Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

एफेलवीन

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

एफेल्वीन (जर्मन, सेव की वाइन) साइडर का एक जर्मन संस्करण है। इसे एबेल्वो (Ebbelwoi), एप्प्लर (Äppler), स्टॉफशे (Stöffsche), एफेल्मोस्ट (Apfelmost) (एपल मोस्ट), वीज़ (Viez) (लैटिन शब्द वाइस (vice) से उत्पन्न, जिसका अर्थ है वाइन का द्वितीयक अथवा स्थानापन्न वाइन), तथा सॉरर मोस्ट (Saurer Most) (आवश्यक रूप से खट्टा). इसमें अल्कोहल की मात्रा 5.5%–7% तथा इसका स्वाद कड़वा, तीखा सा होता है। इसके नाम एप्प्लर, जो मुख्य रूप से बड़े उत्पादकों द्वारा प्रचलित किया गया है, का प्रयोग रेस्तरां अथवा छोटे उत्पादकों द्वारा नहीं किया जाता है, वे इस पेय को स्कॉपेन अथवा स्कॉपे ही कहते हैं तथा जो ग्लास की मात्रा को इंगित करता है। == प्रस्तुतीकरण == चूंकि आमतौर पर यह मटमैला सा सा होता है, एफेलवीन को अधिकांशतः लौजेंज अथवा समचतुर्भुज आकर के ग्लास में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे कि प्रकाश का अपवर्तन हो. गेरिप्टेस के ग्लास का आकार आमतौर पर 0.25 लीटर होता है हालांकि इसका बड़ा संस्करण, जिसमें 0.3 लीटर आता है, भी होता है, इसके साथ ही ऐसा ग्लास जिसमें दोगुनी मात्रा 0.5 लीटर आती है, भी प्रचलन में है। अधिकांश प्रेसिंग-हाउसों द्वारा इसे 1-लीटर की बोतल में बेचा जाता है, एफेलवीन को सीधे परोसने के माध्यम से पीना असभ्य तथा अशिष्ट माना जाता है, फिर चाहे यह बोतल में हो अथवा पिचर (बेम्बेल) में. परंपरागत एफेलवीन रेस्तरां और उनके आभ्यासिक मेहमान आम तौर पर 0.3-लीटर के मानक का अनुसरण करते हैं। इसलिए 0.25 लीटर के ग्लास को बेस्शीज़रग्लास (Beschisserglas) (ठग ग्लास) कहा जाता है क्योंकि समान मूल्य में इसमें कम मात्रा में एफेलवीन आती है। एफेलवीन को अन्य प्रकार के ग्लासों में डाल कर (उदाहरण के लिए लाँग ड्रिंक ग्लासों में) प्रस्तुत किया जाना दुर्लभ है। एफेलवीन से भरे किसी "गेरिपेट्स" को भी स्कॉपेन कहा जाता है। एफेलवीन के ग्लासों में पायी जाने वाली दांतदार बनावट न सिर्फ प्रकाश के अपवर्तन से प्राप्त सुन्दरता के लिए प्रयोग में लायी जाती है, बल्कि प्राचीन समय में जब व्यक्ति आमतौर पर बिना छुरी-कांटे के भोजन करता था - तब तैलीय हाथों से दांतदार बनावट की तुलना में चिकने ग्लास के फिसलने की अधिक सम्भावना होती थी। एफेलवीन बेम्बेल (एक विशिष्ट एफेलवीन जग) में भी उपलब्ध होती है, तथा इस रूप में इसको तब मंगाया जाता है जबकि व्यक्ति बहुत प्यासा हो अथवा उसके साथ कई लोग हों. बड़े पेटवाला जार (साल्ट-ग्लेज्ड पत्थरों से बना हुआ) पर आमतौर पर नीले रंग का विवरण के साथ एक मुख्यतः धूसर रंग का होता है। विभिन्न आकारों का नामकरण ग्लास में उनकी मात्रा पर आधारित होता है (उदाहरण के लिए 4अर (वीरर) अथवा 8अर (एच्टर) बेम्बेल, 0.25 लीटर अथवा 0.3 लीटर के ग्लास पीने के लिए उनके स्थान के आधार पर प्रयोग किये जाते हैं। तदनुसार, एक 4अर बेम्बेल में 1 लीटर या 1.2 लीटर एफेलवीन हो सकती है). हन्स्रुक (Hunsrück) के निकट एफिल क्षेत्र में, मोसेल्टल के आसपास तथा ट्रायर में, पीने वाले बर्तन को "वीज़पोर्ज़" कहते हैं, तथा यह सफ़ेद पोर्सलीन अथवा पत्थर का बना बर्तन होता है। गर्म एफेलवीन को सर्दी-ज़ुखाम की घरेलू औषधि के रूप में अथवा सर्द्यों के मौसम में गर्म रखने वाले पेय के रूप में पिया जाता है। ऐसे में एफेलवीन गर्म होती है (परन्तु खौलती हुई नहीं!) तथा इसे दालचीनी की डंडी तथा संभवतः लौंग तथा/अथवा नींबू के टुकड़े के साथ में लिया जाता है। == कॉकटेल == विदेशी क्षेत्रों के आलोचकों के द्वारा यह दावा किया जाता है कि एफेलवीन एक ऐसा पेय है जो सातवां ग्लास पीने के बाद कुछ-कुछ स्वाद देना प्रारंभ करता है। संभवतः इसी कारण एफेलवीन से बनने वाले कॉकटेल कमोबेश कम प्रचलन में हैं: सबसे आम कॉकटेल है सौयेरगेस्प्राईज़र (Sauergespritzer), जो कि एफेलवीन में 30% खनिज जल का मिश्रण है। टीफ़गेस्प्राईज़र (Tiefgespritzter) अथवा बाटस्क्नैज़र (Batschnasser) इसकी ऐसी विविधताएं हैं जिनमें और अधिक खनिज जल का प्रयोग होता है। सुसगेस्प्राईज़र (Süssgespritzer) भी एक प्रचलित कॉकटेल है; जिसको एफेलवीन में नींबू सोडा, संतरा सोडा अथवा ताज़ा निकाला गया सेव का रस मिला कर बनाया जाता है (इनमें से नींबू सोडा सर्वाधिक प्रचलन में है). कभी-कभी एफेलवीन को कोला में भी मिलाया जाता है। इस मिश्रण पेय को केई (कोला-एप्प्लर के लिए) कह कर संबोधित करते हैं; फ्रैंकफर्ट ऐम मेन में इसे कोरिया के नाम से जाना जाता है, जबकि फ्रैंकफर्ट के पूर्व में पेंज़र (Panzer) ("टैंक") अथवा पेंज़रस्प्रिट ("टैंक का ईंधन") नामों का प्रयोग होता है। दुर्लभ रूप से एफेलवीन को बियर के साथ भी मिलाया जा सकता है। इस मिश्रण का नाम "बेम्बेलस्क्लैबर" (Bembelschlabber) होता है। इसको मिश्रित करना (विशेष रूप से कोला में) अधिकंश एफेलवीन गुणज्ञों द्वारा गलत माना जाता है, हालांकि ऐसा फ्रैंकफर्ट ऐम मेन के अतिरिक्त विशेष रूप से प्रचलन में है भी नहीं (आमतौर पर कोला के साथ 80:20 के अनुपात में मिलाया जाता है). कुछ होटल मालिक तथा स्थानीय लोग सुसगेस्प्राईज़र की बिक्री नहीं करते हैं। यदि इन स्थानों पर सुसगेस्प्राईज़र की मांग की जाती है, ग्राहक को एफेलवीन तथा लेमनेड अलग-अलग दे दिए जाते हैं, इसके द्वारा ग्राहक को स्वयं ही इन दोनों को मिलाना होता है तथा प्रतिष्ठान के कर्मचारी इस अरुचिकर कार्य से बच जाते हैं। एफेलवीन के निर्माण में अक्सर एक छोटे, देशज पेड़, जिसे स्पीरलिंग (Speierling) (Sorbus domestica) अथवा स्पेयेरलिंग के फलों का असंसाधित रस मिलाया जाता है, यह एक विलुप्तप्राय प्रजाति है जिसे आसानी से भूलवश जंगली सेव समझा जा सकता है। हालांकि आम लोगों के लिए इन दोनों के अंतिम उत्पाद में कोई विभेद पा पाना कठिन है, कई हेसियन इस दुर्लभ उत्पाद को पेय की गाथाओं तथा रहस्यात्मकता से जोड़ कर देखते हैं। == क्षेत्रीय उद्गम == एफेलवीन मुख्य रूप से हेसे (Hesse) में उत्पादित तथा प्रयोग किया जाता है (वहां इसे राज्य पेय का दर्जा प्राप्त है), विशेष रूप से फ्रैंकफर्ट, वेत्ट्राऊ तथा औडेंवाल्ड क्षेत्रों में. यह मोज़ेलफ्रैन्कें, मर्ज़िग (सारलैंड) तथा ट्रायर क्षेत्र में भी पाया जाता है; इसके साथ ही यह निचले सार क्षेत्रों तथा लक्ज़ेमबर्ग के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी मिलता है। इन क्षेत्रों में कई बड़े निर्माताओं के साथ ही कई छोटे, निजी उत्पादक भी हैं जो पारंपरिक व्यंजन विधि का उपयोग करते हैं। कुछ सर्वाधिक प्रसिद्ध रेस्तरां जिनमें एफेलवीन परोसी जाती है सैकसेनहौज़ेन (फ्रैंकफर्ट ऐम मेन) में हैं। इनमें से कुछ क्षेत्रों में नियमित साइडर प्रतियोगिताएं तथा मेले आयोजित किये जाते हैं, जिनमें छोटे, निजी उत्पादक भाग लेते हैं। इन आयोजनों में साइडर गीतों को रचा तथा गाया जाता है। मर्ज़िग क्षेत्रों में वीज़ क्वीन तथा निचले सार क्षेत्रों में वीज़ किंग का खिताब दिया जाता है। एक आधिकारिक वीज़ मार्ग (रू डु साइडर) सारबर्ग को लक्ज़ेमबर्ग की सीमा से जोड़ता है। मर्ज़िग में एक वार्षिक वीज़ उत्सव भी मनाया जाता है। इसकी तिथि आमतौर पर अक्टूबर का दूसरा शनिवार होती है। == सन्दर्भ == == इन्हें भी देखें == देशी (स्थानीय) शराब