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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र

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हिन्दू धर्म आदि शंकराचार्य संस्कृत महिषासुर का वध करती हुई दुर्गा की पेंटिंग, अनंत शिवाजी देसाई, रवि वर्मा प्रेस File:Durga Mahishasura-mardini, the slayer of the buffalo demon.jpg 21 महिषासुर मर्दिनि स्तोत्रम् महिषासुर मर्दिनि स्तोत्रम् एक हिंदू स्तोत्र है। जो 21 छंदों से युक्त है,Narayan Jay https://books.google.com/books?id=A1-5EAAAQBAJ&newbks=0&printsec=frontcover&pg=PA156&dq=mahishasura+mardini+stotra&hl=en Namaste: An Illustrated Guide to the Hindu Way of Life 2023-04-17 JL Samskritam Publications 978-1-3999-5295-8 156 enइस स्त्रोत में माँ भगवती के कार्य अथवा सर्वोच्च देवी महादेवी का एक प्रमुख पहलू और उनके स्वरूपों का वर्णन है और असुर महिषासुर का संघार के कारण भक्तो द्वारा उनका गुणगान करने के लिए इसका पाठ किया जाता है।Flueckiger Joyce Burkhalter https://books.google.com/books?id=0inWBgAAQBAJ&newbks=0&printsec=frontcover&pg=PA28&dq&hl=en Everyday Hinduism 2015-05-06 John Wiley & Sons 978-1-4051-6021-6 28 enJones Constance https://books.google.com/books?id=OgMmceadQ3gC&newbks=0&printsec=frontcover&pg=PA139&dq&hl=en Encyclopedia of Hinduism Ryan James D. 2006 Infobase Publishing 978-0-8160-7564-5 139 en व्युत्पत्ति महिषासुरमर्दिनी दुर्गा का एक विशेषण है, जिसका शाब्दिक अर्थ है, "राक्षस महिष का वध करने वाली",Balkaran Raj https://books.google.com/books?id=48xmDwAAQBAJ&newbks=0&printsec=frontcover&pg=PT212&dq&hl=en The Goddess and the King in Indian Myth: Ring Composition, Royal Power and The Dharmic Double Helix 2018-07-27 Routledge 978-0-429-88068-1 212 enऔर स्तोत्र एक स्तुतिात्मक कार्य है। विवरण महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र के रचयिता का श्रेय धर्मशास्त्री आदि शंकराचार्य को दिया जाता है। यह भजन देवी महात्म्य पाठ पर आधारित है,Campos Ricardo https://books.google.com/books?id=wixQBwAAQBAJ&newbks=0&printsec=frontcover&pg=PA121&dq&hl=en Popular and Visual Culture: Design, Circulation and Consumption Pinho Rúben Sarmento Clara 2014-10-02 Cambridge Scholars Publishing 978-1-4438-6831-0 121 enजिसमें देवी दुर्गा की कई किंवदंतियों का संदर्भ दिया गया है जैसे कि महिषासुर, रक्तबीज, साथ ही चंड और मुंड का वध, साथ ही आम तौर पर उनके गुणों की प्रशंसा की गई है।Marlow Chris https://books.google.com/books?id=ZFvTDwAAQBAJ&newbks=0&printsec=frontcover&pg=PA168&dq&hl=en Navaratri: Prayers, Praises and Hymns 2019-10-29 Lulu.com 978-0-244-22986-3 168 en देवी महात्म्य के अनुसार, महिषासुर वध नामक पौराणिक कथा में,Srivastava Dr Vishnulok Bihari https://books.google.com/books?id=eaCbv1NcbHwC&newbks=0&printsec=frontcover&dq=pg%3DPT173&hl=en Dictionary of Indology Srivastava Vishnulok Bihari 2009 Pustak Mahal 978-81-223-1084-9 173 enमहिषासुर के नेतृत्व में असुरों द्वारा देवताओं को निष्कासित करने और स्वर्ग पर कब्ज़ा करने से क्रोधित होकर, देवताओं ब्रह्मा, विष्णु और शिव की त्रिमूर्ति (सर्वोच्च त्रिमूर्ति) ने अपनी ऊर्जाओं को संयोजित किया, जिससे दुर्गा नामक देवी का रूप धारण किया। देवताओं के हथियारों और गुणों से लैस, दुर्गा ने आकार बदलने वाले महिषासुर को मार डाला, जिसने शेर, हाथी, भैंस और अंत में एक आदमी का रूप धारण किया। उन्हें देवताओं द्वारा आदिम प्राणी और वेदों की उत्पत्ति के रूप में महिमामंडित किया गया था। उनके भजनों से प्रसन्न होकर, देवी ने देवताओं को खतरे का सामना करने पर मुक्ति का वादा किया।McDaniel June https://books.google.com/books?id=rHs8DwAAQBAJ&newbks=0&printsec=frontcover&pg=PA215&dq&hl=en Offering Flowers, Feeding Skulls: Popular Goddess Worship in West Bengal 2004-08-05 Oxford University Press, USA 978-0-19-516790-0 215 enhttps://books.google.com/books?id=kkC1DwAAQBAJ&newbks=0&printsec=frontcover&pg=PT377&dq&hl=en The Markandeya Purana 2019-10-24 Penguin Random House India Private Limited 978-93-5305-671-1 377 en पाठ महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ इस प्रकार है- :https://timesofindia.indiatimes.com/astrology/zodiacs-astrology/exploring-the-power-of-mahishasura-mardini-stotram/articleshow/104419152.cms Exploring the power of Mahishasura Mardini Stotram द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया Oct 14, 2023 अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते । भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१॥ सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते । दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥२॥ अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते । मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥३॥ अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपते रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते । निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥४॥ अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते । दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥५॥ अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे । दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥६॥ अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते । शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥७॥ धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके । कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥८॥ सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते । धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर मृदंग निनादरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥९॥ जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते । नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१०॥ अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते । सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥११॥ सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते । शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१२॥ अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपते त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते । अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१३॥ कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले । अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१४॥ करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते । निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१५॥ कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचे प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१६॥ विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते कृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते । सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते । जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१७॥ पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे अयि कमले कमलानिलये कमलानिलय: स कथं न भवेत् । तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१८॥ कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम् भजति स किं न शचीकुचकुम्भतटीपरिरम्भसुखानुभवम् । तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम् जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१९॥ तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते । मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥२०॥ अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते । यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥२१॥ इति श्री आदि शंकराचार्यकृतं महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र सम्पूर्णम्। सन्दर्भ श्रेणी:शाक्त सम्प्रदाय श्रेणी:हिन्दू मंत्र