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सेवा दल
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जून 2026
सन् 1947 के समय हिंदुस्तानी सेवा दल (जिसे अब कांग्रेस सेवा दल के नाम से जाना जाता है) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का एक अनुशासित स्वयंसेवक संगठन था। पंडित जवाहरलाल नेहरू इसके सबसे प्रमुख नेताओं और संस्थापकों में से एक थे।
1947 के आसपास इसके बारे में मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
स्थापना और उद्देश्य
सेवा दल की स्थापना मुख्य रूप से युवाओं को अनुशासित करने और उन्हें देश सेवा के लिए तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी। इसका गठन 1923-24 के दौरान डॉ. एन. एस. हार्डीकर द्वारा किया गया था, लेकिन इसे मजबूत बनाने में नेहरू जी का बड़ा हाथ था।
नेहरू का जुड़ाव
प्रथम अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू इस संगठन के पहले अध्यक्ष बने थे।
अनुशासन पर जोर: नेहरू जी का मानना था कि बिना अनुशासन के कोई भी देश महान नहीं बन सकता। वे स्वयं सेवा दल की वर्दी (खाकी पोशाक और गांधी टोपी) पहनकर परेड में हिस्सा लेते थे।
युवा शक्ति: उन्होंने सेवा दल को एक ऐसे मंच के रूप में तैयार किया जहाँ जाति और धर्म से ऊपर उठकर युवा केवल 'भारतीय' बनकर देश की सेवा करें।
1947 (आज़ादी और विभाजन) के समय भूमिका
आज़ादी के वर्ष में सेवा दल ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में काम किया:
शरणार्थियों की सहायता: विभाजन के दौरान जब लाखों लोग पाकिस्तान से भारत आ रहे थे, तब सेवा दल के स्वयंसेवकों ने शरणार्थी शिविरों (Refugee Camps) में भोजन, चिकित्सा और सुरक्षा पहुँचाने का काम किया।
सांप्रदायिक सद्भाव: दंगों को रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए नेहरू जी के आह्वान पर इन स्वयंसेवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया।
राष्ट्र निर्माण: आज़ादी के बाद नए भारत के निर्माण और सरकारी कार्यक्रमों को जनता तक पहुँचाने में इस दल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्य प्रणाली
सेवा दल के कार्यकर्ताओं को शारीरिक प्रशिक्षण, ड्रिल और मार्च-पास्ट सिखाया जाता था। इनका मुख्य नारा "सेवा, त्याग और अनुशासन" था।
संक्षेप में कहें तो, 1947 के समय सेवा दल नेहरू जी की वह "अनुशासित सेना" थी जिसने देश को दंगों से बचाने और विभाजन की त्रासदी झेल रहे लोगों को सहारा देने में ऐतिहासिक योगदान दिया।