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411 समाचार
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मोइनुद्दीन चिश्ती

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नवम्बर 2017 मुईनुद्दीन चिश्ती - मोइनुद्दीन चिश्ती इस्लाम सुन्नीFrancesca Orsini and Katherine Butler Schofield, Telling and Texts: Music, Literature, and Performance in North India (Open Book Publishers, 2015), p. 463Arya, Gholam-Ali and Negahban, Farzin, “Chishtiyya”, in: Encyclopaedia Islamica, Editors-in-Chief: Wilferd Madelung and, Farhad Daftary: "The followers of the Chishtiyya Order, which has the largest following among Sufi orders in the Indian subcontinent, are Ḥanafī Sunni Muslims." इस्लाम चिश्ती तरीक़ा इस्लाम का स्वर्ण युग 1 फरवरी 1143 CE सीस्तान या इस्फ़हान प्रांत http://www.iecrcna.org/publications/books/Khwaja_Ghareeb_Nawaz_rahmatullah_alayh_SP.pdf संग्रहीत प्रति 8 जून 2018 https://web.archive.org/web/20170517040349/http://www.iecrcna.org/publications/books/Khwaja_Ghareeb_Nawaz_rahmatullah_alayh_SP.pdf 17 मई 2017 dead 15 मार्च 1236 CE अजमेर, राजस्थान, भारत अजमेर शरीफ़ दरगाह ख़्वाजा अब्दुल्ला अंसारी,Ḥamīd al-Dīn Nāgawrī, Surūr al-ṣudūr; cited in Auer, Blain, “Chishtī Muʿīn al-Dīn Ḥasan”, in: Encyclopaedia of Islam, THREE, Edited by: Kate Fleet, Gudrun Krämer, Denis Matringe, John Nawas, Everett Rowson. Najīb al-Dīn Nakhshabī Muḥammad Mubārak al-ʿAlavī al-Kirmānī,Blain Auer, “Chishtī Muʿīn al-Dīn Ḥasan”, in: Encyclopaedia of Islam, THREE, Edited by: Kate Fleet, Gudrun Krämer, Denis Matringe, John Nawas, Everett Rowson. Ḥāmid b. Faḍlallāh Jamālī, ʿAbd al-Ḥaqq Muḥaddith Dihlavī, Ḥamīd al-Dīn Ṣūfī Nāgawrī,Arya Gholam-Ali Negahban Farzin Chishtiyya Encyclopaedia Islamica Wilferd Madelung Farhad Daftary Fakhr al-Dīn Chishtī, and virtually all subsequent mystics of the Chishtiyya order हजरत ख़्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की मज़ार अजमेर शहर में है। यह माना जाता है कि मोइनुद्दीन चिश्ती का जन्म ५३७ हिज़री संवत् अर्थात ११४३ ई॰ पूर्व पर्शिया के सिस्तान क्षेत्र में हुआ।http://www.dargahajmer.com/g_birth.htm संग्रहीत प्रति 2 फ़रवरी 2014 https://web.archive.org/web/20110804072453/http://www.dargahajmer.com/g_birth.htm 4 अगस्त 2011 dead अन्य खाते के अनुसार उनका जन्म ईरान के इस्फ़हान नगर में हुआ। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिम पूर्वजों के वंसज है। ख़्वाजा नवाब के नाम से भी जाना जाता है। ग़रीब नवाज़ इन्हें लोगों द्वारा दिया गया लक़ब है।https://www.thehindu.com/opinion/columns/in-the-chishti-shrine-in-ajmer/article26292437.ece In the Chishti shrine in Ajmer Safvi Rana 17 February 2019 The Hindu 16 February 2021 en-IN 0971-751X चिश्तिया तरीका - पुनर्स्थापना चिश्तिया तरीका अबू इसहाक़ शामी ने ईरान के शहर "चश्त" में शुरू किया था, इस लिए इस तरीक़े को "चश्तिया" या चिश्तिया https://www.irfani-islam.in/2022/01/Khwaja-Garib-Nawaz-Moinuddin-Chishti-History-In-Hindi.html Khwaja Garib Nawaz Moinuddin Chishti History In Hindi Irfani Sheikh Irfan Irfani-Islam - इस्लाम की पूरी मालूमात हिन्दी 2022-01-02 2 जनवरी 2022 https://web.archive.org/web/20220102103848/https://www.irfani-islam.in/2022/01/Khwaja-Garib-Nawaz-Moinuddin-Chishti-History-In-Hindi.html dead तरीका नाम पड गया। लेकिन वह भारत उपखन्ड तक नहीं पहुन्चा था। मोईनुद्दीन चिश्ती ने इस सूफ़ी तरीक़े को भारत उप महाद्वीप या उपखन्ड में स्थापित और प्रचार किया। यह तत्व या तरीक़ा आध्यात्मिक था, भारत भी एक आध्यात्म्कि देश होने के नाते, इस तरीक़े को समझा, अपनाया। मज़हब रूप से यह तरीका बहुत ही शान्तिपूर्वक और धार्मिक विग्नान से भरा होने के कारण भारतीय समाज में इन्के सिश्यगण अधिक हुवे। इन्की चर्चा दूर दूर तक फैली और लोग दूर दूर से इसके दरबार में हाजिर होते, और मज़हबी ग्यान पाते। अजमेर में उनका प्रवेश अजमेर में जब वे मज़हबी प्रचार करता तो चिश्ती तरीके से। इस तरीके में अल्लाह गान पद्य रूप में गायन के माध्यम से लोगों तक पहुँचाया जाता था। मतलब ये कि, क़व्वाली, समाख्वानी, और उपन्यासों द्वारा लोगों को अल्लाह के बारे में बताना और मुक्ति मार्ग दर्शन करवाना। इस तरह स्थानीय लोगों में सूफिज्म और इस्लाम का प्रचार प्रसार किया गया। उनके आखरी पल thumb|160px|मोईनुद्दीन चिश्ती दरगाह, अजमेर। ६३३ हिज़री के आते ही उन्हें पता था कि यह उनका आखरी वर्ष है, जब वे अजमेर के जुम्मा मस्जिद में अपने प्रशंसको के साथ बैठे थे, तो उनहोंने शेख अली संगल (र अ) से कहा कि वे हज़रत बख्तियार काकी (र अ) को पत्र लिखकर उन्हें आने के लिये कहें। ख्वाजा साहेब के बाद क़ुरान-ए-पाक, उनका गालिचा और उनके चप्पल काकी (र अ) को दिया गया और कहा "यह विशवास मुहम्म्द (स अ व्) का है, जो मुझे मेरे पीर-ओ-मुर्शिद से मिला हैं, मैं आप पर विशवास करके आप को दे रहा हुँ और उसके बाद उनका हाथ लिया और नभ की ओर देखा और कहा "मैंने तुम्हें अल्लाह पर न्यास्त किया है और तुम्हें यह मौका दिया है उस आदर और सम्मान प्राप्त करने के लिए।" उस के बाद ५ और ६ रजब को ख्वाजा साहेब अपने कमरे के अंदर गए और क़ुरान-ए-पाक पढने लगे, रात भर उनकी आवाज़ सुनाई दी, लेकिन सुबह को आवाज़ सुनाई नहीं दी। जब कमरा खोल कर देखा गया, तब वे स्वर्ग चले गये थे, उनके माथे पर सिर्फ यह पंक्ति चमक रही थी "वे अल्लाह के मित्र थे और इस संसार को अल्लाह का प्रेम पाने के लिए छोड दिया।" उसी रात को काकी (र अ) को मुहम्मद (स अ व्) स्वपन में आए थे और कहा "ख्वाजा साहब अल्लाह के मित्र हैं और मैं उनहें लेने के लिये आया हुँ। उनकी जनाज़े की नमाज़ उन के बड़े पुत्र ख्वाजा फ़क्रुद्दीन (र अ) ने पढाई। हर साल हज़रत के यहाँ उनका उर्स बड़े पैमाने पर होता है। साधारण संस्कृति में हुसैन इब्न अली के पाशस्त में इन्हों ने यह कविता लिखी, जो दुनियां भर में मशहूर हुई। शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैन शाह हैं हुसैन, बादशाह हैं हुसैन दीन अस्त हुसैन, दीनपनाह अस्त हुसैन धर्म हैं हुसैन, धर्मरक्षक हैं हुसैन सरदाद न दाद दस्त दर दस्त ए यज़ीद अपना सर पेश किया, मगर हाथ नहीं पेश किया आगे यज़ीद के हक़्क़ाक़-ए बिना-ए ला इलाह अस्त हुसैन सत्य है कि हुसैन ने शहादा की बुनियाद रखी thumb|मक़्बरे का बाहरी मन्ज़र इन्हें भी देखें 30em अजमेर दर्गाह पर हमला अली हुज्विरी अता हुसैन फ़ानी चिश्ती बाबा फ़रीद लोकप्रिय सूफ़ियों की सूची सूफ़ी विषयों की सूची मीर सय्यद अली हमदानि निज़ामुद्दीन औलिया क़ादरिया क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी अलाउल हक़ पांडवी अश्रफ़ जहांगीर सेम्नानी सय्यद सूफ़ीवाद सूफ़ियों की सूची उर्स शाह जलाल शाह पीराँ सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:सूफ़ी श्रेणी:एशिया में इस्लाम श्रेणी:भारत में इस्लाम श्रेणी:1143 में जन्मे लोग श्रेणी:१२३६ में निधन