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तीव्र मध्यम
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भारतीय शास्त्रीय संगीत में जब कोई स्वर अपनी शुद्धावस्था से ऊपर होता है तब उसे तीव्र विकृत स्वर कहते हैं। ऐसा स्वर मध्यम है। जिसे म के लघु रूप में भी जाना जाता है। अनेक रागों में शुद्ध के साथ अथवा केवल तीव्र मध्यम का प्रयोग होता है। उदाहरण के लिए राग हिंडोल में केवल तीव्र मध्यम का प्रयोग होता है। जिसका अर्थ है हिंडोल राग में मध्यम स्वर अपने निश्चित स्थान से ऊपर की ओर प्रयोग किया जाता है। राग यमन कल्याण में शुद्ध और तीव्र दोनों मध्यम प्रयोग किए जाते हैं।
श्रेणी:भारतीय संगीत के स्वर