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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अनुच्छेद

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किसी विषय पर थोड़े, किन्तु चुने हुए शब्दों में अपने विचार प्रकट करने के प्रयास को अनुछेद लेखन कहा जाता है। यह किसी लेख, निबंध या रचना का अंश भी हो सकता है किन्तु स्वयं में पूर्ण होना चाहिए। किसी भी शब्द, वाक्य, सूत्र से सम्बद्ध विचार एवं भावों को अपने अर्जित ज्ञान, निजी अनुभूति से संजोकर प्रवाहमयी शैली के माध्यम से गद्यभाषा में अभिव्यक्त करना अनुच्छेद कहलाता है।'' उक्त परिभाषा के आधार पर स्पष्ट है कि अनुच्छेद लेखन का कोई भी विषय हो सकता है, वह शब्द, वाक्य, सूत्र रूप में भी हो सकता है। उसका विस्तार स्वतंत्र रूप में प्रवाहमयी शैली में होना चाहिए तथा गद्य भाषा में अभिव्यक्त होना चाहिए। जब हम किसी विषय, विचार या शीर्षक को विस्तारपूर्वक लिखें कि एक अनुच्छेद तैयार हो जाए तो इसे 'अनुच्छेद लेखन' कहा जाता है। 'अनुच्छेद-लेखन' और 'निबंध-लेखन' तथा 'पल्लवन लेखन' में अन्तर है। इनके पारस्परिक अंतर को समझ लेना आवश्यक है। अनुच्छेद एवं निबन्ध दोनों विधाओं में लेखक अपने भावों एवं विचारों को विकसित करता है फिर भी दोनों में पर्याप्त अन्तर है। (१) निबंध में भूमिका, विकास तथा उपसंहार होता है किन्तु लघु रचना होने के कारण अनुच्छेद में लेखक प्रथम वाक्य से ही विषय का प्रतिपादन आरंभ कर देता है। (२) निबंध में मूल विचार का विस्तार उसके सभी आयामों के साथ होता है जबकि अनुच्छेद में एक ही विचार बिन्दु का प्रतिपादन होता है। (३) निबंध में विषय के सभी पहलुओं को प्रस्तुत किया जाता है जबकि अनुच्छेद में लेखक मूल विषय के साथ ही जुड़ा रहता है और संक्षेप में अपनी बात प्रस्तुत करता है। अनुच्छेद एवं पल्लवन सतही रूप में तो दोनों समान दिखाई देते हैं क्योंकि दोनों का आकार छोटा होता है किन्तु आंतरिक रूप में दोनों पर्याप्त भिन्न हैं। == (१) पल्लवन प्रायः किसी लेखक की प्रसिद्ध पंक्ति, लोकोक्ति, सूक्ति अथवा सूत्र वाक्य आदि पर लिखा जाता है किन्तु अनुच्छेद किसी भी रचना का एक भाग होता है जिसमें मुख्य विषय को पुष्ट करने हेतु तथ्य दिए जाते हैं। (२) पल्लवन में आत्मकथात्मक शैली ('मैं' शैली) का प्रयोग नहीं होता जबकि अनुच्छेद लेखन में आत्मकथात्मक शैली का प्रयोग भी किया जा सकता है। (३) पल्लवन में केवल वर्तमान काल का प्रयोग किया जाता है जबकि अनुछेद लेखन में किसी भी काल का प्रयोग किया जा सकता है। (४) पल्लवन में एक से अधिक अनुच्छेद हो सकते हैं क्योंकि पल्लवन का आकार अनुच्छेद से अपेक्षाकृत बड़ा होता है जबकि अनुच्छेद एक ही पैराग्राफ़ में लिखा जाता है। अनुच्छेद-लेखन की विधि दिए गए विषय पर लेखक अपने अर्जित ज्ञान, निजी अनुभूति तथा सशक्त भाषा के द्वारा अपने विचारों को अनुच्छेद के रूप में अभिव्यक्त करता है। एक अच्छे अनुच्छेद के लिए निम्न बातों को ध्यान में रखना चाहिए- (1) चुने हुए विषय पर थोड़ा चिन्तन-मनन आवश्यक है ताकि मूल भाव भली-भाँति स्पष्ट हो जाए। (2) मूलभाव से संबद्ध विविध आयामों के बारे में सोचकर एक रूपरेखा बना लेनी चाहिए जिससे विषय का विस्तार किया जा सके। (3) अनुच्छेद लिखते समय क्रमबद्धता बनी रहनी चाहिए। (4) अनुच्छेद लिखते समय पुनरावृत्ति दोष से बचना चाहिए। (5) अनुच्छेद में अप्रांसगिक या अनावश्यक बातों का उल्लेख नहीं करना चाहिए। (6) विषय को प्रस्तुत करने की शैली अथवा पद्धति तय करनी चाहिए। (7) अनुच्छेद की भाषा सरल, सुबोध एवं विषय के अनुकूल होनी चाहिए। मुहावरे, लोकोक्तियों आदि का प्रयोग करके भाषा को सुंदर एवं व्यावहारिक बनाया जा सकता है। (8) लिखने के बाद पुनः उसका अध्ययन करना चाहिए तथा छूट गए दोषों का निराकरण करना चाहिए कि कहीं कोई सामग्री छूट तो नहीं गई है? कहीं अनुच्छेद में बिखराव तो नहीं आ गया है? कहीं अनुच्छेद में विरोधी बातें तो नहीं आ रही हैं? कहीं विरामचिह्न, वर्तनी, वाक्य-रचना, शब्द-प्रयोग आदि की दृष्टि से कोई संशोधन करने की आवश्यकता तो नहीं है? यदि ऐसा कोई दोष रह गया है तो उसे ठीक कर लेना चाहिए। अनुच्छेद-लेखन की शैलियाँ भाषा तथा साहित्य को जोड़ने वाली संकल्पना को 'शैली' कहा जाता है। शैली को सहेतुक भाषा-पद्धति कहा जाता है। भाषा की प्रयुक्ति विशेष, विधा विशेष तथा प्रयोक्ता विशेष के अनुसार भाषा में जो विभिन्नताएँ दिखाई देती हैं, उन्हें भाषा की शैलियाँ कहा जाता है। अनुच्छेद लेखन में प्रायः निम्नलिखित शैलियों का प्रयोग होता है- भावात्मक शैली समास शैली व्यंग्य शैली तरंग शैली चित्र शैली व्यास-शैली इनके अतिरिक्त लेखक अनेक प्रकार की शैलियों जैसे वर्णनात्मक, विवरणात्मक, विचारात्मक, सामान्य बोलचाल की शैली का प्रयोग कर सकता है। अपनी रूचि और विषय के अनुकूल शैली के प्रयोग से अनुच्छेद में सजीवता आ जाती है। वर्णन, विचार और भाव के अनुकूल शैली का प्रयोग होना चाहिए जिससे अनुच्छेद में यथेष्ट प्रवाह, रमणीयता आदि गुण समाविष्ट हो जाते हैं। अच्छे अनुच्छेद की विशेषताएँ (१) पूर्णता - स्वतंत्र अनुच्छेद की रचना के समय ध्यान रहे कि उसमें संबंधित विषय के सभी पक्षों का समावेश हो जाए। विषय सीमित आयामों वाला होना चाहिए, जिसके सभी पक्षों को अनुच्छेद के सीमित आकार में संयोजित किया जा सके। (२) क्रमबद्धता - अनुच्छेद-लेखन में विचारों को क्रमबद्ध एवं तर्कसंगत विधि से प्रकट करना चाहिए। अनुच्छेद के लिए आवश्यक है कि वह सुगठित हो तथा उसमें विचारों और तर्कों का ऐसा सुविचारित पूर्वापर क्रम हो कि वाक्य एक दूसरे से जुड़ते चले जाएँ और विषय को विकसित कर सकें। (३) विषय-केन्द्रिता - अनुच्छेद के प्रारंभ से अंत तक उसका एक सूत्र में बंधा होना परमावश्यक है। अनुच्छेद मूल विषय से इस प्रकार बंधा होना चाहिए कि पूरे अनुच्छेद को पढ़ने के बाद पाठक सारांश में उसके शीर्षक को नितांत संगत एवं उपयुक्त माने। (४) सामासिकता - सीमित शब्दों में यथासंभव पूरी बात कहने का प्रयास रहता है। यह गागर में सागर भरने के समान है। अनुच्छेद में अनावश्यक बातें न करके केवल विषय से संबद्ध वर्णन-विवेचन किया जाना चाहिए। (५) विषयानुकूल भाषा-शैली - अनुच्छेद की भाषा-शैली विषयानुकूल होनी चाहिए। प्रायः अनुच्छेद शाश्वत महत्त्व के विषयों पर लिखे जाते हैं। अतः उसकी भाषा भी विषय के अनुरूप गंभीर एवं परिमार्जित होनी चाहिए। अप्रचलित शब्द-प्रयोग से बचना चाहिए। भाषा यथासंभव सरल, सरस, सुबोध हो। आवश्यकतानुसार उसमें मुहावरे, लोकोक्ति, सूक्ति आदि का भी उपयोग किया जा सकता है। भाषा गत्यात्मक हो। वाक्यों के क्रम में तारतम्य हो। शैली भी एक कथन भंगिमा है। कभी लेखक विशेष को सामान्य रूप प्रदान करता है तो कभी सामान्य को विशेष रूप में प्रस्तुत करता है। इन्हीं को आगमन-निगमन शैली कहा जाता है। (६) सीमित/संतुलित आकार - सामान्यतः अनुच्छेद 300 से 350 शब्दों के मध्य होना चाहिए। संतुलित वर्णन के लिए आकार-प्रकार भी संतुलित अपनाना चाहिए। विषयानुसार यह संख्या कुछ कम या अधिक भी हो सकती है। अनुच्छेद लेखन के समय पहले अनुच्छेद का एक प्रारूप तैयार कर लेना चाहिए। शब्द-संख्या, मुहावरे, लोकोक्तियों से संबंधी सभी बातों का ध्यान रखते हुए अनावश्यक बातों को हटा देना चाहिए। यह ध्यान रहे कि किसी भी स्थिति में अनुच्छेद लघु निबंध का आकार न ग्रहण करे। (७) स्वतंत्र लेखन कला - प्रत्येक अनुच्छेद अपने आप में स्वतंत्र होता है। कुछ अर्थों में समानता रखते हुए भी वह निबंध और पल्लवन से भिन्न है। विषय के अनुरूप ही शैली का भी चयन हो जाता है। इन्हें भी देखें पल्लवन संक्षेपण लेख (आर्टिकिल) निबन्ध श्रेणी:गद्य