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411 समाचार
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कच्छी घोड़ी नृत्य

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कच्छी घोड़ी नृत्य 200px कच्छी घोड़ी नृत्य का एक चित्र राजस्थानी लोकनृत्य विधा भारतीय लोकनृत्य संकेत ताल आविष्कारक वर्ष data30 देश भारत कच्छी घोड़ी नृत्य भारतीय राज्य राजस्थान का एक लोकनृत्य है। यह राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र से आरम्भ हुआ नृत्य है।Kachhi Ghodi Dance http://rajasthan-tourism-guide.com/kacchi-ghodi.html राजस्थान पर्यटन १४ अप्रैल २०१५ अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20130910061641/http://www.rajasthan-tourism-guide.com/kacchi-ghodi.html 10 सितंबर 2013 dead यह केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि भारत के अन्य भागों जैसे महाराष्ट्रA royal visarjan for Siddhivinayak Ganpati in Mumbai मुम्बई में सिद्धिविनायक गणपति के लिए शाही विसर्जन कृतिका बेहरवाला http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/events/mumbai/A-royal-visarjan-for-Siddhivinayak-Ganpati-in-Mumbai/articleshow/41792802.cms द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया ६ सितम्बर २०१४ १४ अप्रैल २०१५ https://web.archive.org/web/20150719083010/http://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/events/mumbai/A-royal-visarjan-for-Siddhivinayak-Ganpati-in-Mumbai/articleshow/41792802.cms 19 जुलाई 2015 live , गुजरातDelhi’s Gujaratis rejoice: Modi makes dreams happen दिल्ली के गुजराती आनन्दित: मोदी उनके सपनों को साकार करता है http://indianexpress.com/article/cities/delhi/delhis-gujaratis-rejoice-modi-makes-dreams-happen/ द इंडियन एक्सप्रेस श्वेता रामाकृष्णन, पल्लवी पुंधीर १७ मई २०१४ १४ अप्रैल २०१५ अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20150416063057/http://indianexpress.com/article/cities/delhi/delhis-gujaratis-rejoice-modi-makes-dreams-happen/ 16 अप्रैल 2015 live आदि में भी प्रसिद्ध है। इसमें नर्तक नकली घोड़ों पर सवारी करते है।http://www.craftandartisans.com/kachi-gori-dance-of-rajasthan.html संग्रहीत प्रति 4 अप्रैल 2015 https://web.archive.org/web/20150409164558/http://www.craftandartisans.com/kachi-gori-dance-of-rajasthan.html 9 अप्रैल 2015 dead इसका प्रदर्शन सामाजिक एवं व्यावसायिक दोनों तरह से होता है। यह नृत्य दूल्हा पक्ष के बारातियों के मनोरंजन करने के लिए व अन्य खुशी अवसरों पर भी प्रदर्शित किया जाता है। नृत्य का तरीका कच्छी घोड़ी नृत्य नकली घोड़ों पर किया जाता है। पुरुष बेहतर चमकते दर्पणों से सुसज्जित फैंसी ड्रेस पहनते है ,और नकली घोड़ों पर सवारी करते हैं। ये नर्तक अपने हाथों में तलवार लेकर ,नकली घोड़ों पर सवारी करतें हैं। ये नर्तक तलवारों कों ढोल व बांसुरी की लय पर संचालन करतें हैं। नृत्यक प्रायः नकली घोड़े पर नकली घुड़दौड़ दौड़ता है। भंवारिय नाम के डकैत के बारे में गानें गाता है। अपनी तलवार का प्रदर्शन ढोल व बांसुरी की धुन पर करता है।http://rajasthan-tourism-guide.com/kacchi-ghodi.html संग्रहीत प्रति 4 अप्रैल 2015 https://web.archive.org/web/20130910061641/http://www.rajasthan-tourism-guide.com/kacchi-ghodi.html 10 सितंबर 2013 dead इस नृत्य में एक तरफ चार नर्तक खड़े होते है और चार दूसरी तरफ . ये जब आगे व पीछे नकली घोड़ों पर दौड़तें हैं तो ऐसे लगते है मानों फूल खुल व बंद हो रहे हों। क्षेत्र इस नृत्य राजस्थान के पारंपरिक लोक नृत्य है। यह प्रसिद्ध नृत्य राजस्थान के समारोहों, कला, संस्कृति और जीवन के साथ जुड़ा हुआ है। इस नृत्य का प्रदर्शन मुख्यतः शेखावाटी ( राजस्थान ) क्षेत्र में ही नहीं होता है बल्कि पूरे भारतवर्ष में पाया जाता हैं नर्तक की पोशाक नर्तक शरीर के हिस्से पर पारंपरिक वेशभूषा लाल पगड़ी, धोती और कुर्ता पहनता है।http://www.dance.anantagroup.com/kachhi-ghodi-dance/ संग्रहीत प्रति 4 अप्रैल 2015 https://web.archive.org/web/20150410091823/http://www.dance.anantagroup.com/kachhi-ghodi-dance/ 10 अप्रैल 2015 dead नर्तक शरीर के निचले हिस्से में कागज की लुगदी और टोकरी से तैयार एक नकली घोड़ा पहनता है। नर्तक पेरों में घुँघरू पहनता है। पुरुष बेहतर चमकते दर्पणों से सुसज्जित फैंसी ड्रेस पहनते है ,और नकली घोड़ों पर सवारी करते हैं। मुख्य वाद्ययंत्र मुख्य=बाँकियो ढोल थाली बांसुरी घुंघरू अलगोजा झाँझ [Harendra ] उत्पति इस नृत्य की उत्पति राजस्थान के शाही दरबारों में हुई है। यह नृत्य राजस्थान का पारंपरिक लोक नृत्य है। यह नृत्य उन राजमार्ग लुटेरों की कहानी से संबंधित है जो शेखावाटी क्षेत्र में 17 वीं सदी में रहते थे व गरीबों को देने के लिए अमीरों का धन लूटते थे। ऐसा कहा जाता है कि मुगलों और मराठों के शासन के समय में इस नृत्य के बारे में एक दिलचस्प कहानी है। मुगल एक बार घोड़ों पर सवार होकर आए थे और मराठों के गांवों में से एक गांव में रुके। वे जब सोने के लिए चले गये , तब मराठे आये और उन घोड़ों को चुरा लिया। बाद में पठानों ने युद्ध में इन घोड़ों को पाया। यह युद्ध, घोड़ा युद्ध के रूप में जाना जाता है। राजस्थान में कला प्रदर्शन ज्यादातर राजस्थान के जनजातियों और जातियों के लिए सामाजिक ऐतिहासिक परिदृश्य को प्रतिबिंबित करता है। घोड़े हमेशा राजस्थान में युद्ध और परिवहन के एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। बहादुर राना प्रताप सिंह (भारत के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी) की कथा है, उसके प्रति वफादार घोड़े- चेतक के उल्लेख के बिना अनकही है। वे शाही सत्ता के प्रतीक थे उन्होंने घोड़ों को घोड़ों के साथ बैलगाड़ी, हाथीयों व डाकुओं को रोकने में समर्थ पाया. राजस्थान में कला प्रदर्शन के ज्यादातर राजस्थान के जनजाति के संबंध को दर्शाती है और वे समय या जाति के लिए अजीब सामाजिक ऐतिहासिक परिदृश्य को प्रतिबिंबित करता है। घोड़े हमेशा राजस्थान में युद्ध और परिवहन के एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। सूइसिनी नृत्य मध्यकालीन भारत में राजस्थान में यह नृत्य आरम्भ हुआ। हाल के समय में यह लुप्त प्रायः रह गया है तथा इसका स्थान कालबेलिया (2010 में यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में स्थान प्राप्त) तथा घूमर या गणगौर ने ले लिया है। सन्दर्भ https://web.archive.org/web/20150410091823/http://www.dance.anantagroup.com/kachhi-ghodi-dance/ https://web.archive.org/web/20150410025231/http://www.padharorajasthan.co.in/music-and-dance-details/kachhi-ghodi-dance-9.html#.VR_kyPmJg2w https://web.archive.org/web/20150409190818/http://www.discoveredindia.com/rajasthan/culture-in-rajasthan/dance-in-rajasthan/ श्रेणी:राजस्थानी लोकनृत्य