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आतेनवाद
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नास्तिकताआतेनवाद, जिसे आतेन धर्म, अमार्ना धर्म, अथवा अमार्ना अपधर्म भी कहा जाता है, प्राचीन मिस्र का एक धार्मिक पंथ था।Dodson 2016Assmann 2004 इसकी स्थापना अखेनातेन नामक एक फ़राओ (राजा) ने की थी, जो अठारहवीं वंश के अंतर्गत नव राज्यकाल (New Kingdom) में शासन करता था।Ridley 2019 इस धर्म को प्रायः एकेश्वरवादी या एकदेवतावादी माना गया है, यद्यपि कुछ मिस्र-विद्या के आचार्यों का मत है कि यह वास्तव में एकप्रधान बहुदेववाद (हेनोथीवाद) था — अर्थात् एक देवता को प्रमुख मानते हुए भी अन्य देवताओं के अस्तित्व को नकारा नहीं गया था। आतेनवाद का केन्द्रीय तत्व आतेन नामक देवता की उपासना था, जिसे सूर्य के गोल चक्र रूप में चित्रित किया जाता था। आतेन, प्रारंभ में, मिस्र के परंपरागत सूर्य-देवता रा का ही एक रूप था, किंतु बाद में अखेनातेन ने उसे समस्त देवताओं में सर्वोच्च घोषित कर दिया।David 1998
१४वीं शताब्दी ईसा-पूर्व में, आतेनवाद लगभग २० वर्षों तक मिस्र का राजकीय धर्म रहा। इस काल में अखेनातेन ने अन्य देवताओं की उपासना का कठोर दमन किया; उसने अनेक परंपरागत देवालयों (मंदिरों) को बंद करवा दिया और उनके स्थान पर आतेनवादी मंदिरों के निर्माण का आदेश दिया। साथ ही उसने परंपरागत धार्मिक परंपराओं के अनुयायियों को भी दमन का लक्ष्य बनाया। किन्तु अखेनातेन की मृत्यु के पश्चात् आनेवाले फ़राओओं (राजाओं) ने इस धार्मिक आन्दोलन को समाप्त कर दिया और मिस्र की प्राचीन बहुदेववादी धार्मिक परंपरा को पुनः स्थापित किया। इसके बाद मिस्र में एक व्यापक स्तर पर प्रयास किया गया कि अखेनातेन, आतेनवादी मंदिरों तथा एकमात्र सर्वोच्च देवता की अवधारणा से संबंधित सभी साक्ष्य एवं उल्लेखों को न केवल मिटा दिया जाए, बल्कि उन्हें मिस्र के ऐतिहासिक अभिलेखों से भी पूर्णतः निष्कासित कर दिया जाए।
अखेनातेन से पूर्व आतेन का इतिहास
दाएँ|अंगूठाकार|250x250पिक्सेल|आतेन
"आतेन" (प्राचीन मिस्री: jtn) शब्द का मूल अर्थ है "वृत्त", "चक्र", और आगे चलकर इसका अर्थ "सूर्य-चक्र" (सूर्य की गोल आकृति) के रूप में विकसित हुआ। इस शब्द का सबसे प्राचीन साक्ष्य ईसा-पूर्व २४वीं शताब्दी के अबूसिर पपीरस (Abusir Papyri) में मिलता है, जो पाँचवीं वंश के फ़राओ नेफ़रीर्कारे काकई के शव-मंदिर से प्राप्त हुआ था।Redford 1976 आतेन, जो बाद में आतेनवाद का आराध्य देवता बना, सर्वप्रथम एक देवता के रूप में बारहवीं वंश के काल में लिखे गए ग्रंथ "सिनुहे की कथा" (Story of Sinuhe) में प्रकट होता है।Petrie William Matthew Flinders The Adventures of Sanehat http://dx.doi.org/10.1017/cbo9781107325203.005 97–142 2013 Egyptian Tales Cambridge Cambridge University Press 10.1017/cbo9781107325203.005 978-1-107-32520-3 2021-03-09 मध्य राज्यकाल (Middle Kingdom) के दौरान, आतेन केवल सूर्य देवता रा के एक पक्ष के रूप में माना जाता था — एक प्राकृतिक प्रकाशमय चक्र के रूप में, न कि एक स्वतंत्र देवता के रूप में। उस समय आतेन एक अल्पज्ञात सूर्य-देवता था; यदि आतेनवादी काल न आया होता, तो मिस्र के धार्मिक इतिहास में उसका कोई विशेष स्थान नहीं होता।David 1998 यद्यपि अठारहवीं वंश के समय, विशेषकर अमेन्होटेप तृतीय द्वारा अपनी शाही नाव का नाम "आतेन की आत्मा" रखने जैसे संकेत मिलते हैं कि आतेन को कुछ महत्त्व मिलने लगा था, परंतु यह वास्तव में अमेन्होटेप चतुर्थ (अखेनातेन) ही थे जिन्होंने धीरे-धीरे एक धार्मिक क्रांति आरंभ की, जिसके अंतिम चरण में आतेन को मिस्र का एकमात्र परमेश्वर घोषित कर दिया गया। हालाँकि अखेनातेन से पूर्व प्रत्येक राजवंश ने किसी न किसी एक देवता को राजकीय संरक्षक देवता के रूप में अपनाया था और उसे विशेष महत्त्व दिया था, फिर भी कभी भी अन्य देवताओं को नकारने या बहिष्कृत करने का प्रयास नहीं किया गया। प्राचीन मिस्र में अनेक देवताओं की उपासना सहअस्तित्व की भावना के साथ की जाती रही थी।David 1998 थुतमोस चतुर्थ के शासनकाल में आतेन को पहली बार एक विशिष्ट सूर्य-देवता के रूप में पहचान मिली, और उसके पुत्र अमेन्होटेप तृतीय ने आतेन के लिए एक स्वतंत्र पंथ (संप्रदाय) की स्थापना एवं उसका संवर्धन किया। तथापि, इस बात के कोई साक्ष्य नहीं मिलते कि अमेन्होटेप तृतीय ने अन्य देवताओं की उपेक्षा की या आतेन को एकमात्र आराध्य के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया।August 2020[citation needed]