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उक्काशा बिन मुहसिन
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हज़रत उकाशा बिन मुहसिन रज़ि० عكاشة بن محصن.png 12 हिजरी
हज़रत उक्काशा बिन मुहसिन रज़ि० या उकाशा बिन मुहसिन(अरबी: عكاشة بن محصن) इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के साथी (सहाबा) थे। उन्होंने मुहम्मद के युग के दौरान
नखला छापे में भाग लिया था। मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
का एक अभियान इनके नाम सरिय्या उकाशा बिन मुहसिन
से
मशहूर है जो बनू असद बिन क़ुज़ायमा जनजातियों के खिलाफ अक्टूबर 630, इस्लामिक कैलेंडर के, 9 हिजरी में हुआ था। Mubarakpuri, The Sealed Nectar (Free Version)जनवरी 2023 InternetArchiveBot , p. 129
जीवनी
उकाशा का उपनाम अबू मिहसन है। उनके पिता मिहसान इब्न हुरसन थे। उकाशा ने हिजरत से पहले इस्लाम कबूल कर लिया और मदीना के लिए दूसरों के साथ मक्का छोड़ दिया।
उकाशा ने बद्र की लड़ाई में भाग लिया। युद्ध में उनकी तलवार टूट गई थी। पैगंबर (PBUH) ने उन्हें एक खजूर की शाखा दी और इसके साथ उन्होंने एक नुकीले चाकू की तरह दुश्मन पर वार किया। वह युद्ध के अंत तक इस छड़ी से लड़े।
उकाशा ने बद्र, उहुद, खंदक सहित सभी प्रसिद्ध लड़ाइयों में भाग लिया और वीरता और शौर्य का प्रदर्शन किया। 7 हिजरी के रबीउल अव्वल के महीने में, उन्हें बनी असद का सामना करने का काम दिया गया था। मदीना के रास्ते में 'गामा' के कुएं के पास बनी असद की बस्ती थी। वह चालीस आदमियों की एक सेना के साथ वहाँ गया, यह देखने के लिए कि बानी असद के लोग पहले ही डर के मारे जगह छोड़ चुके थे और कहीं और भाग गए थे। किसी को खोजने में असमर्थ, उकाशा उनके परित्यक्त दो सौ ऊंटों और कुछ बकरियों और बकरियों को मदीना ले आए।सफिउर्रहमान मुबारकपुरी पुस्तक अर्रहीकुल मख़तूम (सीरत नबवी ) सरिय्या ग़मर https://archive.org/details/offlinedeeniapp_20210707_1905/Ar%20Raheequl%20Makhtoom%20Seerate%20Nabi/page/642/mode/2up 13 दिसम्बर 2022 642
हदीस में
अंगूठाकार|सहाबा अरबी भाषा सुलेख
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के हवाले से बताया है कि आपने फ़रमायाः "मेरे सामने बहुत-सी उम्मतें लाई गईं। मैंने देखा कि किसी नबी के साथ बहुत बड़ा समूह है, किसी नबी के साथ एक-दो लोग हैं और किसी नबी के साथ एक भी आदमी नहीं है। इसी बीच मेरे सामने एक विशाल जनसमूह प्रकट हुआ। मैंने समझा कि यह मेरी उम्मत के लोग हैं। लेकिन मुझसे कहा गया कि यह मूसा और उनकी उम्मत के लोग हैं। फिर मैंने देखा तो और एक बड़ा जनसमूह था। मुझसे कहा गया कि यह आपकी उम्मत के लोग हैं। इनमें सत्तर हज़ार लोग ऐसे हैं, जो बिना किसी हिसाब और अज़ाब के जन्नत में प्रवेश करेंगे।" इतना कहने के बाद आप उठे और अपने घर के अंदर चले गए। इधर, लोग उन सत्तर हज़ार लोगों के बारे में बातें करने लगे कि वे कौन हो सकते हैं? किसी ने कहा कि शायद वह लोग होंगे, जो मुस्लिम घराने में पैदा हुए और कभी किसी को अल्लाह का साझी नहीं बनाया। उनके अंदर इसी तरह की बातें चल रही थीं कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) बाहर आए। लोगों ने आपको उस चर्चे से अवगत कराया, तो फ़रमायाः "यह वह लोग हैं, जो न दम करवाते हैं, न अपने शरीर दागते हैं और न अपशगुन लेते हैं, बल्कि अपने रब पर भरोसा रखते हैं।" इतना सुनने के बाद उक्काशा बिन मेहसन (रज़ियल्लाहु अंहु) खड़े हो गए और कहाः अल्लाह से दुआ कीजिए कि मुझे उन लोगों में से बना दे। तो आपने फ़रमायाः "तुम उन लोगों में से हो।" फिर एक अन्य व्यक्ति खड़ा होकर कहने लगा कि मेरे बारे में भी दुआ करें कि अल्लाह मुझे उन लोगों में से बना दे। परन्तु आपने फ़रमायाः "इस मामले में तुमपर उक्काशा बाज़ी ले गया।सहीह बुखारी 6542
https://sunnah.com/bukhari/81/131
अनूदित हदीस-ए-नबवी विश्वकोश, "हदीस: इस मामले में तुमपर उक्काशा बाज़ी ले गया", www.hadeethenc.com
शहादत
12 हिजरी में ख़ालिद बिन वलीद के साथ तलीहा बिन खुवेलिद जिसने उस समय स्वयं को पैगम्बर घोषित किया हुआ था वो बाद में वफादार मुसलमान भी बन गया था के विरुद्ध अभियान पर थे जब शहीद हो गये।
इन्हें भी देखें
मुहम्मद
सहाबा
मुहम्मद की सैन्य उपलब्धियाँ
मुहम्मद के अभियानों की सूची
गुलामी पर इस्लाम के विचार
सन्दर्भ
श्रेणी:सहाबा
श्रेणी:इस्लामी नेता
बाहरी कड़ियाँ
हयातुस्सहाबा (1-3) (हिंदी पुस्तक), लेखक:युसूफ कांधलवी