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सन्त रज्जब
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जनवरी 2021
रज्जब, भक्ति आन्दोलन के एक सन्त कवि थे। ये दादूदयाल के प्रमुख शिष्यों में से एक हैं। ये न रामभक्त कवि हैं, न कृष्णभक्त। ये राम-रहीम और केशव-करीम की एकता के गायक निर्गुण संत हैं।
रज्जब राजस्थान की माटी में जन्में थे। इनकी कविता में सुंदरदास की शास्त्रीयता का तो अभाव है, किन्तु पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी के अनुसार:
'' रज्जब दास निश्चय की दादू के शिष्यों में सबसे अधिक कवित्व लेकर उत्पन्न हुए थे। उनकी कविताएँ भावपन्न, साफ और सहज हैं। भाषा पर राजस्थानी प्रभाव अधिक है और इस्लामी साधना के शब्द भी अपेक्षाकृत अधिक हैं।
रज्जब उन सन्तों में हैं जिन्होने अपने गुरु की वाणियों को संरक्षित तो किया ही, पूर्ववर्ती तमाम संतों की वाणियों का संरक्षण भी किया। रज्जब ने संग्रह, सम्पादन की नयी तकनीक विकसित की। सम्पूर्ण संत साहित्य को रागों और अंगों में विभाजित किया। विभिन्न अंगों में सम्बन्धित विषय की साखियाँ चुन-चुनकर रखी गयीं। यह बहुत बड़ा काम था। रज्जब ने यह काम तब किया जब अपने ही लिखे संरक्षण की बात बहुत मुश्किल थी। रज्जब के संकलन में एक, दो, दस नहीं; 137 कवि हैं। एक ओर इस संग्रह में कबीर, रैदास जैसे पूर्वी बोली के संत हैं तो दूसरी ओर दादू, स्वयं रज्जब, वषना, गरीबदास, षेमदास, पीपा जैसे राजस्थानी बोलियों के संत हैं। नानक, अंगद, अमरदास पंजाबी भाषा-भाषी हैं तो ज्ञानदेव और नामदेव जैसे मराठी मूल के कवि भी इस संग्रह में हैं। अवधी और ब्रजभाषा में लिखने वाले संतों की बहुत बड़ी संख्या इस संग्रह में है। संस्कृत के महान आचार्यों यथा शंकराचार्य, भर्तृहरि, व्यास और रामानन्द को भी इस संग्रह में स्थान मिला है। इस संग्रह के कवि विभिन्न धर्म एवं सम्प्रदायों के हैं।
श्रेणी:भक्तिकाल के कवि
श्रेणी:भक्ति काल