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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

बी॰ एन॰ राव

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सर बी॰ एन॰ राव BN Rau 1988 stamp of India.jpg 1988 भारत के स्टैंप पर बी॰ एन॰ राव अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश 1952–1953 चार्ल्स डि विशर मुहम्मद ज़फ़रुल्लाह ख़ान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जून 1951 जम्मू कश्मीर के मंत्री कैलाश नाथ हसकर राम चंद्र काक 1944–1945 1887 02 26 y मंगलोर, मद्रास प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत वर्तमान – कर्नाटक 1953 11 30 1887 02 26 y ज़्युरिख़, स्विट्ज़रलैंड लोक सेवक, न्यायमूर्ति, सांविधानिक विद्वान बेनेगल नरसिंह राव (Benegal Narsimha Rau) एक भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश, तथा भारतीय संविधान के मुख्य सलाहकार थे ।http://www.britannica.com/EBchecked/topic/492161/Sir-Benegal-Narsing-Rau Sir Benegal Narsing Rau (Indian jurist) – Encyclopædia Britannica Britannica.com 30 November 1953 11 August 2020 भारतीय संविधान को डाक्टर भीमराव आंबेडकर के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक तदर्थ समिति ने लिखा था जिसमें बेनेगल नरसिंह राव, के एम मुंशी, एन गोपालस्वामी आयंगर, अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर, सैयद मोहम्मद सादुल्लाह, एन माधव राऊ (मैसूर के दीवान) और डीपी खैतान सम्मिलित थे। संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसम्बर 1946 को हुई थी 29 अगस्त 1947 को प्रारूप कमेटी बनाई गई जिसके अध्यक्ष अंबेडकर साहब को बनाया गया। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को संविधान प्रारूप समिति का अध्यक्ष चुना गया। वही बी एन राव ने संविधान निर्माण के जटिल पहलुओं पर डॉ आंबेडकर का मार्गदर्शन किया था। प्रारम्भिक जीवन बेनेगल नरसिंह राव का जन्म २६ फरवरी १८८७ को कारकल में हुअ था जो वर्तमान समय में कर्नाटक के दक्षिण केनेरा ज़िले में पड़ता है। उनका परिवार एक सुशिक्षित एवं सम्पन्न सारस्वत ब्राह्मण परिवार था। उनके पिता एक प्रसिद्ध डॉक्टर थे। नरसिंह राव ने केनेरा हाई स्कूल मंगलोर से शिक्षा प्राप्त की और पूरे मद्रास प्रेसीडेन्सी में सर्वाधिक अंक प्राप्त किये। १९०५ में उन्होंने स्नातक परीक्षा उतीर्ण की जिसमें उनको अंग्रेजी, संस्कृत और भौतिकी तीनों में प्रथम श्रेणी में अंक आये थे। छात्रवृत्ति पर वे १९०९ में कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में प्रविष्ट हुए। वे १९०९ में आई सी एस की परीक्षा में सफल होने के बाद भारत लौट आये। . 50 लोगों के बैच में वो अकेले भारतीय थे। अंग्रेज़ सरकार ने उनकी पहली नियुक्ति मद्रास में की थी। इस पर उन्होंने सिविल सर्विस कमिश्नर को एक पत्र भेजकर लिखा था, "जिस प्राँत में मेरी नियुक्ति हुई है, वहाँ मेरे बहुत सारे मित्र और संबंधी हैं। मद्रास प्रेसिडेंसी में ही मेरे पिता की ज़मीन भी है। इन परिस्थितियों में मैं अपना काम शायद पक्षपात से परे होकर न कर पाऊँ। इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी नियुक्ति कहीं और कर दें. आप मुझे बर्मा भी भेज सकते हैं।" अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें बंगाल में नियुक्त कर दिया। सन् 1938 में उन्हें 'नाइटहुड' की उपाधि दी गई। सन 1944 में जब वो रिटायर हुए तो तेज बहादुर सप्रू ने उनसे जम्मू कश्मीर के प्रधानमंत्री का दायित्व संभालने का अनुरोध किया। वे श्रीनगर गए लेकिन वहाँ अधिक दिनों तक नहीं रह सके। कश्मीर के महाराजा हरि सिंह की कार्यशैली से वो असहमत थे। उन्होंने अपना त्यागपत्र भेज दिया जिसमें उन्होंने लिखा, 'आपके निर्णयों पर बिना विश्वास किए उन्हें मानना ईमानदारी नहीं होगी।' सन 1946 में बर्मा के प्रधानमंत्री यू आँग सान ने उन्हें देश के संविधान लिखने में मदद करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने इस काम को भी विशिष्टतापूर्वक पूरा किया। इसके बाद उन्हें कलकत्ता उच्च न्यायालय में स्थायी न्यायधीश बनाने का प्रस्ताव दिया गया। उन्होंने इसे अस्वीकार करते हुए वायसराय को पत्र लिखा, 'अगर मुझे मौका मिले तो मैं भारतीय संघ का संवैधानिक ढांचा बनाने में अपना योगदान दे सकता हूँ।' वायसराय ने उन्हें सचिव पद का दर्जा देकर गवर्नर जनरल सचिवालय के रिफ़ॉर्म ऑफ़िस में नियुक्त कर दिया। जुलाई 1946 में लॉर्ड वेवेल ने उन्हें संविधान सभा का संवैधानिक सलाहकार बनाया। बेनेगल नरसिंह राव ने प्रस्ताव रखा कि संवैधानिक सलाहकार पद पर अवैतनिक रूप में काम करेंगे। इसके लिए उन्होंने दो तर्क दिए- पहला यह कि हर पक्ष उन्हें निष्पक्ष मानेगा और दूसरा कि अगर संविधान के बनने में देरी होती है तो उसका दोष संविधान सभा के कार्यालय पर न आए। भारतीय संविधान के पहले 243 अनुच्छेद बेनेगल नरसिंह राव ने तैयार किए। उसके बाद भीमराव आंबेडकर की अध्यक्षता वाली मसौदा समिति ने इसे विस्तार दिया। बेनेगल नरसिंह राऊ के मूल मसौदे में देश का नाम 'इंडिया' था उन्होंने एक संघ की परिकल्पना की थी जो 1935 के अधिनियम पर आधारित था। संविधान के तीसरे अध्याय में नीति निदेशक सिद्धांतों के लिए 41 प्रावधान थे। सन् 1949 से 1952 तक नरसिंह राव संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि रहे। इसके बाद उन्हें हेग में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की बेंच में जज बनाया गया। 26 फ़रवरी 1953 को जेनेवा में कैंसर से उनका निधन हो गया। इसे एक विडंबना ही कहा जाएगा कि भारत के संविधान निर्माण में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उनके योगदान को उतना महत्व नहीं मिला जिसके वे अधिकारी थे। नरसिंह राव पर भारतीय नेताओं के विचार संविधान पर हस्ताक्षर करने से पहले संविधान सभा के अध्यक्ष डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने राव को धन्यवाद देते हुए कहा था कि उन्होंने न केवल अपने ज्ञान और पांडित्य से संविधान सभा की मदद की है बल्कि दूसरे सदस्यों को भी पूरे विवेक के साथ अपनी भूमिका निभाने में मदद की है। संविधान बन जाने के बाद 25 नवंबर, 1949 को डाक्टर राजेंद्र प्रसाद ने कहा था, "संविधान बनाने का जो श्रेय मुझे दिया जा रहा है, वास्तव में मैं उसका अधिकारी नहीं हूँ। उसके वास्तविक अधिकारी बेनेगल नरसिंह राव भी हैं जो इस संविधान के संवैधानिक परामर्शदाता हैं और जिन्होंने मसौदा समिति के विचारार्थ संविधान का मोटे रूप में मसौदा बनाया।" यह सुनने के लिए बेनेगल नरसिंह राव संविधान सभा में मौजूद नहीं थे क्योंकि तब तक उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और वो संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि बन गए थे। बाद में सन 1960 में प्रकाशित बी शिवा राव की पुस्तक 'इंडियाज़ कॉन्स्टीट्यूशन इन द मेकिंग' के प्राक्कथन में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने लिखा था - "अपने ज्ञान और अनुभव के कारण बेनेगल नरसिंह राऊ संविधान सभा के संवैधानिक सलाहकार पद के लिए अपरिहार्य व्यक्ति थे। उन्होंने संविधान सभा के सदस्यों के लिए आवश्यक सहायक सामग्री खोजी और उसे साधारण आदमी की समझ के लिए आसान शब्दों में प्रस्तुत किया। संविधान सभा के अधिक्तर सदस्य स्वाधीनता सेनानी थे। उन्हें संविधान की जटिलताएं मालूम नहीं थीं।" डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने आगे लिखा- "संविधान पर सामग्री की कमी नहीं थी, लेकिन उसका सही चयन और उसकी उचित व्याख्या का काम बहुत चुनौतीपूर्ण था।" "राऊ ने दुनिया के लिखित और अलिखित संविधानों का गहन अध्ययन कर समय समय पर अपने दस्तावेज़ों में उपयोगी तथ्य और तर्क दिए और उसे सदस्यों के लिए उपलब्ध कराया. अगर डॉक्टर भीमराव आंबेडकर संविधान निर्माण के विभिन्न चरणों में एक कुशल पायलट की भूमिका में थे, तो बेनेगल राऊ वो व्यक्ति थे जिन्होंने संविधान की एक स्पष्ट परिकल्पना दी और उसकी नींव रखी. संवैधानिक विषयों को साफ़-सुथरी भाषा में लिखने की उनमें कमाल की योग्यता थी." बी शिवाराव की संपादित पुस्तक 'इंडियाज़ कांस्टीट्यूशन इन द मेकिंग' में 29 अध्याय हैं जिसमें अधिकतर बेनेगल नरसिंह राऊ के वो दस्तावेज़ शामिल हैं जो उन्होंने संविधान निर्माण में मदद पहुंचाने के लिए लिखे थे। संविधान सभा की बहस में जब कभी विवाद के विषय उठे राव का परामर्श लिया जाता था जो हमेशा उनके गहरे अध्ययन पर आधारित होता था। पुस्तक की प्रस्तावना में बी शिवाराव ने लिखा है कि 'बेनेगल नरसिंह राव को भावी पीढ़ियाँ संविधान के प्रधान निर्माता के रूप में याद करेंगी।' प्रकाशन B.N. Rau (1947) Constitutional Precedents (New Delhi: Government of India Press) B.N. Rau (1948) The Constitution of the Union of Burma, 23 Wash. L. Rev. & St. B. J. 288 B. N. Rau (1949) The Parliamentary System of Government in India 24 Wash. L. Rev. & St. B. J. 91 B.N. Rau (1949) The Indian Constitution (Manchester: Manchester Guardian) B.N. Rau (1951) India and the Far East: Burwash Memorial Lectures (Toronto: Victoria University) Rau India's Constitution in the Making Rau B. N. Orient Longmans 1960 Rao B. Shiva Calcutta सन्दर्भ श्रेणी:भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी श्रेणी:भारत के न्यायविद श्रेणी:1887 में जन्मे लोग श्रेणी:१९५३ में निधन श्रेणी:कर्नाटक के लोग 13 ,दिसंबर 1946 को संवैधानिक सलाहकार के रूप में नियुक्त किया।