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भस्त्रिका प्राणायाम
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मई 2015
मई 2015
मोटापा दूर करना है तो भस्त्रिका प्राणायाम करें
भस्त्रिका प्राणायाम
भस्त्रिका का मतलब है धौंकनी। इस प्राणायाम में सांस की गति धौंकनी की तरह हो जाती है। यानी श्वास की प्रक्रिया को जल्दी-जल्दी करना ही भस्त्रिका प्राणायाम कहलाता है।
विधि: पद्मासन या फिर सुखासन में बैठ जाएं। कमर, गर्दन, पीठ एवं रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए शरीर को बिल्कुल स्थिर रखें। इसके बाद बिना शरीर को हिलाए दोनों नासिका छिद्र से आवाज करते हुए श्वास भरें। फिर आवाज करते हुए ही श्वास को बाहर छोड़ें। अब तेज गति से आवाज लेते हुए सांस भरें और बाहर निकालें। यही क्रिया भस्त्रिका प्राणायाम कहलाती है। हमारे दोनों हाथ घुटने पर ज्ञान मुद्रा में रहेंगे और आंखें बंद रहेंगी। ध्यान रहे, श्वास लेते और छोड़ते वक्त हमारी लय ना टूटे।
लाभ व प्रभाव: इस प्राणायाम के अभ्यास से मोटापा दूर होता है। शरीर को प्राणवायु अधिक मात्र में मिलती है और कार्बन-डाई-ऑक्साइड शरीर से बाहर निकलती है। इस प्राणायाम से रक्त की सफाई होती है। शरीर के सभी अंगों तक रक्त का संचार भली-भांति होता है। जठराग्नि तेज हो जाती है। दमा, टीवी और सांसों के रोग दूर हो जाते हैं। फेफड़े को बल मिलता है, स्नायुमंडल सबल होता है। वात, पित्त और कफ के दोष दूर होते है। इससे पाचन संस्थान, लीवर और किडनी की मसाज होती है।
सावधानियां: उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी, हर्निया, अल्सर, मिर्गी स्ट्रोक वाले और गर्भवती महिलाएं इसका अभ्यास ना करें।
विशेष: अभ्यास से पहले 2 गिलास जल अवश्य लें। शुरू-शुरू में आराम लेकर अभ्यास करें। ज्यादा लाभ उठाना हो तो इसे योग गुरु के सान्निध्य में ही करें।
श्रेणी:प्राणायाम