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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

मीनार-ए-जाम

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thumb|220px|मीनार-ए-जाम मीनार-ए-जाम (फ़ारसी: ur منار جام) या जाम की मीनार (अंग्रेज़ी: Minaret of Jam) पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान के ग़ोर प्रांत के शहरक ज़िले में हरी नदी (हरीरूद) के किनारे खड़ी एक प्रसिद्ध ईंटों की बनी मीनार है। यह ६५ मीटर ऊँची मीनार दिल्ली के क़ुतुब मीनार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे ऊँची मीनार है, हालांकि क़ुतुब मीनार वास्तव में इसी मीनार से प्रेरित होकर बनवाया गया था। मीनार-ए-जाम जाम नदी और हरी नदी के संगम के पास है और चारों तरफ़ से २,४०० मीटर ऊँचे पहुँचने वाले पहाड़ों से घिरी हुई है। सन् ११९० के दशक में बनी इस मीनार पर ईंट, गच पलस्तर (स्टक्को) और टाइलें लगी हुई हैं जिनपर क़ुरान की आयतें और आकर्षक लकीरें व आकृतियाँ बनी हुई हैं। इतिहास माना जाता है कि मीनार-ए-जाम ग़ोरी राजवंश की ग्रीष्मकालीन राजधानी फ़िरूज़कुह (Firuzkuh) के पास बनवाई गई थी। इसपर अरबी भाषा में बनी लिखाईयों पर लगी तारीख़ ठीक से पढ़ी नहीं जा सकती। या तो यह सन् ११९३-९४ का ज़िक्र कर रही है, या फिर सन् ११७४-७५ का। इसलिए या तो यह ग़ोरियों के सुलतान ग़ियासउद्दीन की दिल्ली में सन् ११९२ में ग़ज़नवियों पर हुई जीत का स्मारक थी या फिर सन् ११७३ में ग़ज़नी में ग़ुज़​ तुर्कों पर हुई जीत का। १२वीं और १३वीं सदी में ग़ोरी राजवंश का साम्राज्य पूर्वी ईरान से लेकर उत्तर भारत में दिल्ली तक फैला हुआ था।Minaret and Archaeological Remains of Jam https://web.archive.org/web/20180712215915/http://whc.unesco.org/en/list/211 12 जुलाई 2018 , UNESCO World Heritage Center, UNESCO, Accessed 19 फ़रवरी 2011 ग़ोरी राजवंश का बखान करने वाले मध्यकालीन लेखक जुज़जानी के अनुसार यह मीनार यही पर स्थित जुम्मा मस्जिद के साथ जुड़ी थी लेकिन नदी में अचानक सैलाब आने से मस्जिद बह गई। इतिहासकारों ने यहाँ छानबीन करके पाया है कि मस्जिद के साथ एक बड़ा आँगन सटा हुआ है जो संभव है उसी मस्जिद का हिस्सा रहा हो। १२०२ में ग़ियासउद्दीन के देहांत के बाद ग़ोरियों का साम्राज्य ढलने लगा और वह अपनी ज़मीनें ख़्वारेज़्म साम्राज्य को खोने लगे। जुज़जानी का कहना है कि १२२२ में मंगोल आक्रमण ने फिरूज़कुह शहर को ख़त्म कर दिया। अफ़ग़ानिस्तान से बाहर की दुनिया को इस मीनार की ज़्यादा ख़बर नहीं थी लेकिन १८८६ में भारत के ब्रिटिश राज से जुड़े अफ़सर थोमस होलदिक (Thomas Holdich) यहाँ पहुंचे और उन्होंने इसका ज़िक्र अपनी रपट में किया। २०वीं सदी में कई इतिहासकारों ने आकर इसका अध्ययन किया। मीनार को ख़तरे हरी नदी और जाम नदी के पास होने से इसके नीचे की ज़मीन में पानी छुता है जिस से यह मीनार ज़रा टेढ़ी होने लगी है। इसे स्थिर करने का काम जारी है। इस क्षेत्र में ज़लज़ले भी आते हैं और वह भी एक ख़तरा हैं। समय के साथ-साथ लुटेरों और बईमान इतिहासकारों ने भी इसके आसपास बिना अनुमति के खुदाई करके नुकसान पहुँचाया है। मीनार की कुछ तस्वीरें इन्हें भी देखें हरीरूद अफ़्गानिस्तान सन्दर्भ 2 श्रेणी:मध्य एशिया श्रेणी:मध्य एशिया की मीनारें श्रेणी:मीनार श्रेणी:ग़ोर प्रान्त श्रेणी:अफ़ग़ानिस्तान में विश्व धरोहर स्थल