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सौर मण्डल

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सौर मंडल सौर मंडल का मुख्य रूप - 8 ग्रह, 1 बौना ग्रह, क्षुद्रग्रह पट्टी तथा एक धूमकेतू को दर्शाता हुआ (पैमाने के अनुसार नहीं)। 4.568 अरब वर्ष स्थानीय अंतरतारकीय बादल, स्थानीय बुलबुला, शिकारी-हन्स भुजा, दुग्ध मेखला आकाशगंगा 1.0014 सौर द्रव्यमान प्रॉक्सिमा सेन्टॉरी (4.22 प्रकाश वर्ष), मित्र तारा प्रणाली (4.37 प्रकाश वर्ष) ऍप्सिलन ऍरिडानी तारा प्रणाली (10.49 प्रकाश वर्ष) 4.503 अरब किलोमीटर (30.10 ख० इ०) 50 ख० इ० 1 8 5 (दर्जनों से अधिक की पुष्टि का इन्तजार) 525 (185 ग्रहीयHow Many Solar System Bodies NASA/JPL Solar System Dynamics http://ssd.jpl.nasa.gov/?body_count 20 April 2018 https://web.archive.org/web/20170703094608/https://ssd.jpl.nasa.gov/?body_count 3 जुलाई 2017 live और 347 हीन ग्रहीय12 April 2018 Johnston http://www.johnstonsarchive.net/astro/asteroidmoons.html 20 April 2018 https://www.webcitation.org/66H5ic5WN?url=http://www.johnstonsarchive.net/astro/asteroidmoons.html 19 मार्च 2012 live ) 7,78,897 (21 जून 2018 तक) 4,017 (21 जून 2018 तक)https://minorplanetcenter.net/mpc/summary Latest Published Data The International Astronomical Union Minor Planet Center 20 जनवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190305034947/https://minorplanetcenter.net/mpc/summary 5 मार्च 2019 live 19 60.19° (क्रांतिवृत्त) 27,000±1,000 प्रकाश वर्ष 220 किलोमीटर प्रति सेकंड 2.25–2.50 अरब वर्ष G2V ≈5 ख० इ० Mumma M.J. Disanti M.A. Dello Russo N. Magee-Sauer K. Gibb E. Novak R. 10.1016/S0273-1177(03)00578-7 Remote infrared observations of parent volatiles in comets: A window on the early solar system https://archive.org/details/sim_advances-in-space-research_2003-06_31_12/page/2563 Advances in Space Research 31 12 2563–2575 2003 2003AdSpR..31.2563M 10.1.1.575.5091 0273-1177 ≈120 ख० इ० ≈1–2 प्रकाश वर्ष हाँ हाँ वरुण अंगूठाकार|500px|सौर मंडल में सूर्य और ग्रहीय मण्डल सौर मंडल में सूर्य और वह खगोलीय वस्तुएँ सम्मिलित हैं, जो इस मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे हैं। किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को ग्रहीय मण्डल कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल।p. 394, The Universal Book of Astronomy, from the Andromeda Galaxy to the Zone of Avoidance, David J. Dsrling, Hoboken, New Jersey: Wiley, 2004. ISBN 0471265691.p. 314, Collins Dictionary of Astronomy, Valerie Illingworth, London: Collins, 2000. ISBN 0-00-710297-6. हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है।p. 382, Collins Dictionary of Astronomy.p. 420, A Dictionary of Astronomy, Ian Ridpath, Oxford, New York: Oxford University Press, 2003. ISBN 0-19-860513-7. इन पिंडों में आठ ग्रह, उनके 172 ज्ञात उपग्रह, पाँच बौना ग्रह और अरबों छोटे पिंड शामिल हैं। सौर परिवार खोज और अन्वेषण कुछ उल्लेखनीय अपवादों को छोड़ कर, मानवता को सौर मण्डल का अस्तित्व जानने में कई हजार वर्ष लग गए। बाइबल के अनुसार पृथ्वी, ब्रह्माण्ड का स्थिर केंद्र है और आकाश में घूमने वाली दिव्य या वायव्य वस्तुओं से स्पष्ट रूप में अलग है। लेकिन 140 इ. में क्लाडियस टॉलमी ने बताया (जेओसेंट्रिक अवधारणा के अनुसार) की पृथ्वी ब्रह्माण्ड के केंद्र में है और सारे ग्रह पिंड इसकी परिक्रमा करते हैं लेकिन  कॉपरनिकस ने १५३० में बताया की सूर्य ब्रह्माण्ड के केंद्र में है और सारे ग्रह पिंड इसकी परिक्रमा करते हैं। Solar-System.pdf 900px सूर्य, ग्रह और उनके उपग्रहvbfxxm संरचना और संयोजन सौरमंडल सूर्य और उसकी परिक्रमा करते ग्रह, क्षुद्रग्रह और धूमकेतुओं से बना है। इसके केन्द्र में सूर्य है और सबसे बाहरी सीमा पर वरुण (ग्रह) है। वरुण के परे यम (प्लुटो) जैसे बौने ग्रहो के अतिरिक्त धूमकेतु भी आते है। Solarsystemobjectsinscale.jpg 5000px सूर्य और ग्रहों के बीच की दूरी. धरती की आयु सौर मंडल के अधिकांश ग्रहों की अपनी खुद की माध्यमिक प्रणाली है, जो प्राकृतिक उपग्रहों, या चंद्रमाओं (जिनमें से दो, टाइटन और गैनिमीड, बुध ग्रह से बड़े हैं) द्वारा परिक्रमा की जा रही है, तथा बाहरी ग्रहों के मामले में, ग्रहों के छल्लों द्वारा, छोटे कणों के पतले बैंड जो उन्हें एक साथ कक्षा में स्थापित करते हैं। अधिकांश सबसे बड़े प्राकृतिक उपग्रह समकालिक घूर्णन में हैं, जिनमें से एक चेहरा स्थायी रूप से अपने मूल ग्रह की ओर ही रहता है। right horizontal 140 137 Ecliptic plane 3d view.gif Solarsystem3DJupiter.gif सौर मंडल के सभी ग्रह अण्डाकार कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करते हैं। जो सूर्य के जितने करीब हैं, वे उतनी ही तेजी से यात्रा करते हैं। सूर्य (sun) सूर्य सूर्य अथवा सूरज सौर मंडल के केन्द्र में स्थित एक G श्रेणी का मुख्य-अनुक्रम तारा है जिसके इर्द-गिर्द पृथ्वी और सौरमंडल के अन्य अवयव घूमते हैं। सूर्य हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा पिंड है, जिसमें हमारे पूरे सौर मंडल का ९९.८६% द्रव्यमान निहित है और उसका व्यास लगभग १३ लाख ९० हज़ार किलोमीटर है, जो पृथ्वी से लगभग १०९ गुना अधिक है। http://www.bbc.co.uk/hindi/news/story/2006/10/061007_askus_sun_earth.shtml सूर्य और पृथ्वी के बीच फ़ासला ९ फ़रवरी २००९ बीबीसी हिंदी https://web.archive.org/web/20061128063752/http://www.bbc.co.uk/hindi/news/story/2006/10/061007_askus_sun_earth.shtml 28 नवंबर 2006 live thumb|upright=1.5|आदिग्रह चक्र thumb|left|सूर्य तथा अन्य ग्रहों के आकार में अंतर ऊर्जा का यह शक्तिशाली भंडार मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों का एक विशाल गोला है। परमाणु विलय की प्रक्रिया द्वारा सूर्य अपने केंद्र में ऊर्जा पैदा करता है। सूर्य से निकली ऊर्जा का छोटा सा भाग ही पृथ्वी पर पहुँचता है जिसमें से १५ प्रतिशत अंतरिक्ष में परावर्तित हो जाता है, ३० प्रतिशत पानी को भाप बनाने में काम आता है और बहुत सी ऊर्जा पेड़-पौधे समुद्र सोख लेते हैं। सौर वायु सौर वायु सौरमंडल सौर वायु द्वारा बनाए गए एक बड़े बुलबुले से घिरा हुआ है जिसे हीलीयोस्फियर कहते है। इस बुलबुले के अंदर सभी पदार्थ सूर्य द्वारा उत्सर्जित हैं। अत्यंत ज़्यादा उर्जा वाले कण इस बुलबुले के अंदर हीलीयोस्फीयर के बाहर से प्रवेश कर सकते है। किसी तारे के बाहरी वातावरण द्वारा उत्सर्जन किए गए आवेशित कणों की धारा को सौर वायु कहते हैं। सौर वायु विशेषकर अत्यधिक उर्जा वाले इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन से बनी होती है, इनकी उर्जा किसी तारे के गुरुत्व प्रभाव से बाहर जाने के लिए पर्याप्त होती है। सौर वायु सूर्य से हर दिशा में प्रवाहित होती है जिसकी गति कुछ सौ किलोमीटर प्रति सेकंड होती है। सूर्य के सन्दर्भ में इसे सौर वायु कहते है, अन्य तारों के सन्दर्भ में इसे ब्रह्माण्ड वायु कहते है। यम (बौना ग्रह) से काफी बाहर सौर वायु खगोलीय माध्यम (जो हाइड्रोजन और हिलीयम से बना हुआ है) के प्रभाव से धीमी हो जाती है। यह प्रक्रिया कुछ चरणों में होती है। खगोलीय माध्यम और सारे ब्रह्माण्ड में फैला हुआ है। यह एक अत्यधिक कम घनत्व वाला माध्यम है। सौर वायु सुपर सोनिक गति से धीमी होकर सब-सोनिक गति में आने वाले चरण को टर्मीनेशन शॉक (Termination Shock) या समाप्ती सदमा कहते है। सब-सोनिक गति पर सौर वायु खगोलीय माध्यम के प्रवाह के प्रभाव में आने से दबाव होता है जिससे सौर वायु धूमकेतु की पुंछ जैसी आकृती बनाती है जिसे हीलिओसिथ (Helioseath) कहते है। हीलिओसिथ की बाहरी सतह जहां हीलीयोस्फियर खगोलीय माध्यम से मिलता है हीलीयोपाज (Heliopause) कहलाती है। हीलीओपाज क्षेत्र सूर्य के आकाशगंगा के केन्द्र की परिक्रमा के दौरान खगोलीय माध्यम में एक हलचल उत्पन्न करता है। यह खलबली वाला क्षेत्र जो हीलीओपाज के बाहर है बो-शाक (Bow Shock) या धनु सदमा कहलाता है। ग्रहीय मण्डल ग्रहीय मण्डल उसी प्रक्रिया से बनते हैं जिस से तारों की सृष्टि होती है। आधुनिक खगोलशास्त्र में माना जाता है की जब अंतरिक्ष में कोई अणुओं का बादल गुरुत्वाकर्षण से सिमटने लगता है तो वह किसी तारे के इर्द-गिर्द एक आदिग्रह चक्र (प्रोटोप्लैनॅटेरी डिस्क) बना देता है। पहले अणु जमा होकर धूल के कण बना देते हैं, फिर कण मिलकर डले बन जाते हैं। गुरुत्वाकर्षण के लगातार प्रभाव से, इन डलों में टकराव और जमावड़े होते रहते हैं और धीरे-धीरे मलबे के बड़े-बड़े टुकड़े बन जाते हैं जो वक़्त के साथ-साथ ग्रहों, उपग्रहों और अलग वस्तुओं का रूप धारण कर लेते हैं।planetary systems, formation of https://web.archive.org/web/20110604073053/http://www.daviddarling.info/encyclopedia/P/plansysform.html 4 जून 2011 , David Darling, The Internet Encyclopedia of Science जो वस्तुएँ बड़ी होती हैं उनका गुरुत्वाकर्षण ताक़तवर होता है और वे अपने-आप को सिकोड़कर एक गोले का आकार धारण कर लेती हैं। किसी ग्रहीय मण्डल के सृजन के पहले चरणों में यह ग्रह और उपग्रह कभी-कभी आपस में टकरा भी जाते हैं, जिससे कभी तो वह खंडित हो जाते हैं और कभी जुड़कर और बड़े हो जाते हैं। माना जाता है के हमारी पृथ्वी के साथ एक मंगल ग्रह जितनी बड़ी वस्तु का भयंकर टकराव हुआ, जिस से पृथ्वी का बड़ा सा सतही हिस्सा उखाड़कर पृथ्वी के इर्द-गिर्द परिक्रमा में चला गया और धीरे-धीरे जुड़कर हमारा चन्द्रमा बन गया। स्थलीय ग्रह सूर्य से उनकी दूरी के क्रम में आठ ग्रह हैं: बुध (Mercury) thumb|right|मैसेन्जर द्वारा प्रसारित बुध की पहली उच्च रिज़ॉल्यूशन छवि (कृत्रिम रंग) बुध सौर मंडल का सूर्य से सबसे निकट स्थित और आकार में सबसे छोटा ग्रह है। यम (प्लूटो) को पहले सबसे छोटा ग्रह माना जाता था पर अब इसका वर्गीकरण बौना ग्रह के रूप में किया जाता है। यह सूर्य की एक परिक्रमा करने में ८८ दिन लगाता है। यह लोहे और जस्ते का बना हुआ हैं। यह अपने परिक्रमा पथ पर २९ मील प्रति क्षण की गति से चक्कर लगाता है। बुध सूर्य के सबसे पास का ग्रह है और द्रव्यमान से आंठवे क्रमांक पर है। बुध व्यास से गैनिमीड और टाईटन चण्द्रमाओ से छोटा है लेकिन द्रव्यमान में दूगना है। इसका एक भी उपग्रह नही हैं ग्रहपथ : ५७,९१०,००० किमी (०.३८ AU) सूर्य से व्यास : ४८८० किमी द्रव्यमान : ३.३०e२३ किग्रा यहां दिन अति गर्म हो राते बर्फीली होती है इसका तापांतर सभी ग्रहों में सबसे अधिक 600 डिग्री सेल्सियस है इसका तापमान रात में -173 डिग्री है वह दिन में 427 डिग्री हो जाता है शुक्र (Venus) thumb|right|100px|प्राकृतिक रंगो में शुक्र। शुक्र सूर्य से दूसरा ग्रह है और छठंवा सबसे बड़ा ग्रह है। इसका परिक्रमा पथ 108¸200¸000 किलोमीटर लम्बा है। इसका व्यास 12¸103•6 किलोमीटर है। शुक्र सौर मंडल का सबसे गरम ग्रह है। शुक्र का आकार और बनाबट लगभग पृथ्वी के बराबर है। इसलिए शुक्र को पृथ्वी की बहन कहा जाता है। ग्रहपथ :0.72 AU या 108,200,000 किमी (सूर्य से)। शुक्र शुक्र की ग्रहपथ लगभग पूर्ण वृत्त है। व्यास : 12,103.6 किमी द्रव्यमान : 4.869e24 किग्रा है। यह विपरीत दिशा में घूमता रहता है || पृथ्वी (Earth) 50px|left| पृथ्वी पृथ्वी बुध और शुक्र के बाद सुर्य से तीसरा ग्रह है। आतंरिक ग्रहों में ये सबसे बड़ा ग्रह है तथा पूरी मालूम कायानात में धरती एकलौता ग्रह है जहाँ पर ज़िन्दगी है। सुर्य से पृथ्वी की औसत दूरी को खगोलीय इकाई कहते हैं। ये लगभग 15 करोड़ किलोमीटर है।thumb|पृथ्वी ये दूरी वासयोग्य क्षेत्र में है। किसी भी सितारे के गिर्द ये एक ख़ास ज़ोन होता है, जिस में ज़मीन की सतह के उपर का पानी तरल अवस्था में रहता है। इसे नीला ग्रह भी कहते है॑। इसका व्यास 12756 km है तथा इसके धुविए व्यास 12714 km है मंगल (Mars) 50px|left मंगल सौरमंडल में सूर्य से चौथा ग्रह है। पृथ्वी से इसकी आभा रक्तिम दिखती है, जिस वजह से इसे "लाल ग्रह" के नाम से भी जाना जाता है। सौरमंडल के ग्रह दो तरह के होते हैं - "स्थलीय ग्रह" जिनमें ज़मीन होती है और "गैसीय ग्रह" जिनमें अधिकतर गैस ही गैस है। पृथ्वी की तरह, मंगल भी एक स्थलीय धरातल वाला ग्रह है। इसका वातावरण विरल है। इसकी सतह देखने पर चंद्रमा के गर्त और पृथ्वी के ज्वालामुखियों, घाटियों, रेगिस्तान और ध्रुवीय बर्फीली चोटियों की याद दिलाती है। हमारे सौरमंडल का सबसे अधिक ऊँचा पर्वत, ओलम्पस मोन्स मंगल पर ही स्थित है।thumb|मंगल साथ ही विशालतम कैन्यन वैलेस मैरीनेरिस भी यहीं पर स्थित है। अपनी भौगोलिक विशेषताओं के अलावा, मंगल का घूर्णन काल और मौसमी चक्र पृथ्वी के समान हैं। 1966 में मेरिनर ४ के द्वारा की पहली मंगल उडान से पहले तक यह माना जाता था कि ग्रह की सतह पर तरल अवस्था में जल हो सकता है। यह हल्के और गहरे रंग के धब्बों की आवर्तिक सूचनाओं पर आधारित था विशेष तौर पर, ध्रुवीय अक्षांशों, जो लंबे होने पर समुद्र और महाद्वीपों की तरह दिखते हैं, काले striations की व्याख्या कुछ प्रेक्षकों द्वारा पानी की सिंचाई नहरों के रूप में की गयी है। इन सीधी रेखाओं की मौजूदगी बाद में सिद्ध नहीं हो पायी और ये माना गया कि ये रेखायें मात्र प्रकाशीय भ्रम के अलावा कुछ और नहीं हैं। फिर भी, सौर मंडल के सभी ग्रहों में हमारी पृथ्वी के अलावा, मंगल ग्रह पर जीवन और पानी होने की संभावना सबसे अधिक है। गैसीय ग्रह बृहस्पति (Jupiter) thumb|left|बृहस्पति बृहस्पति सूर्य सेे पांचवाँ और हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। यह एक गैस दानव है जिसका द्रव्यमान सूर्य के हजारवें भाग के बराबर तथा सौरमंडल में मौजूद अन्य सात ग्रहों के कुल द्रव्यमान का ढाई गुना है। बृहस्पति को शनि, युरेनस और नेप्चून के साथ एक गैसीय ग्रह के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इन चारों ग्रहों को बाहरी ग्रहों के रूप में जाना जाता है। यह ग्रह प्राचीन काल से ही खगोलविदों द्वारा जाना जाता रहा है तथा यह कई संस्कृतियों की पौराणिक कथाओं और धार्मिक विश्वासों के साथ जुड़ा हुआ था। रोमन सभ्यता ने अपने देवता जुपिटर के नाम पर इसका नाम रखा था। जब इसे पृथ्वी से देखा गया, तो यह चन्द्रमा और शुक्र के बाद तीसरा सबसे अधिक चमकदार निकाय बन गया (मंगल ग्रह अपनी ग्रहपथ (धुरी) के कुछ बिंदुओं पर बृहस्पति की चमक से मेल खाता है)।बृहस्पति को देवताओं का ग्रह कहा जाता है। शनि (Saturn) thumb|शनि शनि सौरमण्डल का एक सदस्य ग्रह है। यह सूरज से छठे स्थान पर है और सौरमंडल में बृहस्पति के बाद सबसे बड़ा ग्रह हैं। इसके कक्षीय परिभ्रमण का पथ १४,२९,४०,००० किलोमीटर है। शनि के 81 उपग्रह हैं। जिसमें टाइटन सबसे बड़ा है। टाइटन बृहस्पति के उपग्रह गिनिमेड के बाद दूसरा सबसे बड़ा उपग्रह है। शनि ग्रह की खोज प्राचीन काल में ही हो गई थी। गैलीलियो गैलिली ने सन् १६१० में दूरबीन की सहायता से इस ग्रह को खोजा था। शनि ग्रह की रचना ७५% हाइड्रोजन और २५% हीलियम से हुई है। जल, मिथेन, अमोनिया और पत्थर यहाँ बहुत कम मात्रा में पाए जाते हैं। हमारे सौर मण्डल में चार ग्रहों को गैस दानव कहा जाता है, क्योंकि इनमें मिटटी-पत्थर की बजाय अधिकतर गैस है और इनका आकार बहुत ही विशाल है। शनि इनमे से एक है - बाकी तीन बृहस्पति, अरुण (युरेनस) और वरुण (नेप्च्यून) हैं। अरुण (Uranus) thumb|अरुण अरुण या युरेनस हमारे सौर मण्डल में सूर्य से सातवाँ ग्रह है। व्यास के आधार पर यह सौर मण्डल का तीसरा बड़ा और द्रव्यमान के आधार पर चौथा बड़ा ग्रह है। द्रव्यमान में यह पृथ्वी से १४.५ गुना अधिक भारी और अकार में पृथ्वी से ६३ गुना अधिक बड़ा है। औसत रूप से देखा जाए तो पृथ्वी से बहुत कम घना है - क्योंकि पृथ्वी पर पत्थर और अन्य भारी पदार्थ अधिक प्रतिशत में हैं जबकि अरुण पर गैस अधिक है। इसीलिए पृथ्वी से तिरेसठ गुना बड़ा अकार रखने के बाद भी यह पृथ्वी से केवल साढ़े चौदह गुना भारी है। हालांकि अरुण को बिना दूरबीन के आँख से भी देखा जा सकता है, यह इतना दूर है और इतनी माध्यम रोशनी का प्रतीत होता है की प्राचीन विद्वानों ने कभी भी इसे ग्रह का दर्जा नहीं दिया और इसे एक दूर टिमटिमाता तारा ही समझा।MIRA's Field Trips to the Stars Internet Education Program Monterey Institute for Research in Astronomy http://www.mira.org/fts0/planets/101/text/txt001x.htm August 27, 2007 https://www.webcitation.org/60qT4OSTF?url=http://www.mira.org/fts0/planets/101/text/txt001x.htm 11 अगस्त 2011 dead १३ मार्च १७८१ में विलियम हरशल ने इसकी खोज की घोषणा करी। अरुण दूरबीन द्वारा पाए जाने वाला पहला ग्रह था। इसके 15 उपग्रहों में से 10 की खोज 1986 में वायेजर=1 यान द्वारा हुई है। (Neptune) thumb|left|वरुण वरुण, नॅप्टयून या नॅप्चयून हमारे सौर मण्डल में सूर्य से आठवाँ ग्रह है। व्यास के आधार पर यह सौर मण्डल का चौथा बड़ा और द्रव्यमान के आधार पर तीसरा बड़ा ग्रह है। वरुण का द्रव्यमान पृथ्वी से १७ गुना अधिक है और अपने पड़ौसी ग्रह अरुण (युरेनस) से थोड़ा अधिक है। खगोलीय इकाई के हिसाब से वरुण की ग्रहपथ सूरज से ३०.१ ख॰ई॰ की औसत दूरी पर है, यानि वरुण पृथ्वी के मुक़ाबले में सूरज से लगभग तीस गुना अधिक दूर है। वरुण को सूरज की एक पूरी परिक्रमा करने में १६४.७९ वर्ष लगते हैं, यानि एक वरुण वर्ष १६४.७९ पृथ्वी वर्षों के बराबर है। == क्षुद्रग्रह घेरा: देशराज गुर्जर thumb|300px|हमारे सौर मण्डल का क्षुद्रग्रह घेरा मंगल ग्रह (मार्स) और बृहस्पति ग्रह (ज्यूपिटर) की ग्रहपथओं के बीच स्थित है - सफ़ेद बिन्दुएँ इस घेरे में मौजूद क्षुद्रग्रहों को दर्शाती हैं क्षुद्रग्रह घेरा या ऐस्टरौएड बॅल्ट हमारे सौर मण्डल का एक क्षेत्र है जो मंगल ग्रह (मार्स) और बृहस्पति ग्रह (ज्यूपिटर) की ग्रहपथओं के बीच स्थित है और जिसमें हज़ारों-लाखों क्षुद्रग्रह (ऐस्टरौएड) सूरज की परिक्रमा कर रहे हैं। इनमें एक ९५० किमी के व्यास वाला सीरीस नाम का बौना ग्रह भी है जो अपने स्वयं के गुरुत्वाकर्षक खिचाव से गोल अकार पा चुका है। यहाँ तीन और ४०० किमी के व्यास से बड़े क्षुद्रग्रह पाए जा चुके हैं - वॅस्टा, पैलस और हाइजिआ। पूरे क्षुद्रग्रह घेरे के कुल द्रव्यमान में से आधे से ज़्यादा इन्ही चार वस्तुओं में निहित है। बाक़ी वस्तुओं का अकार भिन्न-भिन्न है - कुछ तो दसियों किलोमीटर बड़े हैं और कुछ धूल के कण मात्र हैं। 2008 के मध्य तक, पाँच छोटे पिंडों को बौने ग्रह के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, सीरीस क्षुद्रग्रह घेरे में है और वरुण से परे चार सूर्य ग्रहपथ - यम (जिसे पहले नवें ग्रह के रूप में मान्यता प्राप्त थी), हउमेया, माकेमाके और ऍरिस। छह ग्रहों और तीन बौने ग्रहों की परिक्रमा प्राकृतिक उपग्रह करते हैं, जिन्हें आम तौर पर पृथ्वी के चंद्रमा के नाम के आधार पर "चन्द्रमा" ही पुकारा जाता है। प्रत्येक बाहरी ग्रह को धूल और अन्य कणों से निर्मित छल्लों द्वारा परिवृत किया जाता है। + सौरमंडल सारांश center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px 100x100px center|100x100px 100x100px सूर्य बृहस्पति शनि अरुण वरुण पृथ्वी शुक्र center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px मंगल गैनिमिड टाइटन बुध कैलिस्टो आयो चन्द्रमा center|100x100px center|100x100px center|110x110px center|110x110px center|100x100px center|100x100px center|100x100px यूरोपा ट्राइटन टाईटेनिया रिया ओबेरॉन आऐपिटस अम्ब्रियल center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px ऍरिअल डायोनी टॅथिस वॅस्टा ऍनसॅलअडस मिरैन्डा प्रोटिअस center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px center|100x100px माइमस हायपेरियन फ़ोबे जेनस ऐमलथीया एपीमेथीयस प्रोमेथीयस सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ सौर मंडल (हिन्दी विकिविद्यालय) सौर मंडल no no Solar System सौर मंडल सौर मण्डल श्रेणी:ग्रह विज्ञान श्रेणी:अंतरिक्ष विज्ञान श्रेणी:सौर मंडल