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चंदेरी
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चंदेरी Chanderi Chanderi.jpg किला कोठी से चंदेरी का दृश्य चंदेरी India Madhya Pradesh 24.713 78.133 inline, title मध्य प्रदेश में स्थिति देश राज्य मध्य प्रदेश ज़िला अशोक नगर ज़िला तहसील 456 33081 2011 भाषा प्रचलित हिन्दी, बुंदेली भामस +5:30 पिनकोड 473446 दूरभाष कोड 07547 MP-67
चंदेरी (Chanderi) भारत के मध्य प्रदेश राज्य के अशोक नगर ज़िले का एक ऐतिहासिक नगर है। यह इसी नाम की तहसील का मुख्यालय भी है। मालवा और बुन्देलखंड की सीमा पर बसा यह नगर शिवपुरी से १२७ किलोमीटर, ललितपुर से ३७ किलोमीटर और ईसागढ़ से लगभग ४५ किलोमीटर की दूरी पर है। बेतवा नदी के पास बसा चंदेरी पहाड़ी, झीलों और वनों से घिरा एक शांत नगर है, जहां सुकून से कुछ समय गुजारने के लिए लोग आते हैं। खंगार और बुंदेला
राजपूतों और मालवा के सुल्तानों द्वारा बनवाई गई अनेक इमारतें यहां देखी जा सकती है। इस ऐतिहासिक नगर का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। ११वीं शताब्दी में यह नगर एक महत्वपूर्ण सैनिक केंद्र था और प्रमुख व्यापारिक मार्ग भी यहीं से होकर जाते थे। वर्तमान में बुन्देलखंडी शैली में बनी हस्तनिर्मित साड़ियों के लिए चन्देरी काफी चर्चित है। यह प्राचीन जैन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।"Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh https://web.archive.org/web/20190703183559/https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ 3 जुलाई 2019," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172"Tourism in the Economy of Madhya Pradesh," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293Hunter, William Wilson, James Sutherland Cotton, Richard Burn, William Stevenson Meyer, eds. (1909). Imperial Gazetteer of India, vol. 9. Oxford, Clarendon Press.
इतिहास
चंदेरी को चित्तौड़ के राणा सांगा ने सुलतान महमूद खिलजी से जीतकर अपने अधिकार में कर लिया था। लगभग सन् १५२७ में मेदिनी राय नाम के एक राजपूत सरदार ने सम्राट राणा सांगा के सहयोग से चंदेरी में अपनी शक्ति स्थापित की। उस समय तक अवध को छोड़ सभी प्रदेशों पर मुगल शासक बाबर का प्रभुत्व स्थापित हो चुका था। फिर रुद्र प्रताप देव ने इसे जीता और बुन्देला शाशन स्थापित किया व बुन्देलखंड राज्य में शामिल कर लिया। 1857 में यंहा के बुन्देला राजा मर्दनसिंह जूदेव बहादुर ने अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया।
मुख्य आकर्षण
चन्देरी किला
चन्देरी दुर्ग
right|thumb|280px|चन्देरी दुर्ग
अंगूठाकार|281x281पिक्सेल|दरगाह मख़दूम शाह विलायत वजीहुद्दीन यूसुफ़, चंदेरी, 14वीं शताब्दी
यह किला चन्देरी का सबसे प्रमुख आकर्षण है। बुन्देला राजपूत राजाओं द्वारा बनवाया गया यह विशाल किला उनकी स्थापत्य कला की जीवंत मिशाल है। किले के मुख्य द्वार को खूनी दरवाजा कहा जाता है। यह किला पहाड़ी की एक चोटी पर बना हुआ है। यह पहाड़ी की चोटी नगर से 71 मीटर ऊपर है। यह मुगावली से ३८ किलोमीटर मीटर दूर है।
कोशक महल
इस महल को 1445 ई. में मालवा के महमूद खिलजी ने बनवाया था। यह महल चार बराबर हिस्सों में बंटा हुआ है। कहा जाता है कि सुल्तान इस महल को सात खंड का बनवाना चाहता था लेकिन मात्र ३ खंड का ही बनवा सका। महल के हर खंड में बॉलकनी, खिड़कियों की कतारें और छत की गई शानदार नक्कासियां हैं।
परमेश्वर ताल
इस खूबसूरत ताल को बुन्देला राजपूत राजाओं ने बनवाया था। ताल के निकट ही एक मंदिर बना हुआ है। राजपूत राजाओं के तीन स्मारक भी यहां देखे जा सकते हैं। चन्देरी नगर के उत्तर पश्चिम में लगभग आधे मील की दूरी पर यह ताल स्थित है।
ईसागढ़
right|thumb|280px|शिला को काटकर बनायी गयी ४५ फुट ऊँची तीर्थंकर ऋषभनाथ (आदिनाथ) की मूर्ति
चन्देरी से लगभग ४५ किलोमीटर दूर ईसागढ़ तहसील के कडवाया गांव में अनेक खूबसूरत मंदिर बने हुए हैं। इन मंदिरों में एक मंदिर दसवीं शताब्दी में कच्चापगहटा शैली में बना है। मंदिर का गर्भगृह, अंतराल और मंडप मुख्य आकर्षण है। चंदल मठ यहां का अन्य लोकप्रिय और प्राचीन मंदिर है। इस गांव में एक क्षतिग्रस्त बौद्ध मठ भी देखा जा सकता है।
बूढ़ी चन्देरी
ओल्ड चन्देरी सिटी को बूढ़ी नाम से जाना जाता है। 9वीं और 10वीं शताब्दी में बने जैन मंदिर यहां के मुख्य आकर्षण हैं। जिन्हें देखने हेतु हर साल बड़ी संख्या में जैन धर्म के अनुयायी आते हैं।
शहजादी का रोजा
यह स्मारक कुछ अनजान राजकुमारियों को समर्पित है। स्मारक के अंदरूनी हिस्से में शानदार सजावट की गई है। स्मारक की संरचना ज्यामिती से प्रभावित है।
जामा मस्जिद
चन्देरी में बनी जामा मस्जिद मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी मस्जिदों में एक है। मस्जिद के उठे हुए गुंबद और लंबी वीथिका काफी सुंदर हैं।
दरगाह मखदूम शाह विलायत
14वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में चंदेरी चिशती सूफ़ी परम्परा का केंद्र बना। मौलाना वजीहुद्दीन यूसुफ (मृत्यु 729 हिजरी/ 1329 ईस्वी) दिल्ली के शेख़ निज़ामुद्दीन औलिया (1238-1325) के एक प्रसिद्ध शिष्य थे जिन्होंने धार के मौलाना कमालुद्दीन और उज्जैन के मुग़ीसुद्दीन के साथ अध्ययन किया।Arya Gholam-Ali Chishtiyya https://referenceworks.brill.com/display/entries/ISLO/COM-05000088.xml?language=en Encyclopaedia Islamica Online Brill en 2025-01-20 Negahban Translated by Farzin 1325 में मौलाना यूसुफ़ को शेख़ निज़ामुद्दीन के अंगरखे और टोपी के रूप में इजाज़त दी गई और शेख़ के सिलसिले में खलीफ़ा का पद प्राप्त हुआ।Digby Simon 2004 Before Timur Came: Provincialization of the Delhi Sultanate through the Fourteenth Century https://www.jstor.org/stable/pdf/25165052.pdf Journal of the Economic and Social History of the Orient 47.3 298-356 JSTOR स्थानीय रूप से मख़दूम शाह-ए विलायत के रूप में प्रतिष्ठित, इन सूफ़ी संत की पुण्यतिथि (उर्स) हर साल 27 से 29 मार्च को बडी धूम-धाम से मनाई जाती है, जब उनके भक्त चादर चढ़ाने और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करने के लिए दरगाह पर आते हैं।http://dargahinfo.com/Dargah_History.aspx?HID=121 Dargahinfo - Complete Collection of Dargahs World Wide dargahinfo.com 2025-01-20 6 अप्रैल 2025 https://web.archive.org/web/20250406102349/http://dargahinfo.com/Dargah_History.aspx?HID=121 dead इसके अलावा मौलाना वजीहुद्दीन की दरगाह परिसर में एक मस्जिद, एक ख़ानका और कई जाने-माने लोगों की कब्रें है, जिनमें से एक का नाम लिखा मिलता है शेख़ बरकत इब्न नसीब इब्न सिराज जिनका निधन सोमवार 13 मुहर्रम 924 हिजरी (25 जनवरी 1518) को हुआ था।Annual Report on Indian Epigraphy for 1965-66 Gai Govind Swamirao The Director General, Archaeological Survey of India New Delhi Appendix D, no. 117
देवगढ़ किला
चन्देरी से 25 किलोमीटर दूर दक्षिण पूर्व में देवगढ़ किला स्थित है। किले के भीतर 9वीं और 10 वीं शताब्दी में बने जैन मंदिरों का समूह है जिसमें प्राचीन काल की कुछ मूर्तियां देखी जा सकती हैं। किले के निकट ही 5वीं शताब्दी का विष्णु दशावतार मंदिर बना हुआ है, जो अपनी सुंदर मूर्तियों और नक्कासीदार स्तंभों के लिए जाना जाता है।
आवागमन
वायु मार्ग-
ग्वालियर चन्देरी का निकटतम एयरपोर्ट है, जो लगभग 227 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। चन्देरी पहुंचने के लिए यहां से बसों और टैक्सियों की व्यवस्था है।
रेल मार्ग-
अशोक नगर और ललितपुर निकटतम रेलवे स्टेशन हैं। यहां से नियमित अंतराल में बसें चन्देरी के लिए चलती हैं।
सड़क मार्ग-
राष्ट्रीय राजमार्ग 346 यहाँ से गुज़रता है और इसे देशभर से जोड़ता है। राज्य के अधिकांश हिस्सों से सड़क मार्ग के द्वारा चन्देरी पहुंचा जा सकता है। झांसी, ग्वालियर, टीकमगढ़ आदि शहरों से नियमित बसों की सुविधा चन्देरी के लिए उपलब्ध है।
इन्हें भी देखें
बेतवा नदी
अशोक नगर ज़िला
चन्देरी साड़ी
ग्वालियर दुर्ग
बाहरी कड़ियाँ
ऐतिहासिक ही नहीं, वैदिक शहर भी है चंदेरी (प्रभासाक्षी)
बुंदेलखंड दर्शन में चंदेरी का इतिहास
श्री दिगाम्बर हैन अतिशय क्षेत्र चौबीसी बड़ा मन्दिर, चंदेरी
श्री दिगाम्बर हैन अतिशय क्षेत्र चौबीसी बड़ा मन्दिर खंडरगिरि
श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र थुवोंजी
तूमैन
सन्दर्भ
श्रेणी:अशोक नगर ज़िला
श्रेणी:मध्य प्रदेश के शहर
श्रेणी:अशोक नगर ज़िले के नगर
श्रेणी:मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल
श्रेणी:जैन तक्षित-शिला वास्तुकला