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411 समाचार
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धौलीनाग मंदिर

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धौलीनाग मन्दिर Dhaulinag Temple Dhaulinag 01.jpg खांतोली में धौलीनाग मंदिर India Uttarakhand उत्तराखण्ड में स्थिति 29.8367 N 79.9266 E type:landmark_region:IN-UL inline,title yes उत्तराखण्ड बागेश्वर ज़िला खांतोली धौलीनाग देवता पंचमी, ऋषि पंचमी धौलीनाग मंदिर (Dhaulinag Temple) भारत के उत्तराखण्ड राज्य के बागेश्वर जनपद में धौलीनाग देवता को समर्पित एक पुराना मंदिर है। धौलीनाग मंदिर ग्राम खांतोली के पास एक पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित है। धौलीनाग मंदिर मे रोजाना पूजा होती है और कुछ खास दिनों मे बहुत भीड़-भाड़ होती है, मुख्य रूप से नवरात्रि के दौरान तो यह भक्तों से भरा रहता है। प्रत्येक नाग पंचमी को मंदिर में मेला लगता है। नवंबर २०१६ में उत्तराखण्ड के तत्कालीन मुख्यमंत्री, हरीश रावत ने इस मंदिर को गंगोलीहाट के महाकाली मंदिर और पाताल भुवनेश्वर से पर्यटन सर्किट द्वारा जोड़ने की घोषणा की थी।पर्यटन सर्किट से जुड़ेगा महाकाली मंदिर, पाताल भुवनेश्वर, धौलीनाग https://www.amarujala.com/uttarakhand/pithoragarh/mahakali-temple-will-join-the-tourist-circuit-patal-bhubaneshwar-dulinag २६ फरवरी २०१८ २६ नवंबर २०१६ अमर उजाला गंगोलीहाट https://web.archive.org/web/20180226092148/https://www.amarujala.com/uttarakhand/pithoragarh/mahakali-temple-will-join-the-tourist-circuit-patal-bhubaneshwar-dulinag 26 फ़रवरी 2018 live धौलीनाग देवता thumb|250px|धौलीनग मन्दिर स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने कालियनाग को यमुना छोड़कर चले जाने को कहा था, तो उसने उन्हें बताया कि उनके वाहन गरुड़ के डर के कारण ही वह यमुना में छुपा बैठा था।बद्री दत्त पाण्डेय कुमाऊं का इतिहास 1937 ६२ श्याम प्रकाशन अल्मोड़ा इस पर कृष्ण ने उसके माथे पर एक निशान बनाकर उसे उत्तर में हिमालय की ओर भेज दिया। कालियनाग कुमाऊँ क्षेत्र में आया, तथा शिव की तपस्या करने लगा। स्थानीय लोगों की कई प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा करने पर उसे कुमाऊं क्षेत्र में भगवान का दर्जा दिया जाने लगा। धवल नाग (धौलीनाग) को कालियनाग का सबसे ज्येष्ठ पुत्र माना जाता है।कहानी बागेश्‍वर के धौलीनाग मंदिर की https://aajtak.intoday.in/karyakram/video/-1-11504.html 19 जून 2018 aajtak.intoday.in आजतक hi https://web.archive.org/web/20180619113046/https://aajtak.intoday.in/karyakram/video/-1-11504.html 19 जून 2018 live धवल नाग ने प्रारम्भ में कमस्यार क्षेत्र के लोगों को काफी परेशान किया, जिसके बाद लोगों ने उसकी पूजा करना शुरू कर दिया, ताकि वह उन्हें हानि न पहुंचाए। लोगों के पूजन से उसके स्वभाव पर विपरीत असर पड़ने लगा, और फिर उसने लोगों को तंग करने की जगह उनकी रक्षा करना शुरू कर दिया। महर्षि व्यास जी ने स्कंद पुराण के मानस खण्ड के ८३ वें अध्याय में धौली नाग की महिमा का वर्णन करते हुए लिखा है: धवल नाग नागेश नागकन्या निषेवितम्। प्रसादा तस्य सम्पूज्य विभवं प्राप्नुयात्ररः।।१८/१९ मानस खण्ड ८३यहां स्थित है माता भद्रकाली का प्राचीन मंदिर, दर्शन मात्र से शत्रुओं का नाश https://www.bhopalsamachar.com/2016/10/blog-post_718.html 19 जून 2018 www.bhopalsamachar.com https://web.archive.org/web/20180619113007/https://www.bhopalsamachar.com/2016/10/blog-post_718.html 19 जून 2018 dead कुमाऊँ में नागों के अन्य भी कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनमें छखाता का कर्कोटकनाग मंदिर, दानपुर का वासुकीनाग, सालम के नागदेव तथा पद्मगीर, महार का शेषनाग तथा अठगुली-पुंगराऊँ के बेड़ीनाग, कालीनाग, फेणीनाग, पिंगलनाग, खरहरीनाग तथा अठगुलीनाग अन्य प्रसिद्ध मंदिर हैं।देवीदत्त शर्मा Linguistic history of Uttarākhaṇḍa १९८३ विश्वेश्वरानंद वैदिक रिसर्च इंस्टिट्यूट २४ https://books.google.co.in/books?id=hAIuAAAAMAAJ en 26 फ़रवरी 2018 https://web.archive.org/web/20180226091912/https://books.google.co.in/books?id=hAIuAAAAMAAJ 26 फ़रवरी 2018 live पंचमी मेला पंचमी मेला यहां का एक बहुत प्रसिद्ध और पुराना त्योहार है, जिसमें कांडा-कमस्यार के २२ गांवों के लोगों के अलावा बड़ी संख्या में बाहर से भी लोग आते हैं। लोक मान्यता है कि जब धौलीनाग भगवान इस पहाड़ी में आए तो उन्होंने ग्रामीणों को आवाज देकर अपने पास बुलाया था। आवाज सुनकर रात में ही धपोलासेरा के धपोला लोग २२ हाथ लंबी चीड़ के छिलके से बनी जलती मशाल को हाथ में लेकर मंदिर क्षेत्र में पहुंचे तो वहां पंचमी के नवरात्र पर्व पर एक दिव्यशिला मिली, जिसे उन्होंने शिला को शक्ति रूप में स्थापित कर दिया।धौलीनाग मंदिर पहुंचाई 22 हाथ लंबी मशाल https://www.amarujala.com/uttarakhand/bageshwar/Bageshwar-88445-114 ९ मई २०१८ ५ अक्टूबर २०१४ अमर उजाला बागेश्वर https://web.archive.org/web/20180510050532/https://www.amarujala.com/uttarakhand/bageshwar/Bageshwar-88445-114 10 मई 2018 live तब से ही प्रत्येक वर्ष पंचमी मेला मनाया जाता है। इस मेले के लिए धपोलासेरा के भूल जाति के लोग चीड़ के छिलके की मशाल तैयार करते हैं, जिसे लेकर धपोला लोग गाजे बाजे के साथ मंदिर के लिए निकलते हैं। मंदिर परिसर से कुछ दूरी पर स्थित भगवती मंदिर के पास पहुँचने पर वे पोखरी के चंदोला लोगाें का इंतजार करते हैं, जिनके साथ देव डांगर भी अवतरित होकर गाजे बाजे के साथ मंदिर पहुंचते हैं। यहां से दोनों दल जयकारा करते हुए मंदिर की परिक्रमा करते हैं, और फिर जलती मशाल को मंदिर के सामने रख कर वहां रात्रि भर सांस्कृतिक आयोजन चलते हैं। आवागमन धौलीनाग मंदिर विजयपुर के पास एक पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित है। मंदिर विजयपुर से पैदल दूरी पर है लेकिन छोटी गाड़ियों के लिए, सड़क मार्ग भी बना है। इसके अतिरिक्त बिगुल की तरफ से भी मंदिर के लिए एक पैदल रास्ता है, जिसे मोटर मार्ग में बदला जा रहा है।बिगुल- धौलीनाग मंदिर मोटर मार्ग निर्माण शुरू https://www.jagran.com/uttarakhand/bageshwar-14169200.html 19 जून 2018 Dainik Jagran hi https://web.archive.org/web/20180619113306/https://www.jagran.com/uttarakhand/bageshwar-14169200.html 19 जून 2018 live पोखरी, खांतोली ग्रामों की ओर से भी जंगलों से होकर एक कच्चा रास्ता आता है, जिसपर बंजायण, मूलनारायण इत्यादि देवों को समर्पित मंदिर स्थित हैं। इन्हें भी देखें विजयपुर, उत्तराखण्ड बागेश्वर ज़िला सन्दर्भ श्रेणी:उत्तराखण्ड में हिन्दू मन्दिर श्रेणी:बागेश्वर जिला