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हृदयक्षिप्रता
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हृदयक्षिप्रता टैकीअरिथमिया Tachycardia_ECG_paper.svg ईसीजी में साइनस हृदयक्षिप्रता दिखाई दे रहा है, जिसकी हृदय गति लगभग 100 धड़कन प्रति मिनट है। हृदयशास्त्र टैकीकार्डिया t æ k i ˈ k ɑr d i ə, टैकीअरिथमिया t æ k i ə ˈ r ɪ ð m i ə धड़कन वेंट्रिकुलर हृदयक्षिप्रता सुप्रावेंट्रिकुलर हृदयक्षिप्रता पैरोक्सिस्मल हृदयक्षिप्रता जंक्शनल एक्टोपिक हृदयक्षिप्रता साइनस हृदयक्षिप्रता याअलिंदीय हृदयक्षिप्रता एवी नोडल रीएंट्रेंट हृदयक्षिप्रताhttps://www.google.ae/books/edition/2025_26_RRB_ECG_Technician_Solved_Papers/_w-NEQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%9F%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA54&printsec=frontcover 2025-26 आरआरबी ईसीजी तकनीशियन हल किए गए प्रश्न पत्र और अभ्यास पुस्तिका टीम वाईसीटी विशेषज्ञ यूथ कॉम्पिटिशन टाइम्स 2025
हृदयक्षिप्रता(Tachycardia),https://www.google.ae/books/edition/Uttar%C4%81kha%E1%B9%87%E1%B8%8Da/0zFuAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%B9%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE&dq=%E0%A4%B9%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE&printsec=frontcover Uttarākhaṇḍa विश्वविद्यालय मिशिगन उत्तराखंड शोध संस्थान 1993 जिसे टैकीअरिथमिया भी कहा जाता है, ऐसी अवस्था है जिसमें हृदय की धड़कन सामान्य विश्राम अवस्था की अपेक्षा अधिक तेज़ हो जाती है।https://www.google.ae/books/edition/2025_26_RRB_Pharmacist_Solved_Papers_and/AYeGEQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%9F%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE&pg=PA365&printsec=frontcover 2025-26 आरआरबी फार्मासिस्ट हल किए गए प्रश्न पत्र और अभ्यास पुस्तिका टीम वाईसीटी विशेषज्ञ यूथ कॉम्पिटिशन टाइम्स 2025 सामान्यतः वयस्कों में यदि विश्राम की स्थिति में हृदय गति प्रति मिनट 100 धड़कनों से अधिक हो,https://www.google.ae/books/edition/2024_25_RRB_Health_Malaria_Inspector_Gra/IxInEQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B9%E0%A5%83%E0%A4%A6%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE&pg=PA180&printsec=frontcover 2024-25 आरआरबी स्वास्थ्य एवं मलेरिया निरीक्षक ग्रेड-III के हल किए गए प्रश्नपत्र और अभ्यास पुस्तिका टीम वाईसीटी विशेषज्ञ यूथ कॉम्पिटिशन टाइम्स 2025 तो उसे हृदयक्षिप्रता की श्रेणी में रखा जाता है। ऑट्री ईएच, जियोन सी, वेयर एमजी Tachyarrhythmias Blueprints Cardiology 2006 ब्लैकवेल माल्डेन, मैसाचुसेट्स 9781405104647 93 2nd https://books.google.com/books?id=s3UBLYEWUxwC&pg=PA93 यह स्थिति अस्थायी और शारीरिक रूप से सामान्य भी हो सकती है, अथवा किसी अंतर्निहित रोग या हृदय संबंधी विकार का संकेत भी हो सकती है।
कई परिस्थितियों में हृदय गति का बढ़ना शरीर की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है। उदाहरण के लिए, व्यायाम, शारीरिक परिश्रम, भावनात्मक तनाव, भय, उत्साह अथवा कैफीन जैसे उत्तेजक पदार्थों के सेवन के दौरान हृदय गति का बढ़ना सामान्य माना जाता है। ऐसी स्थिति में हृदय शरीर की बढ़ी हुई ऑक्सीजन और ऊर्जा की आवश्यकता को पूरा करने के लिए अधिक तीव्रता से कार्य करता है।
इसके विपरीत, जब विश्राम की अवस्था में बिना किसी स्पष्ट शारीरिक कारण के हृदय गति असामान्य रूप से बढ़ जाती है, तो यह हृदय की विद्युत संचरण प्रणाली में गड़बड़ी का संकेत हो सकती है। हृदय के भीतर विद्युत संकेतों के निर्माण या संचरण में होने वाली असामान्यताएँ विभिन्न प्रकार की अतालताओं (अरिथमिया) को जन्म दे सकती हैं, जिनमें हृदयक्षिप्रता एक प्रमुख रूप है।
जटिलताएँ
हृदयक्षिप्रता की गंभीरता और इसके प्रभाव इस बात पर निर्भर करते हैं कि हृदय गति कितनी अधिक है, यह कितनी देर तक बनी रहती है तथा इसके पीछे का मूल कारण क्या है। कुछ मामलों में अत्यधिक तेज़ हृदय गति के कारण हृदय शरीर की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप मस्तिष्क तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति अस्थायी रूप से कम हो सकती है, जिससे व्यक्ति को चक्कर आना, कमज़ोरी, अथवा गंभीर परिस्थितियों में बेहोशी (सिंकोप) हो सकती है। थॉम्पसन ईजी, पाई आरके 2 जून 2011 Passing Out (Syncope) Caused by Arrhythmias https://www.cardiosmart.org/healthwise/te71/52ab/c/te7152abc 13 अप्रैल 2020 13 जून 2020 https://web.archive.org/web/20200613100329/https://www.cardiosmart.org/healthwise/te71/52ab/c/te7152abc dead कार्डियोस्मार्ट अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी विशेष रूप से, यदि हृदयक्षिप्रता लंबे समय तक बना रहे या किसी गंभीर हृदय अतालता से संबंधित हो, तो यह जीवन के लिए भी खतरा उत्पन्न कर सकता है।
इसके अतिरिक्त, जब रक्त का प्रवाह अत्यधिक तीव्र हो जाता है अथवा क्षतिग्रस्त अंतःस्तर (एंडोथेलियम) वाली रक्तवाहिकाओं में उच्च वेग से प्रवाहित होता है, तो रक्त और वाहिका की दीवार के बीच घर्षण बढ़ सकता है। इस बढ़े हुए घर्षण के कारण रक्त प्रवाह में अशांति तथा अन्य हेमोडायनामिक गड़बड़ियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। कुशनर ए, वेस्ट डब्ल्यूपी, पिल्लारिसेट्टी एलएस Virchow Triad 2020 https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK539697/ StatPearls Treasure Island (FL) स्टेटपर्ल्स पब्लिशिंग 30969519 18 जून 2020 विर्खो के त्रय के अनुसार, रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया (थ्रोम्बोसिस) के लिए तीन प्रमुख कारक उत्तरदायी माने जाते हैं—रक्त का असामान्य प्रवाह, रक्त का अत्यधिक थक्का बनने की प्रवृत्ति (अतिसहज रक्तस्रावणीयता) तथा एंडोथेलियम की क्षति या विकार। कुमार डीआर, हानलिन ई, ग्लुरिच आई, माज़ा जेजे, येल एसएच Virchow's contribution to the understanding of thrombosis and cellular biology क्लिनिकल मेडिसिन एंड रिसर्च 8 3–4 168–172 दिसंबर 2010 20739582 10.3121/cmr.2009.866 3006583 इसलिए असामान्य रक्त प्रवाह, विशेषकर अशांत प्रवाह, रक्तवाहिकाओं के भीतर थक्के बनने के जोखिम को बढ़ा सकता है। ऐसे थक्के यदि महत्वपूर्ण रक्तवाहिकाओं में विकसित हों, तो वे गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं, जैसे हृदयाघात, आघात (स्ट्रोक) अथवा फुफ्फुसीय अन्तःशल्यता, का कारण बन सकते हैं।
सन्दर्भ
श्रेणी:हृदय रोग