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हरात्मक श्रेणी
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श्रेणी
गणित में हरात्मक श्रेणी अपसारी अनन्त श्रेणी है:
इसका नामकरण समान्तर श्रेणी के व्युत्क्रम से हुआ है। समान्तर श्रेणी के पदों को यहां हर में लिखा जाता है अर्थात समान्तर श्रेणी के पद से सम्बंधित हरात्मक श्रेणी का पद है।
अंग्रेजी में इसे हार्मोनिक श्रेणी कहते हैं जिसकी अवधारणा संगीत की धुन से हुआ। एक कम्पनशील तंतु से निकलने वाल अधिस्वरक (धुन) 1/2, 1/3, 1/4, आदि, तंतु की मूलभूत तरंगदैर्घ्य हैं। प्रथम पद के बाद श्रेणी का प्रत्येक पद अपने पास वाले पदों का हरात्मक माध्य होता है।
इतिहास
चौदवीं शताब्दी में निकोल ऑरेस्म नें यह सिद्ध किया कि हरात्मक श्रेणी अपसारी होती है लेकिन यह परिणाम किसी ने नहीं देखे। 17 वीं शताब्दी में पेट्रो मंगोली, जोहान बर्नूली और जैकब बर्नूली इसकी उपपत्ति की।
ऐतिहासिक दृष्टि से हरात्मक अनुक्रम को वास्तुकारों में कुछ प्रसिद्धि मिली। यह विशेष रूप से बरॉक काल में हुई जब वास्तुकारों ने उन्नयन (ऊंचाई) और छत समतल के मध्य संतुलन की स्थापना के लिए उपयोग किया तथा चर्चों और महलों में बाहरी और आन्तरिक कला में संनादी सम्बंध स्थापित किया।George L. Hersey, Architecture and Geometry in the Age of the Baroque, p 11-12 and p37-51.
विरोधाभास
प्रथमदृष्टया यह श्रेणी सहज नहीं लगती क्योंकि यह एक अपसारी श्रेणी है बल्कि इसका n वाँ पद जब n अनन्त की ओर अग्रसर है, शून्य की ओर अग्रसर होता है। हरात्मक श्रेणी का अपसरण विरोधाभास का एक स्पष्ट उदाहरण है। इसका एक उदाहरण रबर के फिते पर कीड़ा है।Graham Ronald Ronald Graham Knuth Donald E. Donald Knuth Patashnik Oren Oren Patashnik Concrete Mathematics Addison-Wesley 2nd 978-0-201-55802-9 1989 258–264 माना कि एक कीड़ा एक मीटर लम्बे रबर के फीते पर मंद गति से चलता है, प्रत्येक एक मिनट पश्चात रबर का फीता समरूप एक मीटर खींच कर लम्बा हो जाता है। यदि कीड़ा एक सेमी प्रति मिनट की दर से रेंगता है, क्या कीड़ा फीते के दूसरे सिरे पर कभी नहीं पहुँगा पायेगा? लेकिन उत्तर एकदम विपरित "हाँ" होगा, n मिनट पश्चात कीड़े द्वारा तय दूरी और फीते की कुल लम्बाई का अनुपात निम्न होगा:
क्योंकि श्रेणी का मान स्वेच्छ रूप से बढ़ता है जैसे जैसे n का मान बढता है, अतः यह अनुपात एक से अधिक भी होना चाहिए जिससे सिद्ध होता है कि कीड़ा फीते के अन्त तक पहुँच जायेगा। यह घटना घटित होने में लगने वाला समय अर्थात n का मान अधिक हो सकता है, तथापि, लगभग e100 अथवा 1040 से भी अधिक। यद्दपि हरात्मक श्रेणी अपसारी है अतः यह इतना धीमें होता है।
अपसरण
हरात्मक श्रेणी के अपसारी होने के अनेक परिणाम उपलब्द्ध हैं जिनमें से दो यहाँ दिए गए हैं।
तुलना परीक्षण
इसे अपसारी सिद्ध करने का प्रथम तरीका इसे किसी अन्य अपसारी श्रेणी के साथ तुलना करने का है
हरात्मक श्रेणी का प्रत्येक पद इससे तुलना की गई श्रेणी के प्रत्येक पद से बड़ा अथवा बराबर है अतः हरात्मक श्रेणी का संकलन (योग) भी द्वितीय श्रेणी के योग से अधिक होगा। यद्दपि द्वितीय श्रेणी का कुल योग अनन्त है:
इससे सिद्ध होता है कि हरात्मक श्रेणी का योग भी अनन्त होना चाहिए। दूसरे शब्दों में उपरोक्त तुलना से सिद्ध होता है कि
जहाँ k एक धनात्मक पूर्णांक है।
समाकलन परीक्षण
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यह सिद्ध करना सम्भव है कि हरात्मक श्रेणी के संकलन को इसकी तुलनात्मक श्रेणी के अनन्त समाकल से तुलना करने पर अपसारी प्राप्त होती है। विशेष रूप से, माना चित्र में प्रदर्शित आयतों में प्रदर्शित तर्कों को सही हैं। प्रत्येक आयत की चौड़ाई एक इकाई और और ऊँचाई 1/n इकाई है, अतः सभी आयतों का कुल क्षेत्रफल, हरात्मक श्रेणी के कुल योग के बराबर होगा:
सभी आयतों का कुल क्षेत्रफल
यद्दपि, वक्र y= 1/x के नीचे 1 से अनन्त तक का क्षेत्रफल निम्न प्रकार है:
वक्र के नीचे का क्षेत्रफल
चूंकि यह क्षेत्रफल पूर्णतया आयत के अन्दर स्थित है अतः
अपसरण की दर
हरात्मक श्रेणी बहुत मंद रूप से अपसारी है। उदाहरण के लिए, इसके प्रथम 1043 पदों का योग 100 से कम है।Ed Sandifer, How Euler Did It -- Estimating the Basel problem (2003) यह इसलिए कि श्रेणी का आंशिक संकलन में लघुगणकीय वृद्धि होती है।
जहाँ ऑयलर मस्चेरोनि नियतांक (Euler–Mascheroni constant) (कृपया सही हिन्दी उच्चारण लिखें) और के शून्य की तरफ अग्रसर होने पर ~ अनन्त की ओर अग्रसर होता है। लियोनार्ड ऑयलर के अनुसार
आंशिक संकलन
अपसारी हरात्मक श्रेणी का nवाँ आंशिक संकलन
को nवीं हरात्मक संख्या कहा जाता है।
ये भी देखें
सम्मिश्र लघुगणक
रीमान परिकल्पना
हरात्मक श्रेढ़ी
सन्दर्भ
30em
बाहरी कड़ियाँ
हरात्मक श्रेणी (Harmonic series) p/h046540
"The Harmonic Series Diverges Again and Again", The AMATYC Review, 27 (2006), pp. 31–43. Many proofs of divergence of harmonic series.
हरात्मक श्रेणी (Harmonic Series) HarmonicSeries
Use Of The Zonal Harmonic Series For Obtaining Numerical Solutions To Electromagnetic Boundary Value Problems; Proceedings Of Thru-The-Earth Electromagnetics Workshop
श्रेणी:अपसारी श्रेणी