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कक्षीय पात
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thumb|right|300px|आरोही पात कई कक्षीय राशियों में से एक है
कक्षीय पात (orbital node) वह दो बिन्दु होते हैं जहाँ किसी परिक्रमा करती हुई खगोलीय पिण्ड की कक्षा (ऑरबिट) किसी सन्दर्भ तल को भेदती है। ध्यान दें कि अगर परिक्रमा का तल और सन्दर्भ तल एक ही हो तो कक्षीय पात होते ही नहीं, यानि उनके लिए इन कक्षीय तल और सन्दर्भ तल का एक-दूसरे से तिरछा होना आवश्यक है।Parameters Describing Elliptical Orbits https://web.archive.org/web/20161009150202/http://www.lns.cornell.edu/~seb/celestia/orbital-parameters.html 9 अक्तूबर 2016 , web page, accessed May 17, 2007.
आरोही और अवरोही पात
क्योंकि कक्षा सन्दर्भ तल को दो स्थानों पर भेदती है, इसलिये इन दोनों पातों को अलग नाम दिए जाते हैं। जहाँ कक्षा में चलती हुइ वस्तु तल से ऊपर की ओर जा रही हो, वह आरोही पात (ascending node) या उत्तर पात (north node) कहलाती है। और जहाँ वस्तु तल से नीचे जा रही हो वह अवरोही पात (descending node) या दक्षिण पात (south node) कहलाती है।ascending node https://web.archive.org/web/20170717012631/http://www.daviddarling.info/encyclopedia/A/ascending_node.html 17 जुलाई 2017 , entry in The Encyclopedia of Astrobiology, Astronomy, and Spaceflight, David Darling, on line, accessed May 17, 2007.The Binary Stars, R. G. Aitken, New York: Semi-Centennial Publications of the University of California, 1918.
पृथ्वी कक्षा पात
पृथ्वी जब अपनी कक्षा में सूरज की परिक्रमा करती है तो सूर्यपथ (ecliptic) को सन्दर्भ समतल माना जा सकता है। जिन दो स्थानों पर पृथ्वी की कक्षा सूर्यपथ को भेदती है, उन पृथ्वी कक्षा ताखों (Earth orbit nodes) का समय विषुव (equinox) होते हैं। एक विषुव मार्च के महीने में (वसंत ऋतु) में होता है और "वसंत विषुव" (spring equinox) कहलाता है। दूसरा विषुव सितम्बर के महीने में (यानि शरद ऋतु) में होता है और "शरद विषुव" (autumn equinox) कहलाता है। इन दोनों दिनों में पृथ्वी की भूमध्य रेखा सीधी सूरज की ओर रुझान रखती है और पूरे वर्ष में यह दो दिवस हैं जब दिन व रात की लम्बाई ठीक बराबर होती है।
चंद्रपात
पृथ्वी के इर्द-गिर्द चंद्रमा की कक्षा के लिये भी सूर्यपथ को ही सन्दर्भ समतल माना जाता है। चंद्रमा पर सूरज का गुरुत्वाकर्षक प्रभाव चंद्र पातों (lunar nodes) को धीरे-धीरे पश्चिम की ओर अयनित (precess) करता है। पात की यह अयन गति लगभग १८.६ वर्षों में एक पूरा चक्र पूरा कर लेती है।Introduction to Astronomy 250, Coordinates, Seasons, Eclipses https://web.archive.org/web/20160826192421/http://ircamera.as.arizona.edu/astr_250/Lectures/LECTURE_01.HTM 26 अगस्त 2016 , lecture notes, Astronomy 250, Marcia Rieke, University of Arizona, accessed on line May 17, 2007.
इन्हें भी देखें
सन्दर्भ समतल
आरोही पात का अक्षांश
सन्दर्भ
श्रेणी:ज्योतिष के तकनीकी आयाम
श्रेणी:कक्षाएँ (भौतिकी)