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411 समाचार
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फ़ारसी संवैधानिक क्रांति

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फारसी संवैधानिक क्रांति 20वीं शताब्दी के वैश्विक क्रांतिकारी आंदोलन 1905–1911 ईरान संवैधानिक सरकार की स्थापना संवैधानिक समर्थक राजशाही समर्थक (क़ाजार वंश) सतार खानबख़्तियारी नेता मोहम्मद अली शाहरूसी समर्थन फारसी संवैधानिक क्रांति, जिसे "इंकेलाब-ए-मशरूता" के नाम से भी जाना जाता है, 20वीं शताब्दी की शुरुआत में ईरान में राजनीतिक और सामाजिक सुधारों के लिए हुआ एक ऐतिहासिक आंदोलन था। यह क्रांति क़ाजार वंश के शासन के दौरान हुई और इसका मुख्य उद्देश्य संवैधानिक सरकार की स्थापना करना और राजशाही की शक्ति को सीमित करना था। यह आंदोलन ईरान में पश्चिमी विचारों और आधुनिक शिक्षा के प्रसार, साथ ही रूस और ब्रिटेन जैसे विदेशी शक्तियों के हस्तक्षेप से प्रेरित था। पृष्ठभूमि 19वीं शताब्दी के अंत तक, ईरान पर क़ाजार वंश का शासन था, जो आर्थिक और राजनीतिक रूप से कमजोर हो चुका था। नासिर-अल-दीन शाह (1848–1896) के शासनकाल में पश्चिमी विज्ञान, तकनीक, और शिक्षा प्रणाली की शुरुआत हुई, लेकिन वह विदेशी हस्तक्षेप को रोकने में असमर्थ रहे। उनके उत्तराधिकारी, मुज़फ्फर-अल-दीन शाह (1896–1907), आर्थिक रूप से रूस और ब्रिटेन पर निर्भर हो गए, जिससे देश के अंदर असंतोष और बढ़ गया।Bhattacharya Nandini Iran, Political and Cultural Protests, 1844–1914 2009 https://onlinelibrary.wiley.com/doi/abs/10.1002/9781405198073.wbierp0770 The International Encyclopedia of Revolution and Protest 1–4 John Wiley & Sons, Ltd en 10.1002/9781405198073.wbierp0770 978-1-4051-9807-3 2025-01-27 ईरान के सामाजिक ढांचे में गहरी असमानता थी। अभिजात वर्ग में राजदरबारी, धार्मिक नेता, और व्यापारी शामिल थे, जबकि किसानों, श्रमिकों और जनसामान्य की स्थिति दयनीय थी। महिलाओं को नागरिक अधिकारों से वंचित रखा गया था। इन सब कारणों से संवैधानिक क्रांति की नींव पड़ी।https://www.iranchamber.com/history/constitutional_revolution/constitutional_revolution.php History of Iran: Constitutional Revolution www.iranchamber.com 2025-01-27 31 अक्तूबर 2024 https://web.archive.org/web/20241031210055/https://www.iranchamber.com/history/constitutional_revolution/constitutional_revolution.php dead क्रांति का आरंभ (1905-1906) 1905 में तेहरान में व्यापारियों और धार्मिक नेताओं ने भ्रष्टाचार और निरंकुशता के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किए। जनवरी 1906 में जब सरकार ने विरोधकारियों को गिरफ्तार करने की धमकी दी, तो वे मस्जिदों में शरण लेने लगे। 12 अगस्त 1906 को शाह ने दबाव में आकर संवैधानिक सरकार की स्थापना के लिए आदेश जारी किया। दिसंबर 1906 में एक संविधान पारित किया गया, जिसमें मजलिस (विधानसभा) की स्थापना और शाह की शक्ति को सीमित करने का प्रावधान था। यह संविधान नागरिक स्वतंत्रता, जैसे कि भाषण और संपत्ति की सुरक्षा, का आश्वासन देता था, लेकिन महिलाओं और गरीब वर्गों को वोट देने के अधिकार से वंचित रखा गया।https://www.jstor.org/stable/j.ctt1m3p32s Iran's Constitutional Revolution of 1906 and Narratives of the Enlightenment 2016 Gingko 978-1-909942-91-2 मोहम्मद अली शाह का विरोध (1907-1909) 1907 में शाह मोहम्मद अली ने रूसी सहायता से संसद को समाप्त करने और निरंकुश शासन बहाल करने का प्रयास किया। 1908 में तेहरान में मजलिस पर बमबारी की गई और संवैधानिक समर्थकों को दमन किया गया। इसके जवाब में देश के विभिन्न हिस्सों जैसे तबरीज़, इस्फ़हान और रश्त में विद्रोह शुरू हो गए।https://www.britannica.com/topic/Constitutional-Revolution Constitutional Revolution Iranian history Britannica www.britannica.com en 2025-01-27 1909 में बख़्तियारी नेताओं और गिलानी लड़ाकों ने तेहरान पर कब्जा कर लिया और शाह को सत्ता से हटा दिया गया। उन्हें रूस निर्वासित कर दिया गया और संवैधानिक शासन को फिर से स्थापित किया गया। 1910-1911: चुनौतियाँ और असफलताएँ 1910 में शाह ने रूस की मदद से एक बार फिर सत्ता वापस लेने की कोशिश की, लेकिन वह असफल रहे। इस बीच, 1907 के ब्रिटेन-रूस समझौते ने ईरान की स्वतंत्रता के सपनों को ध्वस्त कर दिया। इस समझौते के तहत रूस ने उत्तरी ईरान पर कब्जा कर लिया और ब्रिटेन ने दक्षिण और पूर्वी हिस्सों में प्रभाव जमाया।https://iranicaonline.org/articles/constitutional-revolution-I Welcome to Encyclopaedia Iranica Foundation Encyclopaedia Iranica iranicaonline.org en-US 2025-01-27 अमेरिकी विशेषज्ञ मॉर्गन शूस्टर को खजाना प्रमुख नियुक्त किया गया, लेकिन उनका प्रयास भी रूस के हस्तक्षेप के कारण विफल रहा। 1911 में रूस ने तेहरान पर हमला किया, मजलिस को भंग कर दिया, और संवैधानिक आंदोलन को कुचल दिया। क्रांति की विरासत फारसी संवैधानिक क्रांति ने ईरान में लोकतांत्रिक परंपराओं की नींव रखी। हालांकि यह क्रांति तत्कालीन समय में अपने उद्देश्य पूरी तरह से हासिल नहीं कर पाई, लेकिन इसने नागरिक अधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए भविष्य के आंदोलनों को प्रेरित किया। यह आंदोलन सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन की दिशा में ईरान के संघर्ष का प्रतीक है। संदर्भ श्रेणी:क्रांति