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पृथ्वी का वायुमण्डल
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thumb|right|400px|अंतरिक्ष से पृथ्वी का दृश्य।
पृथ्वी को घेरती हुई जितने स्थान में वायु रहती है उसे वायुमण्डल कहते हैं। वायुमंडलhttps://www.deshbandhu.co.in/vichar/science-why-is-the-atmosphere-on-the-earth-74256-2 क्यों है पृथ्वी पर वायुमंडल? 15 मार्च 2019 देशबंधु https://web.archive.org/web/20221006132022/https://www.deshbandhu.co.in/vichar/science-why-is-the-atmosphere-on-the-earth-74256-2 6 अक्तूबर 2022 11 मई 2022 dead के अतिरिक्त पृथ्वी का स्थलमण्डल ठोस पदार्थों से बना और जलमण्डल जल से बना हैं। वायुमंडल कितनी दूर तक फैला हुआ है, इसका ठीक पता हमें नहीं है, पर यह निश्चित है कि पृथ्वी के चतुर्दिक् कई सौ मीलों तक यह फैला हुआ है।https://aajtak.intoday.in/education/story/world-geography-general-knowledge-earth-atmosphere-1-777611.html पृथ्वी के वायुमंडल से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और आसिंपुर आखरी बिहार भारत आज तक https://web.archive.org/web/20170217045714/http://aajtak.intoday.in/education/story/world-geography-general-knowledge-earth-atmosphere-1-777611.html 17 फ़रवरी 2017 live
वायुमंडल के निचले भाग को (जो प्राय: चार से आठ मील तक फैला हुआ है) क्षोभमंडल, उसके ऊपर के भाग को समतापमण्डल और उसके और ऊपर के भाग को मध्य मण्डल और मध्य मण्डल से ऊपरी भाग को आयनमंडल कहते हैं। क्षोभमंडल और समतापमंडल के बीच के भाग को क्षोभसीमा और समतापमंडल और मध्यमंडल के बीच के भाग को समतापसीमा कहते हैं। साधारणतया ऊपर के तल बिलकुल शांत रहते हैं।https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B5-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A0%E0%A4%A8-1456214534-2 पृथ्वी के वायुमण्डल की संरचना व संगठन जागरण जोश https://web.archive.org/web/20170902153346/http://www.jagranjosh.com/general-knowledge/%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B5-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A0%E0%A4%A8-1456214534-2 2 सितंबर 2017 dead
प्राणियों और पादपों के जीवनपोषण के लिए वायु अति अत्यावश्यक है। पृथ्वीतल के अपक्षय पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। नाना प्रकार की भौतिक और रासायनिक क्रियाएँ वायुमंडल की वायु के कारण ही संपन्न होती हैं। वायुमंडल के अनेक दृश्य, जैसे इंद्रधनुष, बिजली का चमकना और कड़कना, उत्तर ध्रुवीय ज्योति, दक्षिण ध्रुवीय ज्योति, प्रभामंडल, किरीट, मरीचिका इत्यादि प्रकाश या विद्युत के कारण ही उत्पन्न होते हैं।
वायुमंडल का घनत्व एक सा नहीं रहता। समुद्रतल पर वायु का दबाव 760 मिलीमीटर पारे के स्तंभ के दाब के बराबर होता है। ऊपर उठने से दबाव में कमी होती जाती है। ताप या स्थान के परिवर्तन से भी दबाव में अंतर आ जाता है।
सूर्य की लघुतरंग विकिरण ऊर्जा से पृथ्वी गरम होती है। पृथ्वी से दीर्घतरंग भौमिक ऊर्जा का विकिरण वायुमंडल में अवशोषित होता है। इससे वायुमंडल का ताप - 68 डिग्री सेल्सियस से 55 डिग्री सेल्सियस के बीच ही रहता है। 100 किमी के ऊपर पराबैंगनी प्रकाश से आक्सीजन अणु आयनों में परिणत हो जाते हैं और परमाणु इलेक्ट्रॉनों में। इसी से इस मंडल को आयनमंडल कहते हैं। रात्रि में ये आयन या इलेक्ट्रॉन फिर परस्पर मिलकर अणु या परमाणु में परिणत हो जाते हैं, जिससे रात्रि के प्रकाश के वर्णपट में हरी और लाल रेखाएँ दिखाई पड़ती हैं।
वायुमंडल संगठन
right|thumb|250px|पृथ्वी के वातावरण के इकाई आयतन में गैसों की मात्रा
पृथ्वी के चारों ओर सैकड़ो किमी की मोटाई में लपेटने वाले गैसीय आवरण को वायुमण्डल कहते हैं। वायुमण्डल विभिन्न गैसों का मिश्रण है जो पृथ्वी को चारो ओर से घेरे हुए है। निचले स्तरों में वायुमण्डल का संघटन अपेक्षाकृत एक समान रहता है। ऊँचाई में गैसों की आपेक्षिक मात्रा में परिवर्तन पाया जाता है।
शुद्ध और शुष्क वायु में नाइट्रोजन 78 प्रतिशत, ऑक्सीजन, 21 प्रतिशत, आर्गन 0.93 प्रतिशत कार्बन डाई ऑक्साइड 0.03 प्रतिशत तथा हाइड्रोजन, हीलियम, ओज़ोन, निऑन, जेनान, आदि अल्प मात्रा में उपस्थित रहती हैं। नम वायुमण्डल में जल वाष्प की मात्रा 5 प्रतिशत तक होती है। वायुमण्डीय जल वाष्प की प्राप्ति सागरों, जलाशयों, वनस्पतियों तथा मृदाओं के जल से होती है। जल वाष्प की मात्रा भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर घटती जाती है। जल वाष्प के कारण ही बादल, कोहरा, पाला, वर्षा, ओस, हिम, ओला, हिमपात आदि होता है। वायुमण्डल में ओजोन परत की पृथ्वी और उस पर रहने वाले जीवों के लिए बड़ी ही महत्त्वपूर्ण भूमिका है। यह परत सूर्य से आने वाली उच्च आवृत्ति की पराबैंगनी प्रकाश (किरणों) को अवशोषित कर लेती है, जो पृथ्वी पर जीवन के लिये हानिकारक है। ओजोन की परत की खोज 1913 में फ़्राँस के भौतिकविद फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने की थी।
पृथ्वीतल पर की शुष्क वायु का औसत संगठन इस प्रकार है-
गैस प्रतिशत आयतननाइट्रोजन 78.09ऑक्सीजन 20.95आर्गन 0.93कार्बन डाइआक्साइड 0.03निऑन 0.0018हाइड्रोजन 0.001हीलियम 0.000524क्रिप्टन 0.0001ज़ेनान 0.000008ओज़ोन 0.000001मीथेन अल्प मात्रा
वायुमण्डल गर्मी को रोककर रखने में एक विशाल 'कांच घर' का काम करता है, जो लघु तरंगों (short waves) और विकिरण को पृथ्वी के धरातल पर आने देता है, परंतु पृथ्वी से विकसित होने वाली तरंगों को बाहर जाने से रोकता है। इस प्रकार वायुमण्डल पृथ्वी पर सम तापमान बनाए रखता है। वायुमण्डल में जलवाष्प एवं गैसों के अतिरिक्त सूक्ष्म ठोस कण भी उपस्थित हैं।
वायुमंडलीय आर्द्रता
आर्द्रता
वायुमंडलीय आर्द्रता वायु में उपस्थित जलवाष्प के ऊपर निर्भर करती है। यह जलवाष्प वायुमंडल के निचले स्तरों में रहता है। इसकी मात्रा सभी स्थानों में तथा सदैव एक सी नहीं रहती। समयानुसार उसमें अंतर होते रहते हैं। यह जलवाष्प नदी, तालाब, झील, सागर आदि के जल के वाष्पीकरण से बनता है।
वायुमंडलीय आर्द्रता में दो बातों पर ध्यान देना चाहिए:
परम आर्द्रता - किसी विशेष ताप पर वायु के इकाई आयतन में विद्यमान भाप की मात्रा को कहते हैं।
आपेक्षिक आर्द्रता - प्रतिशत में व्यक्त वह संबंध है जो उस वायु में विद्यमान भाप की मात्रा में और उसी ताप पर उसी आयतन की संतृप्त वायु की भाप मात्रा में होता है।
वायुमंडलीय आर्द्रता को मुख्यत: दो प्रकार के मापियों से मापते हैं:
रासायनिक आर्द्रतामापी
भौतिक आर्द्रतामापी
वायुमंडलीय ताप का मूलस्रोत सूर्य है। वायु को सूर्य की अपेक्षा पृथ्वी के संस्पर्श से अधिक ऊष्मा मिलती है, क्योंकि उसपर धूलिकणों का प्रभाव पड़ता है। ये धूलिकण, जो ऊष्मा के कुचालक होते हैं, भूपृष्ठ पर एवं उसके निकट अधिक होते हैं और वायुमंडल में ऊँचाई के अनुसार कम होते जाते हैं। अत: प्रारंभ में सूर्य की किरणें धरातल को गरम करती हैं। फिर वही ऊष्मा संचालन (conduction) द्वारा क्रमश: वायुमंडल के निचले स्तर से ऊपरी स्तर की ओर फैलती जाती है। इसके अतिरिक्त गरम होकर वायु ऊपर उठती है, रिक्त स्थान की पूर्ति अपेक्षाकृत ठंढी वायु करती है; फिर वह भी गरम होकर ऊपर उठती है। फलत: संवाहन धाराएँ उत्पन्न हो जाती हैं। अत: ऊष्मा के ऊपर फैलने में संचालन और संवाहन काम करते हैं।
वायुमंडलीय दबाव
right|thumb|300px|उंचाई के साथ वायुमण्डल के घनत्व तथा तापमान का परिवर्तन
वायुदाब
वायुमंडलीय दबाव अथवा वायुदाब किसी स्थान के इकाई क्षेत्रफल पर वायुमंडल के स्तंभ का भार होता है। किसी भी समतल पर वायुमंडल दबाव उसके ऊपर की वायु का भार होता है। यह दबाव भूपृष्ठ के निकट ऊँचाई के साथ शीघ्रता से, तथा वायुमंडल में अधिक ऊंचाई पर धीरे धीरे, घटता है। परंतु किसी भी स्थान पर वायु की ऊँचाई के सापेक्ष स्थिर नहीं रहता है। मौसम और ऋतुओं के परिवर्तन के साथ इसमें अंतर होते रहते हैं।
वायुमंडलीय दबाव विभिन्न वायुदाबमापियों (बैरोमीटरों) द्वारा नापा जाता है। सागर तल पर वायुमंडलीय दबाव 760 मिमि पारास्तम्भ के दाब के बराबर होता है। वायु दाब मापने की इकाई मिलीबार है। समुंद्री तल पर औसत वायुमंडलीय दाब 1013.25 मिलीबार(MB) होता है । इनका अर्थ एक ही है। इसके आधार पर मानचित्र पर इसे समदाब रेखाओं द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इन्हीं पर वायु-भार-पेटियाँ, हवाओं की दिशा, वेग, दिशा परिवर्तन आदि निर्भर करते हैं।https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/list-of-idealised-global-air-pressure-belt-across-the-globe-in-hindi-1528374913-2 भूमंडलीय आदर्श वायुदाब वाले क्षेत्रो की सूची जागरण जोश
वायुमण्डल की परतें
right|thumb|400px|वायुमण्डल की विभिन्न परतों में क्या-क्या उपस्थित हैं
वायुमण्डल का घनत्व ऊंचाई के साथ-साथ घटता जाता है। वायुमण्डल को 5 विभिन्न परतों में विभाजित किया गया है।
क्षोभमण्डल
समतापमण्डल
मध्यमण्डल
तापमण्डल
बाह्यमण्डल
क्षोभमंडल (TROPOSPHERE)
क्षोभमण्डल
क्षोभमण्डल वायुमंडल की सबसे निचली परत है। यह मण्डल जैव मण्डलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है क्योंकि मौसम संबंधी सारी घटनाएं इसी में घटित होती हैं। प्रति 165 मीटर की ऊंचाई पर वायु का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस की औसत दर से घटता है। इसे सामान्य ताप पतन दर कहते है।
इसकी ऊँचाई ध्रुवो पर 8 से 10 कि॰मी॰ तथा विषुवत रेखा पर लगभग 18 से 20 कि॰मी॰ होती है।
इस मंडल को संवहन मंडल,अधो मंडल और वायु मंडल की सबसे छोटी परत भी कहा जाता हैं। और निम्न स्तर का परत भी कहा जाता है।
समतापमण्डल (stratosphere)
समतापमण्डल
ओजोन मण्डल समतापमंडल 38 से 50 किलोमीटर तक विस्तृत है। (समतापमंडल में लगभग 60 से 80 किलोमीटर तक ओजोन गैस पाया जाता है जिसे ओजोन परत कहा जाता है ) इस मण्डल में तापमान स्थिर रहता है तथा इसके बाद ऊंचाई के साथ बढ़ता जाता है। समताप मण्डल बादल तथा मौसम संबंधी घटनाओं से मुक्त रहता है। इस मण्डल के निचले भाग में जेट वायुयान के उड़ान भरने के लिए आदर्श दशाएं हैं। इसकी ऊपरी सीमा को 'स्ट्रैटोपाज' कहते हैं। इस मण्डल के निचले भाग में ओज़ोन गैस बहुतायात में पायी जाती है। इस ओज़ोन बहुल मण्डल को ओज़ोन मण्डल कहते हैं। ओज़ोन गैस सौर्यिक विकिरण की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को सोख लेती है और उन्हें भूतल तक नहीं पहुंचने देती है तथा पृथ्वी को अधिक गर्म होने से बचाती हैं।यहाँ से ऊपर जाने पर तापमान में बढोतरी होती है ओजोन परत टूटने की इकाई डाब्सन मे मापी जाती है।ओजोन परत को के लिए 1987 ईo में मौंट्रियल समझौता कनाडा में हुआ।
मध्यमण्डल (Mesosphere)
यह वायुमंडल की तीसरी परत है जो समताप सीमा के ऊपर स्थित है। इसकी ऊंचाई लगभग 80 किलोमीटर तक है। अंतरिक्ष से आने वाले उल्का पिंड इसी परत में जलते है। इस मंडल में ऊंचाई के साथ तापमान में पुनः गिरावट होने लगती है।https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B5-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A0%E0%A4%A8-1456214534-2 वायुमंडल की संरचना Jagran Josh https://web.archive.org/web/20170902153346/http://www.jagranjosh.com/general-knowledge/%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%AE%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E0%A4%A1%E0%A4%B2-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B5-%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%A0%E0%A4%A8-1456214534-2 2 सितंबर 2017 dead
ताप मंडल या आयन मण्डल (Thermosphere)
इस मण्डल में ऊंचाई के साथ ताप में तेजी से वृद्धि होती है। तापमण्डल को पुनः दो उपमण्डलों 'आयन मण्डल' तथा 'आयनसीमा मण्डल' में विभाजित किया गया है। आयन मण्डल, तापमण्डल का निचला भाग है जिसमें विद्युत आवेशित कण होते हैं जिन्हें आयन कहते हैं। ये कण रेडियो तरंगों को भूपृष्ठ पर परावर्तित करते हैं और बेहतर संचार को संभव बनाते हैं। तापमण्डल के ऊपरी भाग आयनसीमा मण्डल की कोई सुस्पष्ट ऊपरी सीमा नहीं है। इसके बाद अन्तरिक्ष का विस्तार है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण परत है।
तापमंडल के निचले हिस्से में आयनमण्डल नामक परत पाई जाती है। यह परत 80 से 500 किलोमीटर की ऊंचाई तक विस्तृत है। आयन मंडल की निचली सिमा में ताप प्रायः कम होता है जो ऊंचाई के साथ बढ़ते जाता है जो 250 किमी० में 702℃ हो जाता है। इस मंडल में सूर्य के अत्यधिक ताप के कारण गैसें अपने आयनों में टुट जाती हैं।
इस लेयर से रेडियो वेब रिटर्न होती है
बाह्यमण्डल (Exosphere)
बाह्यमण्डल धरातल से 500 से 1000 किमी० के मध्य बहिर्मंडल पाया जाता है, कुछ विद्वान इसको 1600 किमी० तक मानते है। इस परत का विशेष अध्ययन लैमेन स्पिट्जर ने किया था। इसमें हीलियम तथा हाइड्रोजन गैसों की अधिकता है।
इन्हें भी देखें
वायुमंडल (खगोलीय)
वायुमंडलीय दाब
अंतरिक्ष
मौसम
मौसम विज्ञान
जलवायु
पवन
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
वायुमंडल का संघटन एवं संरचना
श्रेणी:पर्यावरण
श्रेणी:वायुमण्डल
श्रेणी:जलवायु विज्ञान
श्रेणी:परिवेश
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श्रेणी:सौर मंडल के ग्रहीय वायुमण्डल