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411 समाचार
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तमिल भाषा

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तमिल ta தமிழ் Tamiḻ भारत, श्रीलंका, सिंगापुर, मलेशिया तमिल नाडु, पुदुचेरी (भारत), उत्तरी और पूर्वी प्रान्त (श्रीलंका) तमिल लोग 8.5 करोड़ (अनुमानित) Dravidian द्रविड़ दक्षिणी द्रविड़ तमिल-कन्नड़ तमिल-कोडगु तमिल-मलयालम तमिल लिपि, तमिल ब्राह्मी (ऐतिहासिक), वट्टेळुत्तु (ऐतिहासिक) भारतश्रीलंकासिंगापुर ta tam tam tami1289 Tamil तमिल (தமிழ், तमिऴ्) एक प्राचीन और शास्त्रीय द्रविड़ भाषा है, जो मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप के तमिल लोगों द्वारा बोली जाती है। यह भारत के तमिल नाडु राज्य और पुदुचेरी केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषा है। इसके साथ ही, यह श्रीलंका और सिंगापुर की भी आधिकारिक भाषा है। तमिल विश्व की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है और इसका साहित्यिक इतिहास दो सहस्राब्दी से अधिक पुराना है। यह भारत की पहली भाषा है जिसे 2004 में 'शास्त्रीय भाषा' (Classical Language) का दर्जा दिया गया था।http://www.thehindu.com/2004/09/18/stories/2004091807600100.htm Classifying Tamil as classical language The Hindu 18 September 2004 परिचय तमिऴ द्राविड़ भाषा परिवार की प्राचीनतम भाषा मानी जाती है। इसकी उत्पत्ति के सम्बन्ध में अभी तक यह निर्णय नहीं हो सका है कि किस समय इस भाषा का प्रारम्भ हुआ। विश्व के विद्वानों ने संस्कृत, ग्रीक, लैटिन आदि भाषाओं के समान तमिऴ को भी अति प्राचीन तथा सम्पन्न भाषा माना है। अन्य भाषाओं की अपेक्षा तमिऴ भाषा की विशेषता यह है कि यह अति प्राचीन भाषा होकर भी लगभग २५०० वर्षों से अविरत रूप से आज तक जीवन के सभी क्षेत्रों में व्यवहृत है। तमिऴ भाषा में उपलब्ध ग्रन्थों के आधार पर यह निर्विवाद निर्णय हो चुका है कि तमिऴ भाषा ईसा से कई सौ वर्ष पहले ही सुसंस्कृत और सुव्यवस्थित हो गई थी। पुरातात्विक साक्ष्य और प्राचीनता तमिल भाषा की प्राचीनता को हाल के पुरातात्विक उत्खननों ने और भी पीछे धकेल दिया है। कीलाड़ी और शिवगलई उत्खनन तमिल नाडु के कीलाड़ी (Keeladi) और शिवगलई (Sivagalai) में हुए पुरातात्विक उत्खनन ने प्राचीन तमिल सभ्यता के बारे में नए तथ्य प्रस्तुत किए हैं। 2021 में, अमेरिका के मियामी स्थित बीटा एनालिटिक (Beta Analytic) द्वारा किए गए AMS रेडियोकार्बन डेटिंग के अनुसार, शिवगलई से प्राप्त धान के अवशेषों की तिथि 1155 ईसा पूर्व (BCE) निर्धारित की गई है।https://www.thehindu.com/news/national/tamil-nadu/porunai-civilisation-is-3200-years-old-says-mk-stalin/article36380678.ece Porunai civilisation is 3,200 years old, says M.K. Stalin The Hindu 9 September 2021 यह प्रमाणित करता है कि संगम काल का आरम्भ और थामिरबरानी (Thamirabarani) सभ्यता पूर्व-मौर्य काल की है। कीलाड़ी उत्खनन से एक धर्मनिरपेक्ष (secular) और उन्नत शहरी सभ्यता के साक्ष्य मिले हैं, जहाँ से तमिल-ब्राह्मी (Tamil-Brahmi) लिपि वाले मिट्टी के बर्तन प्राप्त हुए हैं, जो उस समाज में उच्च साक्षरता दर को दर्शाते हैं।Rajan K. Early Tamil Writing System 2014 Pandya Nadu Centre for Historical Research मयिलाडुमपारई और लौह युग मयिलाडुमपारई (Mayiladumparai) में हुए उत्खननों से प्राप्त साक्ष्यों की कार्बन डेटिंग से पता चला है कि तमिल नाडु में लौह युग का आरम्भ लगभग 3345 ईसा पूर्व (लगभग 4200 BP) हुआ था।https://www.thehindu.com/news/national/tamil-nadu/iron-age-in-tamil-nadu-dates-back-to-2172-bce-says-stalin/article65400262.ece Iron Age in Tamil Nadu dates back to 2172 BCE The Hindu 10 May 2022 यह भारत में अब तक का सबसे पुराना लौह युग का साक्ष्य है, जो प्राचीन तमिल समाज की तकनीकी प्रगति को रेखांकित करता है। अराम (அறம்) बनाम वैदिक व्यवस्था प्राचीन तमिल साहित्य और दर्शन का मूल आधार अराम (Aram / அறம்) है। अराम की अवधारणा और उत्तर भारतीय वैदिक दर्शन के बीच एक स्पष्ट और मौलिक वैचारिक भिन्नता है। धर्मनिरपेक्ष मानवतावाद बनाम वर्ण व्यवस्था अराम एक धर्मनिरपेक्ष मानवतावादी (secular humanist) और समतावादी (egalitarian) नैतिक ढांचा है। इसके विपरीत, वैदिक परंपरा जन्म-आधारित 'वर्ण व्यवस्था' (जाति व्यवस्था) पर आधारित है। तिरुक्कुरल (Thirukkural), जिसे तमिल साहित्य का सबसे महान नैतिक ग्रंथ माना जाता है, अराम के सिद्धांतों पर आधारित है।Tiruvalluvar The Kural G.U. Pope 1886 W.H. Allen & Co. तिरुक्कुरल में जन्म के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को खारिज किया गया है और कर्म एवं नैतिकता को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। अराम समाज में न्याय, समानता और सार्वभौमिक नैतिकता की वकालत करता है, जो इसे पदानुक्रमित (hierarchical) और अनुष्ठान-आधारित वैदिक व्यवस्था से पूरी तरह अलग करता है। साहित्य और तोल्काप्पियम तमिल साहित्य की जड़ें संगम काल में हैं। तोल्काप्पियम और अगम-पुरम ढाँचा तोल्काप्पियम (Tolkappiyam) केवल तमिल भाषा का सबसे प्राचीन उपलब्ध व्याकरण ग्रंथ ही नहीं है, बल्कि यह प्राचीन तमिल समाज का एक व्यापक सामाजिक-साहित्यिक (socio-literary) ब्लूप्रिंट भी है।Zvelebil Kamil Companion Studies to the History of Tamil Literature 1992 E.J. Brill तोल्काप्पियम मानव जीवन और साहित्य को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित करता है: अगम (Agam): इसका अर्थ 'आंतरिक' है। यह प्रेम, भावनाओं, व्यक्तिगत संबंधों और पारिवारिक जीवन से संबंधित है। अगम कविताओं को विभिन्न 'तिणई' (परिदृश्य) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। पुरम (Puram): इसका अर्थ 'बाहरी' है। यह युद्ध, वीरता, राजनीति, समाज और सार्वजनिक जीवन से संबंधित है। यह अगम और पुरम का मैट्रिक्स संगम साहित्य की संरचना का मूल है और यह प्राचीन तमिलों के जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है। लाल सागर पुरालेख और समुद्री व्यापार तमिल भाषा प्राचीन काल में एक प्रमुख समुद्री संपर्क भाषा (lingua franca) के रूप में कार्य करती थी। मिस्र के लाल सागर (Red Sea) तट पर स्थित प्राचीन बंदरगाहों, विशेषकर बेरेनिके (Berenike) और मियोस होर्मोस (Myos Hormos) में पुरातात्विक उत्खनन के दौरान तमिल-ब्राह्मी (Tamil-Brahmi) लिपि में उत्कीर्ण मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े (potsherds) मिले हैं।Mahadevan Iravatham Tamil-Brahmi Inscriptions from Egypt Journal of the Epigraphical Society of India 1996 इन अभिलेखों में तमिल व्यापारियों के नाम (जैसे 'कणन', 'कोरा') उकेरे गए हैं। ये पुरालेख इस बात का अकाट्य प्रमाण हैं कि प्राचीन तमिल व्यापारियों का रोमन साम्राज्य के साथ सीधा और जीवंत समुद्री व्यापार था, और तमिल भाषा का प्रभाव हिंद महासागर से लेकर लाल सागर तक फैला हुआ था। तमिल अध्ययन में यूरोपीय और जर्मन योगदान आधुनिक काल में तमिल भाषा और साहित्य को वैश्विक पटल पर लाने में यूरोपीय विद्वानों, विशेषकर जर्मन मिशनरियों और भाषाविदों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। बर्थोलोमियस ज़ीगेनबाल्ग (Bartholomäus Ziegenbalg): 1706 में भारत आए इस जर्मन मिशनरी ने तमिल सीखी और 1712 में तरंगमबाड़ी (Tranquebar) में पहली तमिल प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की। उन्होंने तमिल व्याकरण पर कार्य किया और कई ग्रंथों का अनुवाद किया, जिससे तमिल में मुद्रण संस्कृति का आरम्भ हुआ।Jeyaraj Daniel Bartholomäus Ziegenbalg: The Father of Modern Protestant Mission 2006 Oxford University Press कार्ल ग्रॉल (Karl Graul): 19वीं सदी के जर्मन भाषाविद कार्ल ग्रॉल ने तमिल साहित्य का गहरा अध्ययन किया। उन्होंने तिरुक्कुरल (Thirukkural) का जर्मन भाषा में पहला पूर्ण अनुवाद प्रकाशित किया, जिससे यूरोपीय अकादमिक जगत में तमिल नैतिकता और दर्शन को मान्यता मिली। हीडलबर्ग विश्वविद्यालय (Heidelberg University): जर्मनी का हीडलबर्ग विश्वविद्यालय आज भी तमिल अध्ययन (Tamilology) का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र है। यहाँ दक्षिण एशियाई अध्ययन संस्थान (South Asia Institute) प्राचीन और आधुनिक तमिल भाषा, साहित्य और इतिहास पर निरंतर उच्च स्तरीय शोध कर रहा है। गठन तमिऴ, हिन्दी तथा कुछ अन्य भारतीय भाषाओं के विपरीत लिंग-विभेद प्रमुख नहीं होता है। देवनागरी वर्णमाला के कई अक्षरों के लिये तमिल में एक ही वर्ण का प्रयोग होता है, यथा – देवनागरी तमिल क, ख, ग, घ க च, छ, ज, झ ச ट, ठ, ड, ढ ட त, थ, द, ध த प, फ, ब, भ ப तमिऴ भाषा में कुछ और वर्ण होते हैं जिनका प्रयोग सामान्य हिन्दी में नहीं होता है। उदाहरणार्थ: ள-ळ, ழ-ऴ, ற-ऱ, ன-ऩ। लेखन प्रणाली तमिल लिपि तमिऴ भाषा वट्ट एऴुत्तु लिपि में लिखी जाती है। अन्य भारतीय भाषाओं की तुलना में इसमें स्पष्टतः कम अक्षर हैं। देवनागरी लिपि की तुलना में इसमें हृस्व ए (ऎ) तथा हृस्व ओ (ऒ) भी हैं। प्रत्येक वर्ग (कवर्ग, चवर्ग आदि) का केवल पहला और अंतिम अक्षर उपस्थित है, बीच के अक्षर नहीं हैं। तमिऴ संख्याएँ संख्या हिन्दी नाम मूळ तमिळ प्रणाली वर्तमान तमिळ प्रणाली तमिल लिपि में नाम देवनागरी लिपि में नाम ० शून्य 0 சுழியம் सुलियम १ एक ௧ ௧ ஒன்று ओन्-रू २ दो ௨ ௨ இரண்டு इरण्डू ३ तीन ௩ ௩ மூன்று मुन्-रू ४ चार ௪ ௪ நான்கு नांगु ५ पाँच ௫ ௫ ஐந்து अइन्दु १० दस ௰ ௧0 பத்து पत्तु १०० सौ ௱ ௧00 நூறு नूरू १,००० एक हजार ௲ ௧000 ஆயிரம் आयिरम १,००,००,००० करोड़ ௱௱௲ ௧0000000 ஒரு கோடி ओरू कोडि संदर्भ इन्हें भी देखें तमिऴ लिपि संघम साहित्य तमिऴ साहित्य का इतिहास तिरुक्कुरल बाहरी कड़ियाँ हिन्दी-तमिल सीखें Hindi-Tamil Common Vocabulary श्रेणी:तमिल भाषा श्रेणी:द्रविड़ भाषाएँ श्रेणी:भारत में शास्त्रीय भाषाएँ श्रेणी:विश्व की प्रमुख भाषाएं