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411 समाचार
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डूरण्ड रेखा

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डूरण्ड रेखा File:Afghanistan-Pakistan border.png Durand Line border map marked in red. 2670 km 12 November 1893 Signing of the Durand Line Agreement at the end of the first phase of the द्वितीय आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध 8 August 1919 1919 का आंग्ल-अफ़ग़ान संधि ratified at the end of the तृतीय आंग्ल-अफ़ग़ान युद्ध. Treaty of Gandamak, Durand Line Agreement, Anglo-Afghan Treaty of 1919 thumb|right|480px|अफ़गानिस्तान -पाकिस्तान को बांटने वाली डूरण्ड रेखा अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच २४३० किमी॰ लम्बी अन्तरराष्ट्रीय सीमा का नाम डूरण्ड रेखा (Durand Line ; पश्तो : د ډیورنډ کرښه‎) है। यह 'रेखा' १८९६ में एक समझौते के द्वारा स्वीकार की गयी थी। यह रेखा पश्तून जनजातीय क्षेत्र से होकर दक्षिण में बलोचिस्तान से बीच से होकर गुजरती है। इस प्रकार यह रेखा पश्तूनों और बलूचों को दो देशों में बाँटते हुए निकलती है। भूराजनैतिक तथा भूरणनीति की दृष्टि से डूरण्ड रेखा को विश्व की सबसे खतरनाक सीमा माना जाता है। अफगानिस्तन इस सीमा को अस्वीकार करता रहा है। अफगानिस्तान चारों ओर से जमीन से घिरा हुआ है और इसकी सबसे बड़ी सीमा पूर्व की ओर पाकिस्तान से लगी है, इसे डूरण्ड रेखा कहते हैं। यह 1893 में हिंदुकुश में स्थापित सीमा है, जो अफगानिस्तान और ब्रिटिश भारत के जनजातीय क्षेत्रों से उनके प्रभाव वाले क्षेत्रों को रेखांकित करती हुयी गुजरती थी। आधुनिक काल में यह अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा है। भारत (पी0 ओ0 के0) और अफगनिस्तान बीच भी डुरंड रेखा 106 किमी लंबि सीमा है जो की अपवाद का विषय है। नामकरण इस रेखा का नाम सर मार्टिमेर डूरण्ड के नाम पर रखा गया है जिन्होने अफगानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान खाँ को इसे सीमा रेखा मानने पर राजी किया था। इतिहास 1849 में पंजाब पर कब्जा कर लेने के बाद ब्रिटिश सेना ने बेतरतीबी से निर्धारित सिक्ख सीमा को सिंधु नदी के पश्चिम की तरफ खिसका दिया, जिससे उनके और अफगानों के बीच एक ऐसे क्षेत्र की पट्टी रह गयी, जिसमें बिभिन्न पश्तो (पख्तून) कबीले रहते थे। प्रशासन और रक्षा के सवाल पर यह क्षेत्र हमेशा एक समस्या बना रहा। कुछ ब्रिटिश, जो टिककर रहने में यकीन रखते थे, सिंधु घाटी में बस जाना चाहते थे, कुछ आधुनिक विचारों वाले लोग काबूल से गजनी के रास्ते कंधार चले जाना चाहते थे। दूसरे भारत-अफगान युद्ध (1878-80) से आधुनिक सोच वालों का पलड़ा हल्का हो गया और जनजातीय क्षेत्र में विभिन्न वर्गों का प्रभाव लगभग बराबर सा हो गया। ब्रिटेन ने अनेक जनजातीय युद्ध झेलकर डूरण्ड रेखा तक अप्रत्यक्ष साशन द्वारा अपना अधिकार फैला लिया। अफगानों ने अपनी तरफ के क्षेत्रों में कोई बदलाव नहीं किया। 20 वीं शताब्दी के मध्य में रेखा के दोनों ओर के इलाकों में पख्तूनों का स्वाधीनता आंदोलन छिड़ गया और स्वतंत्र पख्तूनिस्तान की स्थापना हो गयी। 1980 में डूरण्ड रेखा के आसपास के इलाकों में लगभग 75 लाख पख्तून रह रहे थे।भारत ज्ञान कोश, पापयुलर प्रकाशन मुंबई, पृष्ठ संख्या :324 भौगोलिक स्थिति केन्द्रीय तथा उत्तरपूर्व की दिशा में पर्वतमालाएँ हैं जो उत्तरपूर्व में ताजिकिस्ताऩ स्थित हिन्दूकुश पर्वतों का विस्तार हैं। अक्सर तापमान का दैनिक अन्तरण अधिक होता है। यह भी देखिए अफ़्गानिस्तान के युद्ध अफ़्गानिस्तान सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ अफ़्गानिस्तान कभी आर्याना था (वेद प्रताप वैदिक) सीमा रेखा श्रेणी:अफ़्गानिस्तान श्रेणी:पाकिस्तान