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मदन भटनागर
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फ़रवरी 2020
मदन भटनागर का जन्म वर्ष 1931 में मुरार जिला ग्वालियर में हुआ था . मदनजी ने विश्वभारती वि . वि . शांति निकेतन से डिप्लोमा प्राप्त किया . इनकी पहली एकल प्रदर्शनी 1966 में दिल्ली में आयोजित आइफेक्स में हुई . अखिल भारतीय कला प्रदर्शनी , अखिल भारतीय कालिदास मूर्तिकला प्रदर्शनी 59 - 62 , ललित कला अकादमी , नेशनल मार्डन आर्ट गैलरी , जयपुर हाउस व देश - विदेश के निजी संग्रहों में आपकी कलाकृतियाँ संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रही हैं . मदन भटनागर को कालिदास अकादमी सम्मान , ललित कला अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार 1971 ' तथा 45वाँ आइफेक्स समीक्षा पुरस्कार मिल चुका है .मदन भटनागर ऐसे कलाकारों में नाम था जो मूर्तिकला कला में इस नए स्थान की खोज कर रहे थे। 1931 में ग्वालियर में जन्मे, वह रामकिंकर बैज से प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए शान्तिनिकेतन गए, जो भारतीय मूर्तिकला में आधुनिकतावादी आंदोलन को तेज करने में एक निशान था। आधुनिकता की भावना को आत्मसात करने के लिए मदन भटनागर ने अमूर्तता की ओर कदम बढ़ाया। वह हमेशा विभिन्न माध्यमों और सामग्री में अपने प्रयोगों के लिए जाने जाते हैं। एक शिक्षक होने के नाते, उनके प्रयोग हमेशा उनके विद्यार्थियों के लाभ के लिए होते थे। वह ग्वालियर में गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स में मूर्तिकला विभाग खोलने के पीछे प्रेरक शक्ति थे। चाहे वह शिविरों का संगठन हो या कोई अन्य कला गतिविधियाँ, उन्होंने हमेशा अपने छात्रों के साथ काम करते हुए अपना उत्साह दिखाया था। शायद यही कारण था कि युवा मूर्तिकारों का एक बड़ा समूह ग्वालियर से ही उभरा। इनमें रॉबिन डेविड, जया विवेक, अनिल कुमार, ओम प्रकाश खरे और शशिकांत मुंडी जैसे नाम हैं। वे अब भारत के प्रमुख मूर्तिकारों के रूप में सामने आए हैं।