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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

संकेतन सिद्धान्त

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मार्च 2025 thumb|रैखिक त्रुटि का द्वि-आयामी दृश्य, संकेतन सिद्धांत में एक महत्वपूर्ण उपाय संकेतन सिद्धान्त (coding theory) संकेत के गुणों और विशिष्ट अनुप्रयोगों का विश्लेषणात्मक अध्ययन है। इसका उपयोग स्रोत संकेतन, रेखीय संकेतन, त्रुटि नियंत्रण संबंधित विषयों का पता लगाने और लिए किया जाता है। संकेतन सिद्धान्त विभिन्न वैज्ञानिक विषयों का मिश्रण है। इसका अध्ययन सूचना सिद्धांत, विद्युत अभियान्त्रिकी, गणित, भाषा विज्ञान विधियों की बनावट उद्देश्य से किया जाता है। इसका प्रयोग आम तौर पर प्रेषित आंकड़ों में त्रुटियों का पता लगाने के लिए किया जाता है ताकि इसे अधिक कुशलता से प्रसारित किया जा सके। इतिहास जुलाई 1948 ई॰ में क्लाउड ई॰ शैनन ने अपनी पत्रिका संचार का गणितीय सिद्धांत (ए मैथमेटिकल थ्योरी ऑफ कम्युनिकेशन) में "संकेतन सिद्धांत की नींव रखी और इसे वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया। इस पत्रिका मे स्रोत संकेतन, संचार और सूचना को समझने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के विकास की दिशा निर्धारित की। शैनन के इस योगदान ने आज के डिजिटल युग की आधारशिला रखी। प्रकार संकेतन के चार प्रकार हैं:—जेम्स इरविन डेविड हार्ले https://books.google.com/books?id=ZigejECe4r0C आंकड़ा संचार तंत्र 2002 18 जॉन विली एंड संस 2.4.संकेतन के चार प्रकार संकेतन चार प्रकार की होती है 9780471808725 स्रोत संकेतन, त्रुटि नियंत्रण, रेखीय संकेतन बीज संकेतन।Handbook of Theoretical Computer Science रिवेस्ट रोनाल्ड एल॰ एल्सेवियर 1990 जे॰ वान लीउवेन 1 en सैद्धांतिक कंप्यूटर विज्ञान की पुस्तिका Cryptology कूटलिपि शास्त्र रॉन रिवेस्ट संकेतन सिद्धांत के अन्य अनुप्रयोग संकेतों की बनावट इस प्रकार किया जाता है कि इसका प्रयोग सरल तरीके से किये बदलाव को पहचानाजा सके और बची हुई थी त्रुटियों को ठीक किया जा सके। इस प्रक्रिया में, एक ही तंत्र पर कई संकेत भेजने की क्षमता भी होती है, जिससे संचार की दक्षता और विश्वसनीयता बढ़ती है। सन्दर्भ श्रेणी: गणित