411 REFERENCE · Wikipedia
अभिनंदननाथ
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
चौथे तीर्थंकर thumb|4th Tirthankar of Jainism in the present half time cycle तीर्थंकर अभिनंदननाथ की प्रतिमा संभवनाथ इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय श्री संवर राजा श्री सिद्धार्था देवी १ × १०२२३ वर्ष पूर्व वैशाख शुक्ल षष्ठी विजय नाम के अनुत्तम विमान से माघ शुक्ल द्वादशी अयोध्या माघ शुक्ल द्वादशी अयोध्या पौष शुक्ल १४ अयोध्या वैशाख शुक्ल ७ सम्मेद शिखर स्वर्ण बन्दर ३५० धनुष (१०५० मीटर) ५०,००,००० पूर्व (३५२.८ × १०१८ वर्ष) शाल्मली ईश्वर काली वज्रानाभी १०३ श्री अभिनन्दननाथ भगवान सुमतिनाथ
अभिनन्दननाथ जी वर्तमान काल अवसर्पिणी के चतुर्थ तीर्थंकर हैं।" अभिनदंन जी " https://www.jainismknowledge.com/2020/08/abhinandan-nath-ji.html Jainism Knowledge
जैन धर्म के चौथे तीर्थंकर भगवान अभिनन्दननाथ हैं। भगवान अभिनन्दननाथ जी को अभिनन्दन स्वामी के नाम से भी जाना जाता है।
अभिनन्दननाथ स्वामी का जन्म इक्ष्वाकुवंशी क्षत्रिय परिवार में माघ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को हुआ था। अयोध्या में जन्मे अभिनन्दननाथ जी की माता सिद्धार्था देवी और पिता राजा संवर थे। इनका वर्ण सुवर्ण और चिह्न बंदर था। इनके यक्ष का नाम यक्षेश्वर और यक्षिणी का नाम व्रजशृंखला था। अपने पिता की आज्ञानुसार अभिनन्दननाथ जी ने राज्य का संचालन भी किया। लेकिन जल्द ही उनका सांसारिक जीवन से मोह भंग हो गया।
इन्हें भी देखें
जैन धर्म में भगवान
जैन ब्रह्माण्ड विज्ञान
जी, अभिनंदन
जी, अभिनंदन
सन्दर्भ