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411 समाचार
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रामेश्वर त्रिवेणी संगम

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दिसम्बर 2015 दिसम्बर 2015 राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के खंडार तहसील में स्थित तीन नदियों के संगम पर बना भगवान शिव का पवित्र स्थल राजस्थान का त्रिवेणी संगम नाम से प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यहां तीन प्रमुख नदियां आकर मिलती है।1. बनास नदी 2. चंबल नदी 3. सींप नदी इतिहास आदि महाकाव्य रामायण के अनुसार वनवास के समय भगवान राम, लक्ष्मण व सीता वर्तमान सवाई माधोपुर की खण्डार तहसील में स्थित रामेश्वर तीर्थ की जगह एक रात का विश्राम किया था। रामायण के अनुसार दक्षिणी सागर ने जब भगवान राम को रास्ता नहीं दिया तो उसे सुखाने के लिए भगवान राम ने अमोघ बाण का प्रहार किया, जिससे समुद्र के स्थान पर मरूकान्तार हो गया जो अब राजस्थान का पश्चिमोत्तर भाग है। भूगर्भशास्र भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि जहाँ अभी रेगिस्तान है, वहां पहले समुद्र लहराता था। धार्मिक दृष्टि से पवित्र स्थल के रूप में विख्यात यह स्थान त्रिवेणी संगम के रूप में जाना जाता है, इस स्थान पर तीन प्रमुख नदियों का मिलान होता है, इसी कारण इसे त्रिवेणी संगम नाम दिया गया है, इस जगह पर चंबल नदी , बनास नदी एवं सीप नदी आकर मिलती है, कहाँ जाता है कि प्राचीन काल में भगवान राम ने मिट्टी का शिवलिंग स्थापित करके इसी जगह पर भगवान शिव की पूजा की थी। वर्तमान में इस स्थान पर शिव भक्तों का वर्ष भर जमावड़ा लगा रहता है, चारों तरफ प्रकृति की हरियाली यहाँ के पवित्र स्थान पर चार चाँद लगा देती है। इस त्रिवेणी संगम के पास ही भगवान चतुर्भुजनाथ का मंदिर भी बना हुआ है। मेला रामेश्वर शिव लिंग के दर्शनार्थ दूर दराज से आने वाले भक्तजन त्रिवेणी में स्नान कर भगवान शिव के शिव लिंग का जलाभिषेक करते हैं, इस स्थान पर प्रतिवर्ष 'कार्तिक पूर्णिमा' एवं 'महा शिवरात्री' पर विशाल मेला भरता है, लाखों की तादाद में यहाँ पर भीड़ इकट्ठा होती है। इस स्थान को राजस्थान में "मीणा जनजाति का प्रयागराज" भी कहाँ जाता है।