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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

पे-पर-क्लिक (प्रति क्लिक भुगतान)

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August 2010 पे पर क्लिक (पीपीसी), वेबसाइटों पर इस्तेमाल किया जाने वाला एक इंटरनेट विज्ञापन मॉडल है जहां विज्ञापनदाता अपने विज्ञापन को क्लिक किये जाने पर ही अपने होस्ट (मेजबान) को भुगतान करते हैं। खोज इंजनों के साथ, विज्ञापनदाता आमतौर पर अपने लक्षित बाजार के लिए प्रासंगिक खोजशब्द वाक्यांशों पर ही बोली लगाते हैं। सामग्री साइटें सामान्यतः बोली प्रणाली का इस्तेमाल करने की बजाय प्रति क्लिक एक निश्चित मूल्य लगाती हैं। कॉस्ट पर क्लिक (CPC), विज्ञापनदाता द्वारा खोज इंजन तथा अन्य इंटरनेट प्रकाशकों को उस प्रत्येक क्लिक के लिए किया जाने वाला भुगतान है जो आगंतुक को विज्ञापनदाता की वेबसाइट पर ले कर जाता है। सामान्यीकृत पोर्टल के विपरीत - जो एक साइट पर अधिकाधिक लोगों को लाने की चेष्टा करते हैं - पीपीसी, लोगों को सर्फिंग के दौरान खरीद के अवसर प्रदान प्रदान करने वाले तथाकथित सहबद्ध मॉडल को लागू करता है। यह संबद्ध साझेदार साइटों को वित्तीय प्रोत्साहनों (राजस्व के एक प्रतिशत के रूप में) की पेशकश द्वारा ऐसा करता है। साझेदार, व्यापारी को खरीद के लिए क्लिक की सुविधा प्रदान करते हैं। यह एक प्रदर्शन आधारित भुगतान मॉडल है: यदि साझेदार बिक्री करने में असफल रहता है तो व्यापारी के लिए कोई लागत नहीं आती है। विविधताओं में बैनर आदान-प्रदान, पे-पर-क्लिक और राजस्व साझा करने के कार्यक्रम शामिल हैं। पीपीसी विज्ञापनों का उपयोग करने वाली वेबसाइटें, एक प्रमुखशब्द खोज (कीवर्ड क्वेरी) के एक विज्ञापनदाता की खोजशब्द सूची से मेल खाने, या एक सामग्री साइट द्वारा प्रासंगिक सामग्री प्रदर्शित किये जाने पर विज्ञापनों को दर्शाती हैं। ऐसे विज्ञापनों को प्रायोजित लिंक या प्रायोजित विज्ञापन कहा जाता है और वे खोज इंजन के परिणाम पृष्ठ पर परिणाम के ऊपर या बगल में, अथवा वेब डेवलपर की इच्छानुसार सामग्री साईट पर कहीं भी दिखाई देते हैं।"कस्टमर नाउ", डेविड जेटला, 2009. पीपीसी प्रदाताओं में, गूगल ऐडवर्ड्स, याहू! सर्च मार्केटिंग, तथा माइक्रोसॉफ्ट एडसेंटर तीन सबसे बड़े नेटवर्क ऑपरेटर हैं और ये तीनों बोली-आधारित मॉडल के तहत काम करते हैं। कॉस्ट पर क्लिक (सीपीसी), खोज इंजन तथा किसी विशेष खोजशब्द के लिए प्रतियोगिता के स्तर के आधार पर भिन्न होता है। पीपीसी विज्ञापन मॉडल का क्लिक धोखाधड़ी के माध्यम से दुरुपयोग किया जा सकता है, हालांकि गूगल और दूसरों ने प्रतियोगियों तथा भ्रष्ट वेब डेवलपर्स द्वारा इसका दुरुपयोग किये जाने से रोकने के प्रति स्वचालित प्रणालियोंhttp://googleblog.blogspot.com/2008/03/using-data-to-help-prevent-fraud.html Using data to help prevent fraud Shuman Ghosemajumder Google Blog March 18, 2008 May 18, 2010 को लागू किया है।हाउ डू यू प्रिवेंट इनवैलिड क्लिक्स एंड इम्प्रेशन? गूगल ऐडसेंस सहायता केंद्र, 9 जनवरी 2008 को अभिगम. प्रति क्लिक मूल्य निर्धारण प्रति क्लिक मूल्य निर्धारण के लिए दो मुख्य मॉडल हैं: फ्लैट रेट (निश्चित दर) तथा बोली आधारित. दोनों ही मामलों में विज्ञापनदाता के लिए किसी दिए गए स्रोत के एक क्लिक के संभावित मूल्य पर विचार करना आवश्यक होता है। यह मूल्य इस बात पर आधारित होता है कि विज्ञापनदाता अपनी वेबसाइट के लिए किस प्रकार के व्यक्ति को एक आगंतुक के रूप में प्राप्त करने की उम्मीद करता है और विज्ञापनदाता अल्पावधि तथा दीर्घावधि में उससे किस प्रकार का लाभ (आमतौर पर राजस्व) प्राप्त करने की उम्मीद कर सकता है। विज्ञापन के अन्य रूपों के समान ही लक्ष्य निर्धारण का यहां भी काफी महत्त्व होता है और पीपीसी अभियानों को अक्सर प्रभावित करने वाले कारकों में निम्न शामिल होते हैं - लक्ष्य की रूचि (जिसे अक्सर खोज इंजन में उनके द्वारा लिखे गए खोज शब्द, या उनके द्वारा ब्राउज़ किये जाने वाले पृष्ठ की सामग्री के अनुसार परिभाषित किया जाता है), आशय (उदाहरण के लिए, खरीदना है या नहीं), स्थान (भू लक्ष्यीकरण के लिए) और उनके द्वारा ब्राउज़ करने का दिन और समय. निश्चित दर (फ्लैट रेट) पीपीसी फ्लैट रेट मॉडल में, विज्ञापनदाता और प्रकाशक प्रत्येक क्लिक के लिए एक निश्चित राशि के भुगतान पर सहमत होते हैं। कई मामलों में प्रकाशक के पास एक रेट कार्ड होता है जिसमें उनकी वेबसाइट या नेटवर्क के विभिन्न क्षेत्रों के लिए सीपीसी की सूची होती है। ये विभिन्न राशियां अक्सर पृष्ठों की सामग्री से संबंधित होती हैं, जहां आम तौर पर अधिक मूल्यवान आगंतुकों को आकर्षित करने वाली सामग्री की सीपीसी कम मूल्यवान आगंतुकों को आकर्षित करने वाली सामग्री की अपेक्षा अधिक होती है। हालांकि, कई मामलों में विज्ञापनदाता कम दर पर सौदा कर सकते हैं, खासकर जब एक दीर्घकालिक या उच्च मूल्य वाले अनुबंध पर हस्ताक्षर करने की बात चल रही हो. फ्लैट रेट मॉडल विशेष रूप से तुलनात्मक खरीद इंजनों में अधिक आम है, जो सामान्यतः अपने रेट कार्ड को प्रकाशित करते हैं।Shopping.com मर्चेंट इनरोलमेंट https://web.archive.org/web/20120326133234/https://merchant.shopping.com/enroll/app?service=page%2FRateCard 26 मार्च 2012 Shopping.com, 12 जून 2007 को अभिगम. हालांकि, ये दरें कभी कभी-कभार काफी कम होती हैं और विज्ञापनदाता अधिक दृश्यता के लिए और अधिक राशि का भुगतान कर सकते हैं। ये साइटें आमतौर पर उत्पाद या सेवा श्रेणियों में काफी करीने से बंटी होती हैं जिससे विज्ञापनदाताओं को लक्ष्यीकरण का एक उच्च स्तर प्राप्त करने में मदद मिलती है। कई मामलों में, इन साइटों की संपूर्ण मूल सामग्री भुगतान वाले विज्ञापनों से भरी रहती है। बोली आधारित पीपीसी बोली आधारित मॉडल में विज्ञापनदाता एक अनुबंध पर हस्ताक्षर करता है जो उन्हें किसी प्रकाशक या आमतौर पर किसी विज्ञापन नेटवर्क द्वारा आयोजित की गयी निजी नीलामी में अन्य विज्ञापनदाताओं से प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति प्रदान करता है। प्रत्येक विज्ञापनदाता मेजबान को, किसी विज्ञापन स्थान (जो अक्सर एक खोजशब्द पर आधारित होता है) को प्राप्त करने के लिए अपने द्वारा दी जा सकने वाली अधिकतम राशि की जानकारी देता है; इसके लिए वह आम तौर पर ऑनलाइन टूल्स का उपयोग करता है। नीलामी, हर बार किसी आगंतुक द्वारा विज्ञापन स्थान को ट्रिगर करने पर एक स्वचालित तरीके से आगे बढ़ती है। जब विज्ञापन स्थान एक खोज इंजन परिणाम पृष्ठ (एसइआरपी (SERP)) का हिस्सा होता है, जब भी बोली लगाये जाने वाले खोजशब्द की खोज होती है तब स्वचालित नीलामी भी आगे बढ़ने लगती है। उसके बाद खोजकर्ता के स्थान, खोज के दिन तथा समय आदि को दर्ज करने वाले खोजशब्द की सभी बोलियों की तुलना की जाती है और विजेता का निर्धारण किया जाता है। एक से अधिक विज्ञापन स्थान होने पर, जैसा कि एसइआरपी पर अक्सर होता है, एक से अधिक विजेता हो सकते हैं जिनकी पृष्ठ पर स्थिति उनके द्वारा बोली लगायी गयी राशि के आधार पर निर्धारित की जाती है। उच्चतम बोली वाला विज्ञापन आम तौर पर सबसे पहले दिखाई देता है, हालांकि विज्ञापन गुणवत्ता तथा प्रासंगिकता जैसे अन्य कारक भी इस पर प्रभाव डाल सकते हैं (क्वालिटी स्कोर देखें). एसइआरपी पर विज्ञापन स्थान के अलावा, मुख्य विज्ञापन नेटवर्क प्रासंगिक विज्ञापनों को अपनी भागीदारी वाली तृतीय-पक्ष की संपत्तियों पर दिखाए जाने की अनुमति देते हैं। ये प्रकाशक नेटवर्क की ओर से विज्ञापन प्रदर्शित करने के लिए अनुबंधित होते हैं। बदले में, वे नेटवर्क द्वारा उत्पन्न विज्ञापन राजस्व के एक हिस्से को प्राप्त करते हैं, जो विज्ञापनदाताओं द्वारा दिए गए सकल राजस्व का 50% से 80% हो सकता है। इन संपत्तियों को अक्सर कंटेंट नेटवर्क और उनपर प्रदर्शित विज्ञापन को प्रासंगिक विज्ञापन कहा जाता है, क्योंकि विज्ञापन स्थान प्रासंगिक पृष्ठ के संदर्भ पर आधारित खोजशब्दों से संबंधित होते हैं। सामान्यतः कंटेंट नेटवर्क के विज्ञापनों का क्लिक-थ्रू रेट (सीटीआर) तथा कन्वर्जन रेट (सीआर), एसइआरपी पर पाए जाने विज्ञापनों की तुलना में काफी कम होता है और इसलिए उनका मूल्य भी कम ही रहता है। कंटेंट नेटवर्क संपत्तियों में वेबसाइट, समाचार पत्र और ईमेल शामिल हो सकते हैं।http://advertising.yahoo.com/smallbusiness/whatsincluded Sponsored Search Yahoo! Search Marketing Website Traffic Yahoo! Search Marketing (formerly Overture) May 18, 2010 May 18, 2010 20 फ़रवरी 2010 https://web.archive.org/web/20100220162810/http://advertising.yahoo.com/smallbusiness/whatsincluded dead विज्ञापनदाता प्रत्येक क्लिक के लिए भुगतान करते हैं और वास्तविक भुगतान राशि बोली की राशि के आधार पर होती है। नीलामी करने वाले मेजबान आमतौर पर विजेता बोलीदाता से, अगले सर्वोच्च बोलीदाता अथवा बोली की वास्तविक राशि (इनमे से जो भी कम हो) से थोड़ी अधिक राशि (उदाहरण के लिए एक पेनी) देने के लिए कहते हैं।ऐडवर्ड्स डिसकाउंटरजनवरी 2021 InternetArchiveBot गूगल ऐडवर्ड्स सहायता, 23 फ़रवरी 2009 को अभिगम ऐसा करके उन स्थितियों से बचा जा सकता है जहां बोलीदाता प्रत्येक क्लिक के लिए अपनी भुगतान राशि को थोड़ा कम करके नीलामी में विजेता बनने के लिए अपनी बोलियों को लगातार केवल थोड़ा-थोड़ा कम करते रहते हैं। सफलता को अधिकतम करने और व्यापार की मात्रा बढ़ाने के लिए स्वचालित बोली प्रबंधन प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इन प्रणालियों को विज्ञापनदाता द्वारा सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि उनका उपयोग अधिकतर उन विज्ञापन एजेंसियों द्वारा किया जाता है जो पीपीसी बोली प्रबंधन की पेशकश एक सेवा के रूप में करती हैं। ये प्रणालियां आमतौर पर काफी बड़े पैमाने पर बोलियों का प्रबंधन करने में सक्षम बनाती हैं, जहां एक स्वचालित प्रणाली द्वारा हजारों लाखों की संख्या में पीपीसी बोलियों को नियंत्रित किया जाता है। प्रणाली आम तौर पर प्रत्येक बोली को उसके निर्धारित लक्ष्य के हिसाब से तय करती है, जैसे कि मुनाफे को अधिकतम करना, किसी मुनाफे या नुकसान के बिना आगंतुकों की संख्या को अधिकतम करना आदि. प्रणाली आमतौर पर विज्ञापनदाता की वेबसाइट में जुड़ी होती है और प्रत्येक क्लिक के परिणाम उसमे दर्ज किये जाते हैं, जिनके आधार पर वह बोली तय करती है। इन प्रणालियों की प्रभावकारिता सीधे तौर पर प्रासंगिक प्रदर्शन डेटा की गुणवत्ता और मात्रा से संबंधित होती है; कम यातायात वाले विज्ञापन, डेटा की कमी से जुड़ी समस्या को पैदा कर सकते हैं जो कई बोली प्रबंधन उपकरणों को बेकार या अक्षम कर सकता है। इतिहास फरवरी 1998 में 25 कर्मचारियों वाली एक नयी कंपनी Goto.com (जिसका बाद में ओवरचर नाम पड़ा और अब वह याहू! का हिस्सा है) ने कैलिफोर्निया में टेड (TED) सम्मेलन के समक्ष पे पर क्लिक खोज इंजन की संकल्पना के साक्ष्य को प्रस्तुत किया।ओवरचर और गूगल: इंटरनेट पे पर क्लिक (पीपीसी (PPC)) ऐड्वर्टाइज़िंग ऑक्शन https://web.archive.org/web/20090325091910/http://faculty.london.edu/mottaviani/PPCA.pdf 25 मार्च 2009 , लंदन बिजनेस स्कूल, 12 जून 2007 को अभिगम. इस प्रस्तुति और इसके बाद की घटनाओं ने पीपीसी विज्ञापन प्रणाली की रचना की. पीपीसी मॉडल की संकल्पना का श्रेय आमतौर पर आईडियालैब तथा Goto.com के संस्थापक बिल ग्रॉस को दिया जाता है। गूगल ने खोज इंजन विज्ञापन की शुरुआत दिसंबर 1999 में की. एडवर्ड्स प्रणाली को अक्टूबर 2000 में पेश किया गया, जहां विज्ञापनदाता गूगल खोज इंजन पर दिखाए जाने के लिए टेक्स्ट विज्ञापन का निर्माण कर सकते थे। हालांकि, पीपीसी को 2002 में ही पेश किया जा सका; उस समय तक विज्ञापन के लिए प्रति हजार की लागत के हिसाब से भुगतान प्राप्त किया जाता था। हालांकि GoTo.com ने 1998 में पीपीसी की शुरुआत कर दी थी, याहू! ने GoTo.com (बाद में ओवरचर) के प्रकाशन को नवंबर 2001 से पहले शुरु नहीं किया।http://docs.yahoo.com/docs/pr/release975.html Yahoo! and Overture Extend Pay-for-Performance Search Agreement Yahoo! Inc. Yahoo! Press Release 2002 May 18, 2010 9 जून 2007 https://web.archive.org/web/20070609065924/http://docs.yahoo.com/docs/pr/release975.html dead इससे पहले, एसईआरपी विज्ञापन के लिए याहू के प्राथमिक स्रोत में प्रासंगिक आईएबी (IAB) विज्ञापन इकाइयां शामिल थीं (मुख्य रूप से 468x60 प्रदर्शन विज्ञापन). जब जुलाई 2003 में याहू! के प्रकाशन (सिंडिकेशन) अनुबंध के नवीकरण का समय आया, याहू! ने ओवरचर को 1.63 अरब अमरीकी डॉलर में खरीदने के अपने इरादे की घोषणा की.http://news.cnet.com/2100-1030_3-1025394.html Yahoo to buy Overture for $1.63 billion Stefanie Olsen CNET July 14, 2003 May 18, 2010 इन्हें भी देखें विज्ञापन प्रस्तुति क्लिक फार्म क्लिक-थ्रू रेट प्रासंगिक विज्ञापन रूपांतरण (मार्केटिंग) मूल्य प्रति कार्य मूल्य प्रति क्लिक सगाई मूल्य अनुबंध मूल्य प्रति हजार इन-टेक्स्ट विज्ञापन प्लेसमेंट के लिए भुगतान पीपीसी कॉपीराइटिंग खोज विज्ञापन खोज इंजन विपणन खोज इंजन वॉच एसईओ (SEO) कॉपीराइटिंग सन्दर्भ 2 बाहरी कड़ियाँ भुगतान लिस्टिंग खोजकर्ताओं को भ्रमित करता है https://web.archive.org/web/20091216045117/http://www.pcworld.com/article/112132/study_paid_listings_still_confuse_web_searchers.html 16 दिसंबर 2009 , पीसी (PC) वेबवर्ल्ड. http://www.asis.org/Bulletin/Dec-05/pedersen.html Sponsored Search: A Brief History. D. C. Fain and J. O. Pedersen Bulletin of the American Society for Information Science and Technology. 32(2), 12-13 2006 May 18, 2010 26 दिसंबर 2010 https://web.archive.org/web/20101226160638/http://asis.org/Bulletin/Dec-05/pedersen.html dead What is Email Validation in Hindi https://web.archive.org/web/20211228095121/https://umeshguru.com/what-is-email-validation-in-hindi/ 28 दिसंबर 2021 ? – मैं इस पोस्ट में इन सभी सवालों के जवाब देने में आपकी मदद करूंगा । आप email marketing में एक धमाकेदार शुरुआत करेंगे, भले ही आप शुरुआत कर रहे हों। तो चलिए तुरंत शुरू करते हैं। Hard Bounce vs Soft Bounce in Email Marketing in Hindi https://web.archive.org/web/20220224144245/https://umeshguru.com/hard-bounce-vs-soft-bounce-in-hindi/ 24 फ़रवरी 2022 - यदि आप ईमेल को पहले स्थान पर नहीं भेज सकते हैं तो ईमेल मार्केटिंग बेकार हो सकती है। इसलिए आपको ईमेल बाउंस और उसके प्रकारों को समझना चाहिए। जब ईमेल मार्केटिंग में hard bounce vs soft bounce की बात आती है , तो आप इन सवालों के बारे में सोच सकते हैं: What is Email Validation Process in Hindi https://web.archive.org/web/20220224144249/https://umeshguru.com/what-is-email-validation-process-in-hindi/ 24 फ़रवरी 2022 – यह पोस्ट Email Verification Process का analysis है; वर्तनी की जांच करें, पुष्टि करें कि पता, मेलबॉक्स और संबद्ध डोमेन नाम मौजूद है या नहीं। लेकिन ये बात जितनी सीधी दिखती है उतनी है नहीं. श्रेणी:क्षतिपूर्ति श्रेणी:मूल्य श्रेणी:इंटरनेट विज्ञापन तरीके श्रेणी:इंटरनेट मार्केटिंग