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गिरिराज किशोर (राजनीतिज्ञ)
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आचार्य गिरिराज किशोर (4 फ़रवरी 1920 – 13 जुलाई 2014) विश्व हिन्दू परिषद के नेता थे। वे श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के समय से ही परिषद् से जुड़े थे। गिरिराज किशोर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रहे। श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन में उनकी प्रमुख भूमिका थी।गिरिराज: 'सुलझे हुए, पर समझौतावादी नहीं' http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/07/140714_giriraj_kishore_dead_tk.shtml बीबीसी हिन्दी फ़ैसल मोहम्मद अली १४ जुलाई २०१४ १४ जुलाई २०१४ https://web.archive.org/web/20140716073311/http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/07/140714_giriraj_kishore_dead_tk.shtml 16 जुलाई 2014 live नई दिल्ली स्थित विहिप मुख्यालय में उन्होंने लगभग 94 वर्ष की आयु में 13 जुलाई 2014 को प्राण त्यागे।विहिप नेता गिरिराज किशोर का निधन, पीएम ने जताया शोक http://www.patrika.com/news/veteran-vhp-leader-giriraj-kishore-passes-away/1017654 14 जुलाई 2014 पत्रिका समाचार समूह 14 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20140714191505/http://www.patrika.com/news/veteran-vhp-leader-giriraj-kishore-passes-away/1017654 14 जुलाई 2014 live आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले आचार्य गिरिराज किशोर ने देहदान का संकल्प बहुत पहले ही कर लिया था ताकि उनकी मृत्यु के बाद भी उनका शरीर किसी के काम आ सके।विहिप नेता आचार्य गिरिराज किशोर का निधन https://web.archive.org/web/20140715003610/http://www.jagran.com/delhi/new-delhi-city-11472851.html 15 जुलाई 2014 13 जुलाई 2014 दैनिक जागरण नई दिल्ली वो आजीवन कुंवारे रहे और सामाजिक कल्याण के लिए कठोर संघर्ष किया। उन्होंने निराश्रित बच्चों की शिक्षा के लिए विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की।आचार्य गिरिराज किशोर जिन्होंने रामलला को टाट से मुक्ति दिलाने की लड़ाई लड़ी, लेकिन अपने 'मोक्ष' की परवाह नहीं की
वरिष्ठ पत्रकार प्रभु चावला से बातचीत में आचार्य गिरिराज किशोर ने स्पष्ट कहा, 'मंदिर निर्माण के द्वारा राष्ट्र का स्वाभिमान जागृत होगा और स्वाभिमानी राष्ट्र ही उन्नति कर सकता है, अन्य कोई नहीं।' जब चावला ने कहा कि देश का निर्माण आर्थिक प्रगति से होता है तो किशोर ने कहा ऐसा नहीं है।
परिचय
आचार्य गिरिराज किशोर का जन्म 4 फ़रवरी 1920 को एटा, उ.प्र. के मिसौली गांव में श्री श्यामलाल कुलश्रेष्ठ एवं श्रीमती अयोध्यादेवी कुलश्रेष्ठ के घर में मंझले पुत्र के रूप में हुआ। हाथरस और अलीगढ़ में उनकी शिक्षा हुई, आगरा से उन्होंने इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की। आगरा में श्री दीनदयाल जी और श्री भव जुगादे के सानिध्य में आने से वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और फिर उन्होंने संघ के लिए ही जीवन समर्पित कर दिया।
प्रचारक के नाते आचार्य जी मैनपुरी, आगरा, भरतपुर, धौलपुर आदि में रहे। 1948 में संघ पर प्रतिबंध लगने पर वे मैनपुरी, आगरा, बरेली तथा बनारस की जेल में 13 महीने तक बंद रहे। वहां से छूटने के बाद संघ कार्य के साथ ही आचार्य जी ने बी.ए तथा इतिहास, हिन्दी व राजनीति शास्त्र में एम.ए. किया। साहित्य रत्न और संस्कृत की प्रथमा परीक्षा भी उन्होंने उत्तीर्ण कर ली। 1949 से 58 तक वे उन्नाव, आगरा, जालौन तथा उड़ीसा में प्रचारक रहे।
इसी दौरान उनके छोटे भाई वीरेन्द्र की अचानक मृत्यु हो गयी। ऐसे में परिवार की आर्थिक दशा संभालने हेतु वे भिण्ड (म.प्र.) के अड़ोखर कॉलेज में सीधे प्राचार्य बना दिये गये।
आचार्य जी की रुचि सार्वजनिक जीवन में देखकर उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और फिर संगठन मंत्री बनाया गया। नौकरी छोड़कर वे विद्यार्थी परिषद को सुदृढ़ करने लगे। उनका केन्द्र दिल्ली था। उसी समय दिल्ली वि0वि0 में पहली बार विद्यार्थी परिषद ने अध्यक्ष पद जीता। फिर आचार्य जी को जनसंघ का संगठन मंत्री बनाकर राजस्थान भेजा गया। आपातकाल में वे 15 मास भरतपुर, जोधपुर और जयपुर जेल में रहे।
1979 में मीनाक्षीपुरम कांड ने पूरे देश में हलचल मचा दी। वहां गांव के सभी 3,000 हिन्दू एक साथ मुसलमान बने। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इससे चिंतित होकर डॉ॰ कर्णसिंह को कुछ करने को कहा। उन्होंने संघ से मिलकर ‘विराट हिन्दू समाज’ नामक संस्था बनायी। संघ की ओर से श्री अशोक सिंहल और आचार्य जी इस काम में लगे। दिल्ली तथा देश के अनेक भागों में विशाल कार्यक्रम हुए; पर धीरे-धीरे संघ के ध्यान में आया कि डॉ॰ कर्णसिंह और इंदिरा गांधी इससे अपनी राजनीति साधना चाहते हैं। अतः संघ ने हाथ खींच लिया। ऐसा होते ही वह संस्था भी ठप्प हो गयी। इसके बाद अशोक जी और आचार्य जी को विश्व हिन्दू परिषद के काम में लगा दिया गया।
1980 के बाद इन दोनों के नेतृत्व में परिषद ने अभूतपूर्व काम किये। संस्कृति रक्षा योजना, एकात्मता यज्ञ यात्रा, राम जानकी यात्रा, रामशिला पूजन, राम ज्योति अभियान, राममंदिर का शिलान्यास और फिर छह दिसम्बर को बाबरी ढांचे के ध्वंस आदि ने विश्व हिन्दू परिषद को नयी ऊंचाइयां प्रदान कीं। आज विश्व हिन्दू परिषद गोरक्षा, संस्कृत, सेवा कार्य, एकल विद्यालय, बजरंग दल, दुर्गा वाहिनी, पुजारी प्रशिक्षण, मठ-मंदिर व संतों से संपर्क, परावर्तन आदि आयामों के माध्यम से विश्व का सबसे प्रबल हिन्दू संगठन बन गया है।
विश्व हिन्दू परिषद के विभिन्न दायित्व निभाते हुए आचार्य जी ने इंग्लैंड, हालैंड, बेल्जियम, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, रूस, नार्वे, स्वीडन, डेनमार्क, इटली, मारीशस, मोरक्को, गुयाना, नैरोबी, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, सिंगापुर, जापान, थाइलैंड आदि देशों की यात्रा की है। वृद्धावस्था में अनेक रोगों से घिरे होने पर भी उनकी सक्रियता बनी है।
निधन
13 जुलाई 2014 को 96 साल की उम्र में निधन हो गया। विश्व हिन्दू परिषद के आरके पुरम, दिल्ली स्थित मुख्यालय में रात 9:15 बजे अंतिम सांस ली थी। उनके निधन पर विहिप और भाजपा नेताओं ने शोक जताया।Veteran VHP leader Giriraj kishore passes away http://www.patrika.com/news/veteran-vhp-leader-giriraj-kishore-passes-away/1017654 14 जुलाई 2014 Patrika Group 14 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20140714191505/http://www.patrika.com/news/veteran-vhp-leader-giriraj-kishore-passes-away/1017654 14 जुलाई 2014 liveविहिप नेता गिरिराज किशोर का निधन http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-giriraj-kishor-vsp-39-39-438077.html 14 जुलाई 2014 14 जुलाई 2014 https://web.archive.org/web/20140715014147/http://www.livehindustan.com/news/desh/national/article1-giriraj-kishor-vsp-39-39-438077.html 15 जुलाई 2014 dead
सन्दर्भ
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