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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

महीप सिंह

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डॉ महीप सिंह (15 अगस्त, 1930 - 24 नवम्बर, 2015) हिन्दी के प्रसिद्ध लेखक, स्तम्भकार और पत्रकार थे। उन्हें २००९ का भारत भारती सम्मान प्रदान किया गया था। वह विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में राष्ट्रीय मसलों पर लेख भी लिखते थे। उन्होंने करीब 125 कहानियां और कई उपन्यास भी लिखे थे। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्राध्यापक रहे। उन्हें ६० के दशक में हिन्दी साहित्य जगत में संचेतन कहानी के आन्दोलन की शुरुआत करने के लिए जाना जाता है।प्रसिद्ध हिन्दी लेखक डॉ महीप सिंह का निधनजून 2020 InternetArchiveBot जीवन परिचय महीपसिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले एक गांव में 15 अगस्त, 1930 को हुआ था।https://www.prabhatkhabar.com/news/columns/story/624204.html डॉ महीप सिंह का जाना 21 अक्तूबर 2018 https://web.archive.org/web/20181021190827/https://www.prabhatkhabar.com/news/columns/story/624204.html 21 अक्तूबर 2018 dead उनके पिता कुछ वर्ष पहले ही सराय आलमगीर (जिला गुजरान, पश्चिमी पाकिस्तान) से आकर उन्नाव में बस गए थे। उन्होने डी.ए.वी. कॉलेज, कानपुर से एम.ए। हिन्दी और आगरा विश्वविद्यालय से पी॰एच॰डी॰ की। खालसा कॉलेज, मुम्बई एवं खालसा कॉलेज, दिल्ली में अध्यापन सहित कन्साई विश्वविद्यालय, हीराकाता (जापान) में विजिटिंग प्रोफेसर रहे। शिक्षा मंत्रालय, हिन्दी संस्थान, हिन्दी व पंजाबी अकादमी, भाषा विभाग (पंजाब) सहित कई संस्थाओं से सम्मानित। 'पत्रिका' (दूरदर्शन) का अनेक वर्ष संयोजन। धारावाहिक 'लोक-लोक की बात' और 'रिश्ते' प्रसारित। कई देशों की साहित्यिक यात्राएं। पत्रिका 'संचेतना' का संपादन। कृतियाँ कहानी-संग्रह 'सुबह के फूल', 'उजाले के उल्लू', 'एक लड़की शोभा', 'घिराव', 'कुछ और कितना', 'कितने संबंध' 'धूप की उंगलियों के निशान', दिल्ली कहां है'चर्चित कहानियां', 'मेरी प्रिय कहानियां', 'इक्यावन कहानियां' कील, कछुए, पारदर्शक, युद्ध मन, स्वारघाट, पानी और पुल आदि। उपन्यास 'यह भी नहीं', 'अभी शेष है' , 'बीच की धूप', 'धूप ढ़लने के बाद' । निबन्ध ‘कुछ सोचा : कुछ समझा’ (निबंध संग्रह), ‘गुरु गोबिंद सिंह और उनकी हिंदी कविता’, ‘आदिग्रंथ में संगृहीत संत कवि’, ‘सिख विचारधारा : गुरु नानक से गुरु ग्रंथ साहिब तक’ (शोधग्रंथ), ‘गुरु गोबिंद सिंह : जीवनी और आदर्श’, ‘गुरु तेगबहादुर : जीवन और आदर्श’, ‘स्वामी विवेकानन्द’ (जीवनी), ‘न इस तरफ’, ‘गुरु नानक जीवन प्रसंग’, ‘एक थी संदूकची’ (बाल सहित्य), ‘सचेतन कहानी : रचना और विचार’, ‘गुरु नानक और उनका काव्य', 'कविता की भूमिका', ‘लेखक और अभिव्यक्‍ति की स्वाधीनता’, ‘हिंदी उपन्यास : समकालीन परिदृश्य’, ‘साहित्य और दलित चेतना’, ‘जापान : साहित्य की झलक’, ‘आधुनिक उर्दू साहित्य। सम्पादन चार दशकों से ‘संचेतना’ का संपादन, विष्णु प्रभाकर : व्यक्‍तित्व और साहित्य’ (संपादित) सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ डॉ महिप सिंह का जाना (प्रभात खबर) गद्यकोश पर डॉ महीप सिंह महीप सिंह जैसा दूजा कहां (दैनिक ट्रिब्यून) महीप सिंह की २१ श्रेष्ठ कहानियां श्रेणी:हिन्दी साहित्यकार श्रेणी:1930 में जन्मे लोग श्रेणी:२०१५ में निधन श्रेणी:उत्तर प्रदेश के लोग