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चिंग राजवंश
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zh 大清 trueᡩᠠᡳᠴᡳᠩᡤᡠᡵᡠᠨ महान छिंङ छिङ राजवंश एशिया पूर्वी एशिया 1644 1912 12 फरवरी किंग की मिंग साम्राज्य पर विजय पुइई का अभिज्ञान प्रथम अफीम युद्ध 1839–42 दूसरा अफ़ीम युद्ध 1856–60 चीन-जापानी युद्ध 1 अगस्त 1894 – 17 अप्रैल 1895 सिनहाई क्रांति 10 अक्टूबर 1911 महान किंग की स्थापना 15 मई 1636 मिंग राजवंश चीन गणराज्य (1912–49)चीन गणराज्य Flag of China (1912–1928).svg Flag of the Qing Dynasty (1889-1912).svg किंग राजवंश का ध्वज ध्वज (1889–1912) Seal of Qing dynasty.svg शाही छाप 18_century_Qing_China.png thumb right किंग साम्राज्य, 1765 zh 《鞏金甌》 trueठोस सोने का प्याला बीजिंग (शुन्तिअन प्रान्त) मैंडरिन, मांचु, मंगोलियाई, तिब्बती, तुर्की (उइगुर),Elliott 2001 290–291 कई क्षेत्रीय भाषाओं और अन्य चीनी भाषाओं साम्राज्य सम्राट शुन्जी (प्रथम) 1644–1661 पुई (अंतिम) 1908–1912 राज-प्रतिनिधि ज़ेईफेंग 1908–12 प्रधान मंत्री इकुआंग युआन शिकाई 1911 1911–12 स्वर्ग पूजा, बुद्ध धर्म, चीनी लोक धर्म, कन्फ्यूशीवाद, ताओ धर्म, ईसाई धर्म, इस्लाम, शैमेनिज्म, अन्य 1790Tan Qixiang Historical Atlas of China 8 October 1, 1982 China Map Press Beijing 978-7-5031-1844-9 13100000 1880 11500000 1740 140000000 1776 268238000 1790 301000000 1812 361000000 1820 383100000 1851 408000000 1865 367000000 1898 395918000 नगदी (वेन)
तैल (लीएंग)
छिङ राजवंश Qing dynasty (Chinese and Manchu).svg "छिङ राजवंश" चीनी में (शीर्ष) और मांचू में (नीचे) 125px 清朝 Qīng cháo Ch'ing1 ch'ao2 q ing 1 - ch ao 2 Tshin záu Ching1 Chiu4 c ing 1 - c iu 4 Cing1 ciu4 Chheng tiâu Tshing tiâu Great Qing 大 清 大 清 Tāi-chheng Tāi-tshing Dà Qīng Ta2 Ch'ing1 Daai6 Ching1 d aai 6 - c ing 1 daai6 cing1 ᡩᠠᡳᠴᡳᠩᡤᡠᡵᡠᠨ Daiqing gurun Daicing gurun
छिङ राजवंश (清朝, छिङ छाउ) चीन का आख़री राजवंश था, जिसने चीन पर सन् १६४४ से १९१२ तक राज किया। छिङ वंश के राजा वास्तव में हान चीनी जाति के नहीं थे, बल्कि उनसे बिलकुल भिन्न मांचु जाति के थे जिन्होंने इस से पहले आए मिङ राजवंश को सत्ता से निकालकर चीन के सिंहासन पर क़ब्ज़ा कर लिया। छिङ चीन का आख़री राजवंश था और इसके बाद चीन गणतांत्रिक प्रणाली की ओर चला गया।China's last empire: the great Qing, William T. Rowe, Harvard University Press, 2009, ISBN 978-0-674-03612-3
शुरुआत
चिंग राजवंश की स्थापना जुरचेन लोगों के अइसिन गियोरो परिवार ने की थी जो मंचूरिया से थे। उनके सरदार नुरहाची ने जुरचेन क़बीलों को १६वीं शताब्दी में संगठित किया। सन् १६३५ में उसके पुत्र होन्ग ताईजी ने ऐलान किया की अब जुरचेन एक संगठित मान्छु राष्ट्र थे। इन मान्छुओं ने मिंग राजवंश को दक्षिण मंचूरिया के लियाओनिंग क्षेत्र से बाहर धकेलना शुरू कर दिया। १६४४ में मिंग राजधानी बीजिंग पर विद्रोही किसानों ने धावा बोला और उसपर क़ब्ज़ा कर के तोड़-फोड़ करी। इन विद्रोहियों का नेतृत्व ली ज़िचेंग नाम का पूर्व मिंग सेवक कर रहा था, जिसने अपने नए राजवंश की घोषणा कर दी जिसे उसने 'शुन राजवंश' का नाम दिया। जब बीजिंग पर विद्रोही हावी हुए तो अंतिम मिंग सम्राट ने, जिसे 'चोंगझेन सम्राट' (यानि 'शुभ और आदरणीय सम्राट') की उपाधि मिली हुई थी, आत्महत्या कर ली। फिर ली ज़िचेंग ने मिंगों के सेनापति, वू सांगुइ, के ख़िलाफ़ कार्यवाही की। उस सेनापति ने अपने बचाव के लिए मान्छुओं से संधि कर ली और उन्हें बीजिंग में घुसने का मौक़ा मिल गया। राजकुमार दोरगोन के नेतृत्व में उन्होंने बीजिंग में दाख़िल होकर ली ज़िचेंग के नए शुन राजवंश का ख़ात्मा कर डाला। अब चीन पर मान्छुओं का राज शुरू हो गया और १६८३ तक वे पूरे चीन पर नियंत्रण पा चुके थे।
राजकाल
वैसे तो चिंग सम्राट चीनियों से अलग मान्छु जाति के थे, लेकिन समय के साथ-साथ वे ज़रा-बहुत चीनी संस्कृति अपनाने लगे। चीन में सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए इम्तिहान हुआ करते थे और चिंग राजवंश ने इन्हें जारी रखा। मान्छुओं के साथ-साथ चीनियों को भी सरकारी सेवा में स्वीकार किया गया। १८वीं सदी तक वे चीन की सीमाओं को इतना फैला चुके थे की चीन का अकार न उस से पहले कभी इतना बड़ा था और न ही उसके बाद कभी हुआ।
पतन
समय के साथ-साथ चिंग व्यवस्था में भ्रष्टाचार बढ़ गया और यूरोप के कई देश एवं जापान चीन में हस्तक्षेप करने लगे। उन्होंने ज़बरदस्ती बहुत से चीनी बंदरगाहों पर अपना नियंत्रण कर लिया। जापान १८६७-८ के मेइजी पुनर्स्थापन के बाद बहुत तेज़ी से आधुनिकरण में लगा हुआ था और १८९४-१८९५ के प्रथम चीन-जापान युद्ध में जापान ने चीन को पराजित कर दिया। १९११-१९१२ में क्रान्ति हुई और चिंग राजवंश सत्ता से हट गया। औपचारिक रूप से चीन एक गणतंत्र बन गया हालांकि फ़ौज के सेनापतियों में आपसी झड़पें चलती रहीं। अंतिम चिंग सम्राट पूयी को कुछ ही दिनों के लिए बीजिंग में सम्राट के रूप में जुलाई १९१७ में बहाल किया गया लेकिन फिर निकाल दिया गया। १९३२ से १९४५ में जापानियों का मंचूरिया पर क़ब्ज़ा रहा और उन्होंने उसे एक मंचूकूओ नामक स्वतन्त्र राष्ट्र के रूप में व्यवस्थित किया (जिसपर उनका नियंत्रण था)। उन्होंने इसका सम्राट भी पूयी को बनाया। लेकिन द्वितीय विश्वयुद्ध में १९४५ में जापान की हार के बाद चिंग राजवंश हमेशा के लिया सत्ता से हट गया।The Cambridge History of China, Volume 9 https://web.archive.org/web/20140103002233/http://books.google.com/books?id=hi2THl2FUZ4C 3 जनवरी 2014, Willard J. Peterson, Cambridge University Press, 2002, ISBN 978-0-521-24334-6The Last Manchu: The Autobiography of Henry Pu Yi, Last Emperor of China, Henry Pu Yi, Paul Kramer, Skyhorse Publishing Inc., 2010, ISBN 978-1-60239-732-3
इन्हें भी देखें
चीन के राजवंश
मिंग राजवंश
चीन का इतिहास
मान्छु लोग
जुरचेन लोग
नुरहाची
सन्दर्भ
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श्रेणी:साम्राज्य