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411 समाचार
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बुद्धमित्रा

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बुद्धमित्रा लगभग 60 ई. मथुरा बौद्ध धर्म सर्वास्तिवाद त्रिपिटक का अध्ययन भिक्षुणी बाल (भिक्षु) बौद्ध प्रतिमाओं एवं स्तूपों की स्थापना, शिलालेख बुद्धमित्रा (जन्म लगभग 60 ई.) कुषाण साम्राज्य के समय भारत की एक प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षुणी थीं। वे मुख्यतः उन शिलालेखों और बोधिसत्व तथा गौतम बुद्ध की प्रतिमाओं के कारण जानी जाती हैं, जिन्हें उन्होंने गंगा नदी के समीप तीन नगरों में स्थापित कराया। इन प्रतिमाओं और स्मारकों से यह प्रमाणित होता है कि बुद्धमित्रा ने सर्वास्तिवाद सम्प्रदाय के लिए धन एवं संरक्षण प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जीवन और कार्य बुद्धमित्रा का जन्म लगभग 60 ई. में मथुरा में हुआ। उनके माता-पिता समृद्ध और धार्मिक बौद्ध थे। उन्होंने संघ में प्रवेश कर भिक्षुणी की दीक्षा ली। उनके गुरु भिक्षु बाल थे, जो सर्वास्तिवाद सम्प्रदाय से संबंधित थे। गुरु और शिष्या दोनों ही त्रिपिटक के गहन ज्ञाता माने जाते थे। लगभग 117 ई. से बुद्धमित्रा और बाल ने श्रावस्ती तथा सारनाथ में बौद्ध स्मारकों का निर्माण प्रारम्भ किया। इसमें क्षेत्र के दो शासकों वनस्पर और महारथी खरपल्लान का सहयोग मिला। इसके बाद बुद्धमित्रा लगभग 123 ई. तक कोसाम्बी (वर्तमान कौशाम्बी) में रहीं और वहाँ कई प्रतिमाएँ तथा स्तूप स्थापित कराए। इलाहाबाद संग्रहालय में संरक्षित एक पत्थर की खड़ी हुई बोधिसत्व प्रतिमा भी बुद्धमित्रा द्वारा स्थापित कराई गई थी। उस पर ब्राह्मी लिपि में अंकित अभिलेख में लिखा है: "महाराज कनिष्क के वर्ष 2, हेमन्त ऋतु के द्वितीय मास के अष्टमी दिवस पर यह बोधिसत्व प्रतिमा त्रिपिटक में पारंगत भिक्षुणी बुद्धमित्रा द्वारा भगवान बुद्ध की प्रदक्षिणा स्थल पर स्थापित की गई।" बुद्धमित्रा का उद्देश्य केवल धर्मांतरण नहीं बल्कि संरक्षण प्राप्त करना था। उनके प्रयासों से समृद्ध दाताओं और कुषाण शासकों का समर्थन सर्वास्तिवाद सम्प्रदाय को मिला। बुद्धमित्रा का समय चतुर्थ बौद्ध संगीति का भी काल माना जाता है। विद्वानों का अनुमान है कि वे अपनी विद्वत्ता और राजनीतिक संपर्कों के कारण इस संगीति में किसी न किसी रूप में शामिल रही होंगी।http://www.kushan.org/essays/women/4buddhist.htm The Fourth Buddhist Council A Rough Guide to Kushan History (kushan.org) 1 अगस्त 2013 स्मृति बुद्धमित्रा की भतीजी धनवती (या धनादेवी), जो स्वयं भी भिक्षुणी थीं, ने 148 ई. में मथुरा में उनकी स्मृति में एक बोधिसत्व प्रतिमा स्थापित कराई। शिलालेख में उल्लेख है कि धनवती, जो त्रिपिटक की ज्ञाता थीं, ने अपने माता-पिता के साथ मिलकर यह कार्य किया। अभिलेख और अध्ययन बुद्धमित्रा के संबंध में जानकारी मुख्यतः अभिलेखों से प्राप्त होती है। थियो डैम्सटीग्ट ने 1978 में अपने शोध प्रबंध Epigraphical Hybrid Sanskrit में इन शिलालेखों का संकलन किया और बुद्धमित्रा को भिक्षुणी के रूप में उल्लेखित किया।Epigraphical Hybrid Sanskrit Damsteegt, Theo Brill Archive 1978 178 1993 में सत्य श्रव ने The Dated Kushana Inscriptions प्रकाशित की, जिसमें इन शिलालेखों के अनुवाद और चित्र शामिल हैं। पीटर स्किलिंग (2001) और थियो मोहर व जाम्पा त्सोद्रोन (2010) ने भी अपने शोध में बुद्धमित्रा का उल्लेख किया है। और देखें भिक्षुणी कुषाण साम्राज्य सर्वास्तिवाद संदर्भ श्रेणी:भारतीय बौद्ध भिक्षुणी श्रेणी:भारतीय बौद्ध श्रेणी:कुषाण साम्राज्य के लोग श्रेणी:१वीं शताब्दी के बौद्ध श्रेणी:१वीं शताब्दी के भारतीय लोग