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पादशाह बेगम
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पादशाह बेगम मुग़ल साम्राज्य की साम्राज्ञी-पत्नी को प्रदान की जाने वाली एक सर्वोच्च शाही उपाधि थी और इसे मुग़ल हरम या ज़नाना की सबसे महत्वपूर्ण उपाधि माना जाता था। यह उपाधि सामान्यतः "साम्राज्ञी" या "प्रथम महिला" के बराबर थी और इसका अर्थ था कि इस बेगम को बादशाह के अधिकार और प्रतिष्ठा का एक हिस्सा सौंपा गया है ।http://archive.org/details/51oT8g03aBL.SX312BO1204203200 Nur Jahan_ Empress of Mughal India MOhamed Nasr
'पादशाह बेगम' की उपाधि केवल मुग़ल सम्राट की प्रमुख या मुख्य पत्नी, बहन, माता या किसी प्रिय पुत्री को ही प्रदान की जा सकती थी और एक ही समय में एक से अधिक महिलाएँ इसे धारण नहीं कर सकती थीं। इसका प्रमाण इस तथ्य से मिलता है कि सम्राट जहाँगीर की पत्नी नूर जहाँ ने इस उपाधि का उपयोग तब तक नहीं किया, जब तक उनकी मुख्य पत्नी सलीहा बानू बेगम (पादशाह बेगम) की मृत्यु नहीं हो गई।
जहाँ तक मुग़ल सम्राटों की पत्नियों का संबंध था, यह उपाधि केवल सम्राट की मुख्य पत्नी को ही प्रदान की जा सकती थी। यह उपाधि सबसे पहले माहम बेगम को प्रदान की गई, जो सम्राट बाबर की मुख्य पत्नी थीं। हुमायूँ के शासनकाल में बेगा बेगम ने यह उपाधि धारण की। अकबर ने यह उपाधि अपनी माता हमीदा बानो बेगम को प्रदान की, जिन्होंने 1604 में अपनी मृत्यु तक इसे धारण किया।
सम्राट जहाँगीर ने यह उपाधि अपनी मुख्य पत्नी सालिहा बानो बेगम को प्रदान की और फिर उनकी मृत्यु के बाद उनकी उत्तराधिकारी नूरजहाँ को दी। सम्राट शाहजहाँ ने यह उपाधि अपनी मुख्य पत्नी मुमताज़ महल को प्रदान की, लेकिन उनकी मृत्यु के बाद उन्होंने इसे अपनी पुत्री जहाँआरा बेगम को दे दिया। अपने पति आज़म शाह के संक्षिप्त शासनकाल के दौरान शाहर बानू बेगम को कुछ समय के लिए पादशाह बेगम कहा गया, लेकिन यह ज्ञात नहीं है कि वास्तव में उन्हें यह उपाधि प्रदान की गई थी या नहीं। सम्राट मुहम्मद शाह ने यह उपाधि अपनी मुख्य पत्नी बादशाह बेगम को प्रदान की।
यह उपाधि सम्राट की पुत्री को भी प्रदान की जाती थी, जैसे सम्राट शाहजहाँ की पुत्री राजकुमारी जहाँआरा बेगम और सम्राट औरंगज़ेब की पुत्री राजकुमारी ज़ीनत-उन-निसा बेगम, जिन्होंने अपने पूरे जीवनकाल यह उपाधि धारण की।
कुछ मामलों में, यह उपाधि सम्राट की बहन को भी प्रदान की जाती थी। औरंगज़ेब ने अपनी बहनों रोशनआरा बेगम और जहाँआरा बेगम को यह उपाधि प्रदान की। जब किसी तैमूरी शहज़ादी के पास यह उपाधि होती थी, तो इसका अर्थ "राजकुमारियों में साम्राज्ञी" होता था।
सन्दर्भ
श्रेणी:मुग़ल साम्राज्य से सम्बन्धित स्त्रियाँ