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411 समाचार
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चौधरी चरण सिंह

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भारत के पाँचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह Prime minister Charan Singh (cropped).jpg 23 फ़रवरी 1902 नूरपुर, संयुक्त प्रान्त आगरा व अवध, ब्रिटिश भारत (वर्तमान उत्तर प्रदेश में) 29 मई 1987 नई दिल्ली, दिल्ली, भारत जनता पार्टी 28 जुलाई 1979 14 जनवरी 1980 मोरारजी देसाई इन्दिरा गाँधी गायत्री देवी (5 दिसंबर 1905 — 10 म‌ई 2002) अजीत सिंह (पुत्र)जयंत चौधरी (पौत्र) वैदिक धर्म हिन्दू भारतीय चौधरी चरण सिंह (23 दिसंबर 1902 - 29 मई 1987) वह भारत के किसान राजनेता एवं पाँचवें तथा दुसरे गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे। उन्होंने यह पद 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक संभाला। चौधरी चरण सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन भारतीयता और ग्रामीण परिवेश की मर्यादा में जिया।चौधरी साहब ने देश में किए थे ये बड़े बदलाव फरवरी 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने की घोषणा की गयी। स्वाधीनता के समय उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। इस दौरान उन्होंने बरेली की जेल से दो डायरी रूपी किताब भी लिखी। स्वतन्त्रता के पश्चात् वह राम मनोहर लोहिया के ग्रामीण सुधार आन्दोलन में लग गए। जीवनी चरण सिंह का जन्म 23 दिसम्बर 1902 को बाबूगढ़ छावनी के निकट नूरपुर गांव, तहसील हापुड़, जनपद गाजियाबाद, कमिश्नरी मेरठ में काली मिट्टी के अनगढ़ और फूस के छप्पर वाली मढ़ैया में एक जाट परिवार मे हुआ था। उनके पिता चौधरी मीर सिंह ने अपने नैतिक मूल्यों को विरासत में चरण सिंह को सौंपा था। चरण सिंह के जन्म के 6 वर्ष बाद चौधरी मीर सिंह सपरिवार नूरपुर से जानी खुर्द के पास भूपगढी आकर बस गये थे। यहीं के परिवेश में चौधरी चरण सिंह के नन्हें ह्दय में गांव-गरीब-किसान के शोषण के खिलाफ संघर्ष का बीजारोपण हुआ। आगरा विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा लेकर 1928 में चौधरी चरण सिंह ने ईमानदारी, साफगोई और कर्तव्यनिष्ठा पूर्वक गाजियाबाद में वकालत प्रारम्भ की। वकालत जैसे व्यावसायिक पेशे में भी चौधरी चरण सिंह उन्हीं मुकद्मों को स्वीकार करते थे जिनमें मुवक्किल का पक्ष न्यायपूर्ण होता था। कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन 1929 में पूर्ण स्वराज्य उद्घोष से प्रभावित होकर युवा चरण सिंह ने गाजियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया। सन् 1930 में महात्मा गाँधी द्वारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन के तहत् नमक कानून तोडने का आह्वान किया गया। गाँधी जी ने ‘‘डांडी मार्च‘‘ किया। आजादी के दीवाने चरण सिंह ने गाजियाबाद की सीमा पर बहने वाली हिण्डन नदी पर नमक बनाया। परिणामस्वरूप चरण सिंह को 6 माह की सजा हुई। जेल से वापसी के बाद चरण सिंह ने महात्मा गाँधी के नेतृत्व में स्वयं को पूरी तरह से स्वतन्त्रता संग्राम में समर्पित कर दिया। 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में भी चरण सिंह गिरफतार हुए फिर अक्टूबर 1941 में मुक्त किये गये। सारे देश में इस समय असंतोष व्याप्त था। महात्मा गाँधी ने करो या मरो का आह्वान किया। अंग्रेजों भारत छोड़ों की आवाज सारे भारत में गूंजने लगी। 9 अगस्त 1942 को अगस्त क्रांति के माहौल में युवक चरण सिंह ने भूमिगत होकर गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, मवाना, सरथना, बुलन्दशहर के गाँवों में गुप्त क्रांतिकारी संगठन तैयार किया। जिसमे बुलन्दशहर में श्री होशियार सिंह सिरोही ने उनको बहुत सहयोग किया था। मेरठ कमिश्नरी में युवक चरण सिंह ने क्रांतिकारी साथियों के साथ मिलकर ब्रितानिया हुकूमत को बार-बार चुनौती दी। मेरठ प्रशासन ने चरण सिंह को देखते ही गोली मारने का आदेश दे रखा था। एक तरफ पुलिस चरण सिंह की टोह लेती थी वहीं दूसरी तरफ युवक चरण सिंह जनता के बीच सभायें करके निकल जाता था। आखिरकार पुलिस ने एक दिन चरण सिंह को गिरफतार कर ही लिया। राजबन्दी के रूप में डेढ़ वर्ष की सजा हुई। जेल में ही चौधरी चरण सिंह की लिखित पुस्तक ‘‘शिष्टाचार‘‘, भारतीय संस्कृति और समाज के शिष्टाचार के नियमों का एक बहुमूल्य दस्तावेज है। राजनीति उनकी विरासत कई जगह बंटी। आज जितनी भी जनता दल परिवार की पार्टियाँ हैं, उड़ीसा में बीजू जनता दल हो या बिहार में राष्ट्रीय जनता दल हो या जनता दल यूनाएटेड ले लीजिए या ओमप्रकाश चौटाला का लोक दल , अजीत सिंह का ऱाष्ट्रीय लोक दल हो या मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी हो, ये सब चरण सिंह की विरासत हैं।https://www.bbc.com/hindi/india-46654592 संग्रहीत प्रति https://web.archive.org/web/20190330082644/https://www.bbc.com/hindi/india-46654592 30 मार्च 2019 25 नवम्बर 2019 live राजनीतिक जीवन कांग्रेस के लौहर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित हुआ था, जिससे प्रभावित होकर युवा चौधरी चरण सिंह राजनीति में सक्रिय हो गए। उन्होंने गाजियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया। 1930 में जब महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान किया तो उन्होंने हिंडन नदी पर नमक बनाकर उनका साथ दिया। जिसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा। वो किसानों के नेता माने जाते रहे हैं। उनके द्वारा तैयार किया गया जमींदारी उन्मूलन विधेयक राज्य के कल्याणकारी सिद्धांत पर आधारित था। एक जुलाई 1952 को यूपी में उनके बदौलत जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और गरीबों को अधिकार मिला। उन्होंने लेखापाल के पद का सृजन भी किया। किसानों के हित में उन्होंने बड़ौत से विधानसभा सदस्य पंडित उमराव दत्त शर्मा की सहायता से सन 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून बनाया जिसे उन्होंने विभानसभा में पारित कराया। वो 3 अप्रैल 1967 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 17 अप्रैल 1968 को उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। मध्यावधि चुनाव में उन्होंने अच्छी सफलता मिली और दुबारा 17 फ़रवरी 1970 के वे मुख्यमंत्री बने। उसके बाद वो केन्द्र सरकार में गृहमंत्री बने तो उन्होंने मंडल और अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की। 1979 में वित्त मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक [नाबार्ड] की स्थापना की।चौधरी चरण सिंह का सफरनामा http://hindi.yahoo.com/national-10433695-023303286.html दैनिक जागरण (याहू) २९ मई २०१३ १० अक्टूबर २०१३ https://web.archive.org/web/20131201202449/http://hindi.yahoo.com/national-10433695-023303286.html 1 दिसंबर 2013 dead 28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह समाजवादी पार्टियों तथा कांग्रेस (यू) के सहयोग से प्रधानमंत्री बने। हालाँकि, चरण सिंह सरकार को जल्द ही एक बड़ा झटका लगा। इंदिरा गांधी का समर्थन उनके और संजय गांधी के खिलाफ सभी आरोपों को वापस लेने की शर्त पर था । सिंह ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके कारण कांग्रेस (आई) ने लोकसभा में बहुमत साबित करने से ठीक पहले अपना समर्थन वापस ले लिया। परिणामस्वरूप, उन्होंने 20 अगस्त 1979 को, केवल 23 दिनों के कार्यकाल के बाद, प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और संसद का सामना न करने वाले एकमात्र भारतीय प्रधानमंत्री बन गए। अपने इस्तीफे के बाद, सिंह ने राष्ट्रपति रेड्डी को लोकसभा भंग करने की सलाह दी। जनता पार्टी के नेता जगजीवन राम ने इस कदम का विरोध किया और समर्थन जुटाने के लिए समय माँगा, लेकिन लोकसभा भंग हो गई। सिंह 21 अगस्त 1979 से 14 जनवरी 1980 तक, जब नए चुनाव हुए, कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहे। फरवरी 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया । सन्दर्भ इन्हें भी देखें भारत के प्रधानमंत्री बाहरी कड़ियाँ चौधरी चरण सिंह (जालस्थल) युग नायक - चौधरी चरण सिंह किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह भारत के प्रधानमंत्रियो का आधिकारिक जालस्थल (अंग्रेजी मे) चौधरी चरणसिंह 2 चन्द्र भानु गुप्ता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री 1967–1968 चन्द्र भानु गुप्ता |- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री 1970 त्रिभुवन नारायण सिंह |- मोरारजी देसाई भारत के उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम 1977–1979 यशवंतराव चव्हाण |- कसु ब्रह्मनन्द रेड्डी गृह मंत्री 1977–1978 मोरारजी देसाई |- हरिभाई पटेल वित्त मंत्री 1979 हेमवती नंदन बहुगुणा |- 2 मोरारजी देसाई भारत का प्रधानमन्त्री 1979–1980 2 इन्दिरा गांधी |- योजना आयोग के अध्यक्ष 1979–1980 श्रेणी:1902 में जन्मे लोग श्रेणी:१९८७ में निधन श्रेणी:भारत के प्रधानमंत्री श्रेणी:भारत के वित्त मंत्री श्रेणी:उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्रेणी:६ठी लोक सभा के सदस्य श्रेणी:७वीं लोक सभा के सदस्य श्रेणी:८वीं लोक सभा के सदस्य श्रेणी:भारत के उप प्रधानमंत्री श्रेणी:गांधीवादी श्रेणी:भारतीय हिन्दू श्रेणी:भारत के उप प्रधान मंत्री श्रेणी:जाट लोग श्रेणी:उत्तर प्रदेश के लोकसभा सदस्य श्रेणी:भारत के गृह मंत्री श्रेणी:ब्रिटिश भारत के क़ैदी और बंदी श्रेणी:भारत रत्न सम्मान प्राप्तकर्ता श्रेणी:उत्तर प्रदेश की चौथी विधान सभा के सदस्य