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जोज़ेफ़ प्रीस्टलि
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right|thumb|300px|जोस्फ प्रिस्टले
जोज़ेफ़ प्रीस्टलि (Priestley, Joseph; सन् १७३३ - १८०४) १८वीं शती के जगत्प्रसिद्ध, अंग्रेज रसायनज्ञ थे, जिन्होंने ऑक्सीजन की खोज की थी।
परिचय
जोजेफ प्रिस्टले का जन्म लीड्ज़ के समीप फील्डहेड में हुआ था। बाल्यकाल में स्वास्थ्य अनुकूल न होने के कारण बहुत दिनों तक इनका अध्ययन बदं रहा और ये इधर उधर व्यापार संबंधी काम करते रहे। बाद को डॉ॰ डॉडरिज (Doddridge) द्वारा डेवेट्री में स्थापित एक अकादमी में इन्होंने धर्मशिक्षा प्राप्त की। प्रीस्टलि ने रूढ़िगत परंपराओं के प्रति आस्था प्रकट न की और अपने निजी ढंग पर प्रत्यक्ष और परोक्ष के प्रश्नों पर विचार करना प्रारंभ किया। १७५५ ई. में ये सफक (Suffolk) के एक छोटे से समुदाय के नीडैम मार्केट में पादरी हो गए। यहाँ इन्होंने एक पुस्तक 'दी स्क्रिपचर डॉक्ट्रिन ऑव रेमिशन' लिखी, जिसमें ईसा की मृत्यु और पाप संबंधी प्रचलित विचारों का विरोध किया गया था। १७५८ ई. में इन्हांने नीडैम अकादमी छोड़ दी और नैटविच चले गए। १७६१ ई. में ये बैरिगटन की एक अकादमी में भाषाओं के अध्यापक हो गए। यहीं प्रिस्टलि का साहित्यिक जीवन आरंभ हुआ। इनका लंदन आना जाना लगा रहता था, जिससे प्रिस्टलि का परिचय फ्रैंकलिन से हो गया। फ्रैंकलिन ने जो सामग्री इन्हें प्रदान की, उसके आधार पर प्रीस्टलि ने १७६७ ई. में विद्युत् संबंधी पुस्तक 'हिस्ट्री ऐंड प्रेजेंट स्टेट ऑव इलेक्ट्रिसिटी' लिखी। इसके बाद ही इनकी प्रकाश संबंधी पुस्तक 'विज़्हन, लाइट ऐंड कलर्स' (दृष्टि, प्रकाश और रंग) प्रकाशित हुई। १७६२ ई. में इन्होंने भाषा और सर्वमान्य व्याकरण के सिद्धांत पर एक पुस्तक लिखी।
१७६४ ई. में इन्हें एल-एल.डी. की उपाधि एडिनबरा से मिली और १७६६ ई. में ये रॉयल सोसायटी के फेलो निर्वाचित हुए। इगले वर्ष ये लीड्ज़ में एक गिरजा के पादरी हो गए। यहाँ इनके घर के निकट शराब बनाने का एक छोटा कारखाना प्रारंभ हुआ। प्रीस्टलि ने इस कारखाने में रुचि लेना प्रारंभ किया, जिसके कारण इनका ध्यान रसायन विज्ञान की ओर आकर्षित हुआ। पर प्रमुख वृत्ति अभी साहित्यिक ही थी। १७७३ ई. में ये लार्ड शेलबर्न के साहित्यिक सहायक नियुक्त हुए और यूरोप की यात्रा की। 'मैटर और स्पिरिट' (प्रकृति और पुरुष) पर एक ग्रंथ लिखा, जिसमें प्रकृति में चेतनता और आत्मा में जड़ता, इस प्रकार विरोधी भावों का समन्वय करना चाहा। ये विज्ञान की सत्यता की अपेक्षा बाइबिल की सत्यता में अधिक आस्था रखते थे। बाद को लार्ड शेलबर्न का साथ इन्होंने छोड़ दिया और बर्मिघम के गिरजे के पादरी बने। यहाँ इन्होंने ईसा मसीह से संबधित विवादास्पद विचारों पर एक पुस्तक लिखी, जिसका नाम 'हिस्ट्री ऑव अर्ली ओपिनियन्स कन्सर्निग जीसस क्राइस्ट' है। बर्क की एक पुस्तक 'रिफ्लेक्शन्स ऑन फ्रेंच रेवोल्यूशन' का प्रीस्टलि ने उत्तर लिखा, जिसके परिणामस्वरूप इन्हें फ्रेंच रिपब्लिक का नागरिक बना लिया गया। इस नागरिकता के कारण इनके नगर के लोग बिगड़ उठे, उन्होंने इनका घर लूट लिया और इनकी पुस्तकें तथा पांडुलिपियाँ जला दीं। इसी समय इनके एक बहनोई की मृत्यु हुई और इन्हें उसकी १०,००० पाउंउ की संपत्ति मिल गई। इनके स्वतंत्र विचारों ने इन्हें कहीं चैन से टिकने न दिया। विरुद्ध लोकमत से तंग आकर ये १७९४ ई. में अमरीका चले गए, जहाँ इनका अच्छा स्वगत हुआ। पेनसिलवेनिया के फिलाडेल्फिया नगर में ६ फ़रवरी १८०४ ई. को इनकी मृत्यु हो गई।
प्रीस्टलि ने गैसों पर बहुत काम किया। ये सब प्रयोग इन्होंने अवकाश के समय में किए थे। १७७४ ई. में इन्होंने छह खंडों में 'ऑबज़र्वेशन्स ऑन डिफ़रेंट काइंड्स ऑव एयर', अर्थात् विभिन्न प्रकार की हवाओं संबंधी परीक्षण विषयक पुस्तक प्रकाशित की। इन्होंने अपने प्रयोगों के उपकरणों की स्वयं खोज की। प्रीस्टलि ने नई गैसों की भी खोज की और इनमें से जो गैसें पानी में बहुत विलेय थीं, (जैसे अमोनिया और सल्फर डाइऑक्साइड), उन्हें पारे के ऊपर इकट्ठा करने की विधि बताई। ऑक्सिजन की खोज इन्होंने १७७४ ई. में की। लगभग इन्हीं दिनों शीले (Scheele) ने भी स्वतंत्र रूप से यह गैस स्वीडन में तैयार की थी। प्रीस्टलि ने पारे के ऑक्साइड पर सूर्य की किरणें १२ इंच व्यास के लेंस द्वारा केंद्रित की। ऐसा करने पर उन्होंने देशा कि एक गैस आसानी से निकल रही है। यह गैस पानी में नहीं घुलती थी और इसमें मोमबत्ती जोरों से जलती थी। इन्होंने इस गैस के भीतर साँस की खींची और साँस लेने में उन्हें सुविधा प्रतीत हुई। इस प्रकार प्रीस्टलि ने ऑक्सिजन की खोज कर डाली। प्रीस्टलि ने नाइट्रिक ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, सलफ्यूरस अम्ल, कार्बोनिक ऑक्साइड, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और अमोनिया आदि गैसों पर महत्वपूर्ण कार्य किया।
श्रेणी:रसायनज्ञ