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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

लोचन दास ठाकुर

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लोचन दास ठाकुर या लोचनानन्द दास या लोचन दास (१६वीं शताब्दी) मध्यकाल के एक प्रमुख वैष्णव विद्वान एवं कवि थे। चैतन्य महाप्रभु की जीवनी चैतन्यमंगल उनकी अमर कृति है। সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান, প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ৬৮৯, 978-81-7955-135-6 সংসদ বাংলা সাহিত্যসঙ্গী শিশির কুমার দাশ সাহিত্য সংসদ, কলকাতা ২০১৯ ((978-81-7955-007-9)) ২০১ वे एक गीतकार के रूप में भी प्रसिद्ध थे। जीवनी लोचन दास का जन्म सन् 1523 ईस्वी में अजय नदी के किनारे स्थित कोग्राम गांव में एक वैद्य परिवार में हुआ था। यह स्थान अब पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले में पड़ता है। उनके पिता का नाम कमलाकर दास और माता का नाम सदानन्दी देवी था। https://www.iskcongurugram.com/dussehra-2025/ Shri Lochana Das Thakur – The Poet of Gaura’s Sweet Pastimes ২০২৬-০৫-১২ लोचन दास अपने माता-पिता की एकमात्र संतान थे और वृन्दावन दास ठाकुर के समकालीन थे। अल्पायु में ही पास के काकुतिया गाँव की एक सुंदर कन्या से उनका विवाह हुआ। श्रीखंड वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख नरहरि सरकार ठाकुर से मिलने पर वे गौरांग के प्रेम में लीन हो गए और उनके शिष्य बन गए। लोचन दास के ससुराल वाले श्रीखंड आए और श्री नरहरि सरकार ठाकुर के समक्ष अपनी शिकायतें रखीं। श्री नरहरि सरकार के आदेश पर श्री लोचन दास अनिच्छा से अपने ससुराल जाने के लिए विवश हुए। लेकिन श्रीगुरु और गौरांग की कृपा से श्री लोचन दास के आध्यात्मिक जीवन में कभी कोई बाधा नहीं आई। वे अपनी पत्नी को उपदेश देते थे, जो उनकी कृपा से परम भक्त बन गईं, और वे दोनों श्रीमान महाप्रभु की अमृतमयी लीलाओं पर चर्चा करते हुए परम आनन्द में समय व्यतीत करने लगे। अपनी प्रिय पत्नी और ससुराल वालों के साथ कुछ दिन बिताने के बाद, लोचन दास अपने आध्यात्मिक गुरु के बरडांगा स्थित भजन कुटीर लौट आए। अंततः नरहरि सरकार ठाकुर के आदेश पर उन्होंने चैतन्य की जीवनी - चैतन्यमंगल - की रचना की। यह लोचनदास की अमर कृति है। चैतन्यमंगल के चार खण्डों में विभक्त है: सूत्र खण्ड, आदि खण्ड, मध्य खण्ड और शेष खण्ड। यद्यपि यह पुस्तक पढ़ने में सरल और सुगठित है तथापि इतिहासकार इस ग्रन्थ को जीवनी के रूप में विश्वसनीय नहीं मानते। সংসদ বাংলা সাহিত্যসঙ্গী শিশির কুমার দাশ সাহিত্য সংসদ, কলকাতা ২০১৯ ((978-81-7955-007-9)) ২০১শিশির কুমার দাশ (২০১৯)। সংসদ বাংলা সাহিত্যসঙ্গী। সাহিত্য সংসদ, কলকাতা। পৃ. ২০১। আইএসবিএন ৯৭৮-৮১-৭৯৫৫-০০৭-৯।{{বই উদ্ধৃতি}}: উদ্ধৃতি শৈলী রক্ষণাবেক্ষণ: আইএসবিএন ত্রুটি উপেক্ষা করা হয়েছে (লিঙ্ক) বিষয়শ্রেণী:উদ্ধৃতি শৈলী রক্ষণাবেক্ষণ: আইএসবিএন ত্রুটি উপেক্ষা করা হয়েছে अन्य रचनाएँ: 'चैतन्यमंगल' के अतिरिक्त, उन्होंने 'जगन्नाथ बल्लभ' और 'दुर्लभसार' नामक पुस्तकें भी लिखीं। उन्होंने कई वैष्णव पद भी रचे, जिनमें उन्होंने स्वयं को 'लोचनदास' कहा। गौरलीला पर लिखे उनके पद विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। विशेषताएँ - वैष्णव समुदाय में उन्हें श्रील लोचन दास ठाकुर के रूप में पूजा जाता है। उन्हें कृष्ण की ब्रज-लीला में 'लोचन सखी' माना जाता है। https://www.iskcongurugram.com/dussehra-2025/ Shri Lochana Das Thakur – The Poet of Gaura’s Sweet Pastimes ২০২৬-০৫-১২"Shri Lochana Das Thakur – The Poet of Gaura's Sweet Pastimes"। সংগ্রহের তারিখ ১২ মে ২০২৬। सन्दर्भ bn:লোচন দাস ঠাকুর श्रेणी:बंगाली कवि श्रेणी:बंगाली लेखक