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रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र

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रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र Ruppur Nuclear Power Plant 2024.jpg रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र का वाइड एंगल दृश्य 24 4 0 N 89 2 50 E region:BD-49 inline,title बांग्लादेश ईश्वरदी उपजिला, पाबना जिला, राजशाही विभाग, बांग्लादेश निर्माणाधीन 2025 $12.65 बिलियन (अनुमानित) बांग्लादेश परमाणु ऊर्जा आयोग न्यूक्लियर पावर प्लांट कंपनी बांग्लादेश लिमिटेड PWR एटोमस्ट्रॉयएक्सपोर्ट (Atomstroyexport) पद्मा नदी 4 × नेचुरल ड्राफ्ट VVER-1200/523 2 × 1,200 MW (gross) 2 × 3,200 MWth 2,160 MW http://www.rooppurnpp.gov.bd/ रूपपुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र** (बांग्ला: রূপপুর পারমাণবিক বিদ্যুৎ কেন্দ্র) बांग्लादेश में स्थित एक 2.4 GWe क्षमता का परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। इसमें 1200-1200 मेगावाट की दो VVER-1200 इकाइयाँ शामिल हैं। यह संयंत्र पाबना जिले के ईश्वरदी उपजिला में पद्मा नदी के तट पर स्थित है, जो ढाका से लगभग 160 किमी उत्तर-पश्चिम में है। यह देश का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है और इसकी पहली इकाई के 2026 तक चालू होने की उम्मीद है। 2025 के अंत में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) द्वारा इसकी सुरक्षा समीक्षा सफलतापूर्वक पूरी की गई थी। इतिहास योजना पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना 1961 में बनाई गई थी। 1963 में पाबना जिले के रूपपुर गांव को इसके लिए चुना गया और 260 एकड़ भूमि अधिग्रहित की गई। शुरुआत में यहाँ 200 मेगावाट का संयंत्र लगाने की योजना थी। बांग्लादेश की स्वतंत्रता के बाद, सरकार ने इस प्रयास को फिर से शुरू किया। 1977-86 के बीच फ्रांसीसी कंपनी सोफ्राटोम (Sofratom) ने एक व्यवहार्यता अध्ययन किया और परियोजना को व्यवहार्य पाया। 2005 में बांग्लादेश ने चीन के साथ परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए। हालाँकि, 2009 में बांग्लादेश ने रूस की कंपनी 'रोसाटॉम' (Rosatom) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। 2010 में बांग्लादेश की संसद ने इस परियोजना को तुरंत लागू करने का निर्णय लिया। निर्माण संयंत्र का निर्माण रूसी कंपनियों द्वारा किया जा रहा है। 30 नवंबर 2017 को यूनिट-1 के लिए पहला कंक्रीट डाला गया। जुलाई 2018 में यूनिट-2 का निर्माण शुरू हुआ। रूस-यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद, रूस ने दावा किया कि संयंत्र का काम अप्रभावित रहा। दिसंबर 2024 तक यूनिट-1 का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया था। सुरक्षा रूपपुर संयंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इसमें सक्रिय (Active) और निष्क्रिय (Passive) दोनों तरह की प्रणालियाँ लगाई गई हैं। इसमें VVER-1200/523 रिएक्टर का उपयोग किया गया है, जो उन्नत सुरक्षा विशेषताओं से लैस है: * **कोर कैचर (Core Catcher):** मेल्टडाउन की स्थिति में पिघले हुए कोर को रोकने के लिए एक विशेष उपकरण। * **पैसिव हीट रिमूवल सिस्टम (PHRS):** बिजली न होने की स्थिति में भी रिएक्टर की गर्मी को बाहर निकालने की प्रणाली। * **डबल कंटेनमेंट:** विकिरण रिसाव को रोकने और बाहरी हमलों से सुरक्षा के लिए दोहरी सुरक्षा दीवार। अपशिष्ट प्रबंधन बांग्लादेश और रूस के बीच एक समझौता हुआ है जिसके तहत रूपपुर संयंत्र से निकलने वाले 'उपयोग किए गए परमाणु ईंधन' (Spent Nuclear Fuel) को रूस वापस भेज दिया जाएगा। वहां इसका पुनर्चक्रण (Recycling) और प्रबंधन किया जाएगा। आर्थिक पक्ष इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग 12.65 बिलियन डॉलर है। इसका अधिकांश हिस्सा (90%) रूस द्वारा ऋण के रूप में दिया जा रहा है। ऋण की अदायगी 20 वर्षों में की जाएगी। विवाद और भ्रष्टाचार रूपपुर तकिया घोटाला (Rooppur Pillow Scandal) यह घोटाला संयंत्र के कर्मचारियों के फ्लैटों के लिए फर्नीचर और सामान की खरीद में भारी भ्रष्टाचार से संबंधित था। इसमें एक तकिये की कीमत 5,957 टका और उसे ऊपर ले जाने की मजदूरी 760 टका दिखाई गई थी, जिससे देश भर में आलोचना हुई थी। गबन के आरोप अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके परिवार पर इस परियोजना से 5 बिलियन डॉलर के गबन के आरोप लगे थे। हालाँकि, रूसी दूतावास और रोसाटॉम ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि ऋण का पैसा सीधे ठेकेदारों को दिया जाता है, इसलिए भ्रष्टाचार की संभावना कम है। वर्तमान में बांग्लादेश का भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (ACC) इन आरोपों की जाँच कर रहा है। इन्हें भी देखें * बांग्लादेश में परमाणु ऊर्जा * बांग्लादेश में बिजली संयंत्रों की सूची बाहरी कड़ियाँ * आधिकारिक वेबसाइट