायित्वपति थे। १९४८ में निर्मित "क्र्याबटी ब्रांड" के दो ऑफ़सेट मशीनों पर संविधान छपा। मूल संविधान को बांग्लादेश के राष्ट्रीय संग्रहालय में संरक्षित रखा गया है।http://archive.prothom-alo.com/detail/date/2010-11-05/news/106833 প্রথম আলো ৪ঠা নভেম্বর ২০১০ 7 मई 2016 https://web.archive.org/web/20170330001920/http://archive.prothom-alo.com/detail/date/2010-11-05/news/106833 30 मार्च 2017 live
पूर्ण लेख
मूल संविधान अंग्रेज़ी भाषा में रचित है एवं इसका बंगाली में अनुवाद कराया गया है। तभी यह बांग्ला व अंग्रेज़ी दोनो भाषाओं में विद्यमान है। अंग्रेज़ी व बंगाली के मध्य अर्थगत विरोध दृश्यमान होने पर बंगाली संस्करण अनुसरणीय होगी।बांग्लादेशी संविधान का अनुच्छेद १५३। नीचे उद्देशिका के बंगाली व अंग्रेज़ी संस्करण दिया गया है, एवं उनका हिन्दी अनुवाद भी दिया गया है(अनुवाद बंगला संस्करण के आधार पर है)
क्रं बंगला संस्करणhttp://bdconstitutionbangla.blogspot.in/ संग्रहीत प्रति 15 जून 2020 https://web.archive.org/web/20180317161924/http://bdconstitutionbangla.blogspot.in/ 17 मार्च 2018 dead अंग्रेज़ी संस्करणhttp://bdlaws.minlaw.gov.bd/pdf_part.php?id=367 संग्रहीत प्रति 7 मई 2016 https://web.archive.org/web/20120320200030/http://bdlaws.minlaw.gov.bd/pdf_part.php?id=367 20 मार्च 2012 dead हिन्दी अनुवाद १<div style="text-align: center;">প্রস্তাবনা
আমরা, বাংলাদেশের জনগণ, ১৯৭১ খ্রীষ্টাব্দের মার্চ মাসের ২৬ তারিখে স্বাধীনতা ঘোষণা করিয়া ২[ জাতীয় স্বাধীনতার জন্য ঐতিহাসিক যুদ্ধের] মাধ্যমে স্বাধীন ও সার্বভৌম গণপ্রজাতন্ত্রী বাংলাদেশ প্রতিষ্ঠিত করিয়াছি;<div style="text-align: center;">PREAMBLE
We, the people of Bangladesh, having proclaimed our Independence on the 26th day of March, 1971 and through a historic war for national independence, established the independent, sovereign People's Republic of Bangladesh;<div style="text-align: center;">प्रस्तावना
हम, बांग्लादेश के जनगणन, १९७१ ई. मार्च मास के २६ तारीख को स्वाधीनता धोषणा कर, [राष्ट्रीय स्वाधीनता हेतु ऐतिहासिक युद्ध के] माध्यम से स्वाधीन व सार्वभौमिक गणप्रजातंत्री बांग्लादेश की स्थापना की है;२<div style="text-align: center;">আমরা অঙ্গীকার করিতেছি যে, যে সকল মহান আদর্শ আমাদের বীর জনগণকে জাতীয় স্বাধীনতার জন্য যুদ্ধে আত্মনিয়োগ ও বীর শহীদদিগকে প্রাণোৎসর্গ করিতে উদ্বুদ্ধ করিয়াছিল সর্বশক্তিমান আল্লাহের উপর পূর্ণ আস্থা ও বিশ্বাস, জাতীয়তাবাদ, গণতন্ত্র এবং সমাজতন্ত্র অর্থাৎ অর্থনৈতিক ও সামাজিক সুবিচারের সেই সকল আদর্শ এই সংবিধানের মূলনীতি হইবে;<div style="text-align: center;">Pledging that the high ideals of absolute trust and faith in the Almighty Allah, nationalism, democ- racy and socialism meaning economic and social justice, which inspired our heroic people to dedi- cate themselves to, and our brave martyrs to sacrifice their lives in the war for national independ- ence, shall be fundamental principles of the Constitution;<div style="text-align: center;">हम प्रण लेते हैं की, जो सारे महान आदर्श हमारे वीर गनगण के राष्ट्रीय स्वाधीनता के युद्ध में आत्मसमर्पण व वीर शहीदों को प्राणोत्सर्ग करने के लिये प्रेरित किया था सर्वशक्तिमान अल्लाह [ईश्वर] पर पूर्ण आशा व विश्वास, राष्ट्रवाद, गणतंत्र एवं समाजवाद अर्थात् अर्थनैतिक व सामाजिक न्याय वे सर्व आदर्श इस संविधान की मूलनीतियाँ होंगे;३<div style="text-align: center;">আমরা আরও অঙ্গীকার করিতেছি যে, আমাদের রাষ্ট্রের অন্যতম মূল লক্ষ্য হইবে গণতান্ত্রিক পদ্ধতিতে এমন এক শোষণমুক্ত সমাজতান্ত্রিক সমাজের প্রতিষ্ঠা- যেখানে সকল নাগরিকের জন্য আইনের শাসন, মৌলিক মানবাধিকার এবং রাজনৈতিক, অর্থনৈতিক ও সামাজিক সাম্য, স্বাধীনতা ও সুবিচার নিশ্চিত হইবে;<div style="text-align: center;">Further pledging that it shall be a fundamental aim of the State to realise through the democratic process to socialist society, free from exploitation-a society in which the rule of law, fundamental human rights and freedom, equality and justice, political, economic and social, will be secured for all citizens;<div style="text-align: center;">हम यह भी संकल्प लेते हैं की, हमारे राष्ट्र का अन्यत्म मूल लक्ष होगा गणतांत्रिक पद्धती में ऐसा एक शोषणमुक्त समाजवादी समाज की स्थापना- जहाँ सभी नागरिकों के लिये कानून का शासन, मौलिक मानवाधिकार एवं राजनैतिक, अर्थनैतिक व सामाजिक समता, स्वाधीनता व न्याय निश्चित होगी;४<div style="text-align: center;">আমরা দৃঢ়ভাবে ঘোষণা করিতেছি যে, আমরা যাহাতে স্বাধীন সত্তায় সমৃদ্ধি লাভ করিতে পারি এবং মানবজাতির প্রগতিশীল আশা-আকাঙ্খার সহিত সঙ্গতি রক্ষা করিয়া আন্তর্জাতিক শান্তি ও সহযোগিতার ক্ষেত্রে পূর্ণ ভূমিকা পালন করিতে পারি, সেইজন্য বাংলাদেশের জনগণের অভিপ্রায়ের অভিব্যক্তিস্বরূপ এই সংবিধানের প্রাধান্য অক্ষুণ্ন রাখা এবং ইহার রক্ষণ, সমর্থন ও নিরাপত্তাবিধান আমাদের পবিত্র কর্তব্য;<div style="text-align: center;">Affirming that it is our sacred duty to safeguard, protect and defend this Constitution and to main- tain its supremacy as the embodiment of the will of the people of Bangladesh so that we may pros- per in freedom and may make our full contribution towards international peace and co-operation in keeping with the progressive aspirations of mankind;<div style="text-align: center;">हम दृढ़ रूप से घोषणा करते हैं की, हम जिस प्रकार स्वाधीन सत्ता में समृद्धि लाभ कर पाते हैं एवं मानवजाती की प्रगतिशील आशा-आकांक्षाओं के अनुरूप रक्षा करके अंतर्राष्ट्रीय शांति व सहयोगिता के क्षेत्र में पूर्ण भूमिका पालन कर पाते हैं, उसी प्रकार बांग्लादेश के लोगों के अभिप्राय में अभव्यक्तिस्वरूप इस संविधान के प्रधान्यता अक्षुण्ण रखने एवं इसकी रक्षा, समर्थन व निरापत्ताविधान हमारा पवित्र कर्तव्य है;५<div style="text-align: center;">এতদ্বারা আমাদের এই গণপরিষদে, অদ্য তের শত ঊনআশী বঙ্গাব্দের কার্তিক মাসের আঠারো তারিখ, মোতাবেক ঊনিশ শত বাহাত্তর খ্রীষ্টাব্দের নভেম্বর মাসের চার তারিখে, আমরা এই সংবিধান রচনা ও বিধিবদ্ধ করিয়া সমবেতভাবে গ্রহণ করিলাম।<div style="text-align: center;">In our Constituent Assembly, this eighteenth day of Kartick, 1379 B.S corresponding to the fourth day of November, 1972 A.D., do hereby adopt, enact and give to ourselves this Constitution.<div style="text-align: center;">एतद्वारा हमारे इस गणपरिषद [संविधान सभा] में, अद्य तेरह शत उन्यासी बंगब्द [बंगाली सावंत] के कार्तिक मास की अठारह तारीख, मोतवेक उन्नीस सौ बहत्तर ई. नवंबर मास की चार तारीख को, हम इस संविधान रचना व विधिबद्ध कर संवेदना सहित अपनाते हैं।
न्यायिक प्रावधान
यह उद्देशिका, संविधान का प्रथम पृष्ठ है, मुखभंज रूपी, इसके लेख में बांग्लेदेश के संविधान-निर्माताओं ने आलेवाली सरकारों, विधी निर्माताओं व पीढ़ियों से संविधान व उनके बांग्लादेश की कल्पना के संदर्भ में, उनके विचार, मूल सिद्धांतों व संविधान सचना की मूल नीतियों को अंकित किया है। हालाँकि, यह बांग्लादेशी संविधान का अंश है, परंतु यह एक न्यायिक लेख नहीं है, अतः किसी भी कानून या अन्य वस्तु को उद्देशिका में लिखी बातों के आधार पर न्यायिक चुनौती नहीं दी जा सकती है।
इन्हें भी देखें
बांग्लादेश का संविधान
बांग्लादेशी संविधान में संशोधनों की सूची
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
संविधान का पूरा लेख
श्रेणी:बांग्लादेश का संविधान