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बृहस्पति ट्रोजन
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बृहस्पति ट्रोजन (अंग्रेज़ी: Jupiter trojan), जिन्हें अक्सर केवल ट्रोजन क्षुद्रग्रह कहा जाता है, सौर मंडल में क्षुद्रग्रहों का एक अत्यंत विशाल समूह है जो बृहस्पति के साथ उसी की कक्षा को साझा करते हैं। ये क्षुद्रग्रह सूर्य और बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण संतुलन वाले दो विशेष क्षेत्रों—लैग्रेंज बिंदु-पर फंसे हुए हैं। ये क्षुद्रग्रह बृहस्पति के साथ 1:1 के 'माध्य-गति अनुनाद' में सूर्य की परिक्रमा करते हैं, जिसका अर्थ है कि इन्हें भी सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में बृहस्पति के समान ही लगभग 11.8 पृथ्वी-वर्ष लगते हैं।
पहले बृहस्पति ट्रोजन की खोज 1906 में जर्मन खगोलशास्त्री मैक्स वुल्फ ने की थी। उन्होंने बृहस्पति की कक्षा में आगे चलते हुए एक क्षुद्रग्रह खोजा और उसका नाम ग्रीक पौराणिक कथाओं के नायक 'अकिलीज़' के नाम पर '588 अकिलीज़' रखा।
जैसे-जैसे इस कक्षा में और अधिक क्षुद्रग्रह खोजे गए, खगोलविदों ने इन पिंडों का नाम 'ट्रोजन युद्ध' के नायकों के नाम पर रखने की परंपरा शुरू की। इन्हें दो मुख्य "शिविरों" में विभाजित किया गया है:
ग्रीक शिविर: ये क्षुद्रग्रह बृहस्पति से 60° आगे स्थित L4 बिंदु पर परिक्रमा करते हैं। इस समूह के क्षुद्रग्रहों का नाम युद्ध के ग्रीक नायकों (जैसे अकिलीज़, एगमेमोन, ओडीसियस) के नाम पर रखा गया है।
ट्रोजन शिविर: ये क्षुद्रग्रह बृहस्पति से 60° पीछे स्थित L5 बिंदु पर परिक्रमा करते हैं। इनका नाम ट्रॉय के रक्षकों (जैसे हेक्टर, प्रियम, एनीस) के नाम पर रखा गया है।
(नोट: परंपरा बनने से पहले नामकरण में हुई एक त्रुटि के कारण, एक ट्रोजन '624 हेक्टर' ग्रीक शिविर में है, और एक ग्रीक '617 पैट्रोक्लस' ट्रोजन शिविर में स्थित है। इन्हें अक्सर "जासूस" या Spies कहा जाता है।)
== उत्पत्ति और 'नाइस मॉडल' ==
बृहस्पति ट्रोजन की उत्पत्ति आधुनिक खगोल भौतिकी का एक प्रमुख शोध विषय है। यह माना जाता है कि ये क्षुद्रग्रह बृहस्पति के साथ वहीं नहीं बने थे जहाँ वे आज हैं।
सबसे अधिक स्वीकृत नाइस मॉडल के अनुसार, सौर मंडल के शुरुआती दिनों में (लगभग 4 अरब वर्ष पहले), विशाल ग्रहों (बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण) की कक्षाओं में भारी बदलाव हुआ था। इस अराजक गुरुत्वाकर्षण विस्थापन के दौरान, बाहरी सौर मंडल (कुइपर बेल्ट) के लाखों प्राचीन और बर्फीले पिंड आंतरिक सौर मंडल की ओर खिंचे चले आए। इनमें से कई पिंड बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण द्वारा इसके L4 और L5 बिंदुओं पर हमेशा के लिए 'कैद' कर लिए गए। यही कारण है कि ट्रोजन क्षुद्रग्रहों की संरचना मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट के चट्टानी पिंडों के बजाय बाहरी सौर मंडल के बर्फीले पिंडों से अधिक मिलती-जुलती है।
बृहस्पति ट्रोजन मुख्य रूप से 'डी-प्रकार' और 'पी-प्रकार' के क्षुद्रग्रह हैं। इनका रंग बहुत गहरा (गहरा लाल या भूरा) होता है और इनकी परावर्तकता अत्यंत कम होती है। इनकी सतह कार्बनिक पदार्थों और आदिम बर्फ से ढकी मानी जाती है।
इन प्राचीन पिंडों के रहस्यों को उजागर करने के लिए, नासा ने 2021 में लूसी मिशन लॉन्च किया। यह इतिहास का पहला अंतरिक्ष यान है जो विशेष रूप से बृहस्पति ट्रोजनों का अध्ययन करेगा। अपने 12 साल के सफर में लूसी दोनों शिविरों (ग्रीक और ट्रोजन) के कुल आठ अलग-अलग ट्रोजन क्षुद्रग्रहों के पास से उड़ान भरेगा और सौर मंडल के शुरुआती इतिहास का डेटा एकत्र करेगा।
== सन्दर्भ ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
नासा (NASA) - क्षुद्रग्रह और सौर मंडल अन्वेषण