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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

देउकी

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देउकी सुदूर पश्चिमी नेपाल में प्रचलित एक प्राचीन प्रथा है, जिसमें एक कम उम्र की लड़की को स्थानीय हिन्दू मंदिर में अर्पित कर दिया जाता है। यह प्रथा अब धीरे-धीरे कम होती जा रही है। लड़कियाँ देउकी तब बनती हैं, जब उनके माता-पिता देवताओं से सुरक्षा और आशीर्वाद पाने की आशा में उन्हें मंदिर में चढ़ा देते हैं या फिर जब निर्धन माता-पिता उसी धार्मिक मान्यता के चलते अपनी बेटियों को धनी दंपतियों को बेच देते हैं। अपनी बेटियों को मंदिर में समर्पित करने वाले गरीब परिवारों को समुदाय में सम्मान और स्वीकृति मिलती है क्योंकि इसे एक महान त्याग माना जाता है। इसके अतिरिक्त उन्हें अपनी बेटियों के विवाह की चिंता से भी मुक्ति मिल जाती है। लड़कियों को मंदिर में अर्पित करने के बाद, न तो माता-पिता और न ही उन्हें खरीदने वाले दंपती, देउकियों को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं और न ही उनसे कोई संपर्क रखते हैं। देउकियों को विवाह के योग्य नहीं माना जाता। उन्हें उन लोगों से भी कोई धन प्राप्त नहीं होता, जिन्होंने उन्हें मंदिरों में समर्पित किया है। इसलिए वे मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान पर निर्भर रहने को विवश होती हैं। अपर्याप्त आय, कौशल व शिक्षा के अभाव और लोक-मान्यताओं के कारण, कि देउकी के साथ यौन संबंध स्थापित करने से पाप धुल जाते हैं तथा सौभाग्य की प्राप्ति होती है, कई देउकियाँ जीविता सेक्स के लिए मजबूर हो जाती हैं। यह वेश्यावृत्ति का एक ऐसा रूप है जिसमें भोजन या आश्रय जैसी बुनियादी आवश्यकताओं के बदले में यौन संबंध स्थापित किये जाते हैं। नेपाली नागरिकता संबंधी मौजूदा कानून के अनुसार, देउकियों से जन्मी पुत्रियाँ, जिन्हें देवी के नाम से जाना जाता है, प्रायः नेपाल की नागरिक नहीं बन पाती हैं, क्योंकि नागरिकता पिता के वंश के आधार पर मिलती है। शिक्षा और अन्य सामाजिक सेवाओं से वंचित रहने के कारण, ऐसी कई देवियाँ भी देउकी बनने के लिए विवश हो जाती हैं। यद्यपि सन् 2006 में हुये एक विधायी परिवर्तन के कारण देउकियों के लिए अपने बच्चों की नागरिकता प्राप्त करना थोड़ा आसान हो गया है, यदि वे यह सिद्ध कर पाती हैं कि बच्चे का पिता नेपाली है, फिर भी मातृवंशीय परंपरा को मान्यता नहीं दी गई है। == इन्हें भी देखें == सती प्रथा == सन्दर्भ ==