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हिन्दी आरोपण
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हिन्दी आरोपण एक भाषिक प्रसार है जिसमें भारतीय राज्यों में, जो हिन्दी का प्रयोग प्रादेशिक भाषा के रूप में नहीं करते या करना नहीं चाहते, आधुनिक मानक हिन्दी के प्रयोग को वरीयता दी जाती है। यह शब्द तमिल नाडु के हिन्दी-विरोधी आन्दोलनों से उद्भूत है, जहाँ मद्रास प्रान्त के विद्यालयों में हिन्दी पढ़ाए जाने का प्रस्ताव किया गया था।Venkatachalapathy A. R. 1995 Dravidian Movement and Saivites: 1927-1944 https://www.jstor.org/stable/4402599 Economic and Political Weekly 30 14 761–768 0012-9976 4402599 https://web.archive.org/web/20230211083247/https://www.jstor.org/stable/4402599 2023-02-11 2023-08-20
आधुनिक हिन्दी आरोपण का विचार हिन्दी और अंग्रेज़ी भाषा को भारतीय गणराज्य की राजभाषा निर्धारित किये जाने से विकसित हुआ, साथ ही इस निर्धारण के १५ वर्षों के भीतर अंग्रेज़ी भाषा को हिन्दी से बदलने का प्रस्ताव किया गया – जो अब तक कार्यान्वित नहीं हुआ।https://www.thehindu.com/news/national/explained-hindi-imposition-and-its-discontents/article66023522.ece Explained Hindi imposition and its discontents 2022-10-17 The Hindu 2023-08-20 https://web.archive.org/web/20230702162810/https://www.thehindu.com/news/national/explained-hindi-imposition-and-its-discontents/article66023522.ece 2023-07-02 en-IN 0971-751X live
पृष्ठभूमि
भारत में वर्ष १९५१ में लगभग १,६५२ भाषाएँ मातृभाषा के रूप में प्रयुक्त होती थीं, और लगभग ४५ करोड़ जनसंख्या के ८७ प्रतिशत लोग १४ विभिन्न भाषाओं में से कोई एक बोलते थे। सर्वाधिक प्रचलित हिन्दी थी, जिसे देश की लगभग ३० प्रतिशत जनता बोलती थी। तत्कालीन भारत के प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू ने भाषाओं की विविधता के कारण एक सर्वसामान्य भाषा को आवश्यक समझा। उन्होंने सुझाव दिया कि हिन्दुस्तानी भाषा (हिन्दी-उर्दू) सर्वोत्तम विकल्प है, क्योंकि वह सरलतापूर्वक सीखी जा सकती थी, जनसंख्या का एक बड़ा भाग पहले से ही उसे बोलता था, और उससे हिन्दू और मुसलमान समुदायों के मध्य एकता स्थापित करने की आशा थी – जबकि करोड़ों लोगों को एक विदेशी भाषा सिखाने की कठिनाइयों के कारण आंग्ल भाषा व्यवहार्य नहीं थी। अतः भारत के संविधान ने हिन्दी और अंग्रेज़ी भाषा को सह-राजभाषा नियत किया, जिसमें उत्तरोक्त १५ वर्षों में आंग्ल भाषा को हटाने की योजना थी।Agrawala S.K. 1977 Jawaharlal Nehru and the Language Problem https://www.jstor.org/stable/43950462 Journal of the Indian Law Institute 19 1 44–67 0019-5731 43950462 https://web.archive.org/web/20210709232029/https://www.jstor.org/stable/43950462 2021-07-09 2023-08-21
भारत के संविधान में यह भी कहा गया है कि हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाने चाहिए, जिसके लिए त्रिभाषा सूत्र का सुझाव दिया गया। इस प्रारूप में, एक विद्यार्थी की प्रथम भाषा उसकी अपनी मातृभाषा, द्वितीय भाषा हिन्दी तथा तृतीय भाषा अंग्रेज़ी भाषा होगी। इसे एक शैक्षिक भार के रूप में वर्णित किया गया, जहाँ हिन्दी भाषी को केवल दो भाषाएँ सीखनी पड़तीं, जबकि अन्य को तीन, या सम्भवतः चार भाषाएँ सीखनी पड़तीं, यदि किसी की मातृभाषा राज्य की राजभाषा न हो। नेहरू ने यह भी सुझाव दिया कि हिन्दी के विभिन्न रूपों को एक ही भाषा में समाहित करके, और कन्नड़, मलयालम, तमिल तथा तेलुगु के लिए एक लिपि का सृजन करके बोली जाने वाली भाषाओं की संख्या को सरल बनाने के प्रयास किए जाने चाहिए।Agrawala S.K. 1977 Jawaharlal Nehru and the Language Problem https://www.jstor.org/stable/43950462 Journal of the Indian Law Institute 19 1 44–67 0019-5731 43950462 https://web.archive.org/web/20210709232029/https://www.jstor.org/stable/43950462 2021-07-09 2023-08-21 liveForrester Duncan B. 1966 The Madras Anti-Hindi Agitation, 1965: Political Protest and its Effects on Language Policy in India https://www.jstor.org/stable/2755179 Pacific Affairs 39 1/2 19–36 10.2307/2755179 0030-851X 2755179 subscription https://web.archive.org/web/20230307053155/https://www.jstor.org/stable/2755179 2023-03-07 2023-08-21 live
हाल के घटनाक्रमों में, केन्द्रीय गृह मन्त्री अमित शाह ने सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों में कक्षा १० तक हिन्दी अनिवार्य करने के निर्णय की घोषणा की। यह निर्णय नई दिल्ली में आयोजित संसदीय राजभाषा समिति की ३७वीं बैठक में सूचित किया गया। शाह ने हिन्दी को ‘भारत की भाषा’ के रूप में महत्व देते हुए इस बात पर बल दिया कि इसे अंग्रेज़ी भाषा के विकल्प के रूप में, विशेषतः अन्तर्राज्यीय संचार के लिए, अधिक व्यापक रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए। शाह के अनुसार, इस पहल का लक्ष्य हिन्दी को राष्ट्रीय एकता के ढाँचे में अधिक गहराई से जोड़ना है। इस पहल का समर्थन करने के लिए, शाह ने पूर्वोत्तर राज्यों में २२,००० हिन्दी शिक्षकों की भर्ती का उल्लेख किया तथा नौ जनजातीय समुदायों द्वारा अपनी बोलियों की लिपियों के लिए देवनागरी लिपि अपनाने के प्रयासों को रेखांकित किया।https://scroll.in/latest/1021393/hindi-should-be-accepted-as-an-alternative-to-english-says-amit-shah Hindi should be accepted as an alternative to English, says Amit Shah Scroll.in 2024-04-12
यद्यपि, इस प्रस्ताव का पूर्वोत्तर क्षेत्र में कड़ा विरोध हुआ है। आलोचकों का तर्क है कि हिन्दी आरोपण क्षेत्र की भाषायी विविधता और सांस्कृतिक पहचान को कमज़ोर करता है। वे स्थानीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के महत्व पर बल देते हैं, जो मूल निवासी समुदायों के लिए गहन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रासंगिकता रखती हैं। यह विरोध भारत में भाषायी तनावों के ऐतिहासिक सन्दर्भ को प्रतिबिम्बित करता है, जैसा कि १९६५ के मद्रास हिन्दी-विरोधी आन्दोलन जैसी घटनाओं से उदाहृत है। ऐसे विरोधों ने देश की भाषा नीतियों को प्रभावित किया है, जो भाषा-राजनीति की जटिलताओं और भाषायी विविधता का सम्मान करने वाली समावेशी भाषा नीतियों की आवश्यकता को उजागर करता है।
डंकन बी॰ फ़ॉरेस्टर द्वारा १९६५ के मद्रास हिन्दी-विरोधी आन्दोलन पर किए गए अध्ययन के अनुसार, राजनीतिक विरोधों का भारत की भाषा नीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। इस आन्दोलन ने भाषा नीतियाँ बनाते समय भाषायी विविधता और सामुदायिक भावनाओं पर विचार करने के महत्व की ओर ध्यान आकर्षित किया।https://www.firstpost.com/india/explained-the-staunch-opposition-in-the-northeast-against-centres-proposal-to-make-hindi-compulsory-in-schools-10568401.html Explained: The staunch opposition in the Northeast against Centre’s proposal to make Hindi compulsory in schools Firstpost 2024-04-12
तर्क
अंगूठाकार|200x200पिक्सेल|जुलूसकारी बेंगळूरु, कर्नाटक में १४ सितम्बर २०१९ को हिन्दी दिवस के समारोहों का विरोध करते हुए।
आधुनिक हिन्दी आरोपण का प्रयोग एक राजनीतिक उपकरण के रूप में किया गया है, जिसमें अनेक लोग विभिन्न तर्कों के साथ हिन्दी को भारत की एकमात्र भाषा बनाने का समर्थन करते हैं, जबकि अन्य इस कार्यवाही का विरोध करते हैं।https://thewire.in/politics/amit-shah-hindi-polarisation Hindi, the New Hindutva Weapon of Polarisation The Wire https://web.archive.org/web/20230821112111/https://thewire.in/politics/amit-shah-hindi-polarisation 2023-08-21 2023-08-21 live ‘एक राष्ट्र, एक भाषा’ का नारा बारम्बार हिन्दी आरोपण के औचित्य-सिद्धि के लिए प्रयुक्त हुआ है। हिन्दू राष्ट्रवादियों ने ‘हिन्दी-हिन्दू-हिन्दुस्तान’ का वाक्य प्रयोग किया है, और वे संस्कृतनिष्ठ हिन्दी थोपने के पक्ष में हैं।https://www.theguardian.com/world/2022/dec/25/threat-unity-anger-over-push-make-hindi-national-language-of-india 'A threat to unity': anger over push to make Hindi national language of India Ellis-Petersen Hannah 2022-12-25 The Guardian 2023-11-01 en-GB 0261-3077https://www.thehindu.com/opinion/editorial/A-new-kind-of-discordance/article16812293.ece A new kind of discordance 2010-02-03 The Hindu 2023-10-29 en-IN 0971-751Xhttps://www.thehindu.com/news/national/A-yen-for-Sanskritised-Hindi/article60435857.ece A yen for Sanskritised Hindi 2015-02-12 The Hindu 2023-10-29 en-IN 0971-751Xhttps://qz.com/india/2079526/explaining-indian-hindu-right-wings-hate-for-the-urdu-language Why does India's Hindu right-wing hate the Urdu language so much? 2021-10-26 Quartz en 2023-10-29
एकरूपता
यह सुझाव दिया गया है कि राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी का प्रयोग जनसंख्या को एक कर सकता है, और इसका प्रयोग भारत के भीतर सम्पर्क भाषा के रूप में किया जा सकता है। दक्षिण भारत के राज्यों के लोगों ने कहा है कि जब एक ही भाषा का प्रयोग किया जा सकता है, तब दो भिन्न-भिन्न भाषाओं को राजभाषा के रूप में रखना अनावश्यक है।https://indianexpress.com/article/lifestyle/art-and-culture/should-hindi-be-imposed-in-the-country-language-experts-debate-6594674/ Should Hindi be imposed in the country? Language experts debate 2020-09-14 The Indian Express en https://web.archive.org/web/20230821112109/https://indianexpress.com/article/lifestyle/art-and-culture/should-hindi-be-imposed-in-the-country-language-experts-debate-6594674/ 2023-08-21 2023-08-21
एकरूपता के विरुद्ध प्रतितर्क
भारत में भाषा आरोपण का मुद्दा गहन वाद-विवाद और विवाद का विषय रहा है, विशेषकर हिन्दी को एक संयोजक भाषा के रूप में प्रचारित करने के सन्दर्भ में। विभिन्न अध्ययनों और विश्लेषणों ने इस मुद्दे के आसपास की जटिलताओं पर प्रकाश डाला है।
जॉन जे॰ वाटर और रोनोजय सेन द्वारा २०१९ में प्रकाशित ‘त्रिभाषा सूत्र का पुनरवलोकन : “हिन्दी आरोपण” विरोधों को उकसाता है’ शीर्षक अध्ययन में, लेखक २०१९ के राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रारूप पर चर्चा करते हैं, जिसने अहिन्दी भाषी राज्यों में हिन्दी के अनिवार्य अध्ययन की अनुशंसा की। इस क़दम का दक्षिण भारत में विरोध हुआ, जहाँ इसे ‘हिन्दी आरोपण’ का कृत्य माना गया। अध्ययन इस विवाद और भारत में भाषायी विविधता तथा सांस्कृतिक पहचान के लिए इसके व्यापक निहितार्थों को रेखांकित करता है।https://www.isas.nus.edu.sg/wp-content/uploads/2019/09/ISAS-Briefs-703_John-Vater-and-Ronojoy-Sen.pdf ISAS Briefs 703: The Three Language Formula Revisited: ‘Hindi Imposition’ Stokes Protests 2019 2024-04-12
इसके अतिरिक्त, ल्यूक रिम्मो लेगो के शोधपत्र ‘भारत में भाषा प्रवर्तन : पूर्वाग्रह या राष्ट्रवाद’ में भारत के राजकीय प्रयोजनों और विद्यालयों में हिन्दी को एकमात्र भाषा के रूप में अपनाने के प्रयासों के ऐतिहासिक सन्दर्भ और परिणामों का अन्वेषण किया गया है। लेगो का तर्क है कि इन प्रयासों ने प्रायः अल्पसंख्यक भाषाओं और संस्कृतियों को हाशिये पर डाल दिया है, जिसके परिणामस्वरूप भाषायी आधिपत्य के रूप में देखे जाने वाले इस कृत्य के विरोध में प्रतिरोध और विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। शोधपत्र अधिक समावेशी उपागम का आह्वान करता है जो भारत की भाषायी विविधता का सम्मान करे तथा शिक्षा प्रणाली में सभी भाषाओं को समान सहायता सुनिश्चित करे।https://www.ygsjournal.com/_files/ugd/389a2b_3d75e05e29ec46dc9179ee48b954e657.pdf Language Enforcement in India Luke Lego 2024-04-12 11 मार्च 2025 https://web.archive.org/web/20250311183553/https://www.ygsjournal.com/_files/ugd/389a2b_3d75e05e29ec46dc9179ee48b954e657.pdf dead
क्वार्ट्ज़ पत्रिका में २०२१ में प्रकाशित लेख ‘भारत का हिन्दू दक्षिणपन्थ उर्दू भाषा से इतनी घृणा क्यों करता है?’ में भारत के कतिपय गुटों, विशेषतः हिन्दू दक्षिणपन्थ द्वारा उर्दू के प्रति वैरभाव की चर्चा की गई है। उर्दू के प्रति यह विद्वेष, भारत में धार्मिक और भाषायी समुदायों के मध्य ऐतिहासिक तनावों सहित व्यापक राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिकी से जुड़ा है।https://qz.com/india/2079526/explaining-indian-hindu-right-wings-hate-for-the-urdu-language Why does India's Hindu right-wing hate the Urdu language so much? 2021-10-26 Quartz en 2023-10-29
प्रवसन एवं भाषायी समरूपीकरण
आलोचकों का तर्क है कि उत्तर भारत की सर्वसामान्य सम्पर्क भाषा के रूप में हिन्दी के प्रचार ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, हरियाणा और पंजाब जैसे अधिक विकसित अथवा जनसांख्यिकीय रूप से छोटे राज्यों में बड़े पैमाने पर प्रवसन को सुगम बनाया है। एक सामान्य भाषा का लाभ उठाकर, अन्य राज्यों के प्रवासी प्रायः भाषायी या सांस्कृतिक रूप से एकीकृत होने की आवश्यकता से बच जाते हैं, जिसे कुछ स्थानीय लोग जनसांख्यिकीय बदलाव, नगरीय भीड़भाड़ और क्षेत्रीय भाषाओं के ह्रास में योगदान करने वाला मानते हैं।
बहुत से यूरोपीय देशों के विपरीत, जहाँ कार्य और सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच के लिए स्थानीय भाषा में दक्षता अनिवार्य होती है, भारत की शिथिल भाषा नीतियाँ हिन्दी भाषियों और विपरीततः अहिन्दी भाषियों, दोनों के लिए स्थानीय भाषाएँ अपनाए बिना पूरे भारत में अवसरों तक पहुँचना सहज बनाती हैं। इसके फलस्वरूप भाषायी समरूपीकरण, सांस्कृतिक क्षरण और क्षेत्रीय पहचानों के अपरदन के प्रति चिन्ताएँ बढ़ी हैं।Author Name, Book/Article Title, Publisher, Year
प्रभाव
हिन्दी आरोपण को कार्यान्वित करने के राजनेताओं के प्रयासों की मीडिया में आलोचना हुई है, यह इङ्गित करते हुए कि राजनेता अहिन्दी भाषियों को अपने ही देश में द्वितीय श्रेणी के नागरिक कह रहे हैं।https://indianexpress.com/article/cities/chennai/indias-unity-force-language-war-hindi-imposition-stalin-8201722/ Uphold India's unity, don't force another language war through Hindi imposition: Stalin 2022-10-11 The Indian Express en https://web.archive.org/web/20230821154058/https://indianexpress.com/article/cities/chennai/indias-unity-force-language-war-hindi-imposition-stalin-8201722/ 2023-08-21 2023-08-21
हिन्दी आरोपण के प्रयासों का विरोध करने के लिए, तमिल नाडु के सेलम में एक ८५ वर्षीय किसान ने आत्महत्या कर ली, यह कहते हुए कि शिक्षा में हिन्दी थोपने से विद्यार्थियों को भारी नुक़सान होगा।https://www.indiatoday.in/india/story/tamil-nadu-news-protesting-hindi-imposition-farmer-sets-himself-fire-outside-dmk-office-2301995-2022-11-26 Protesting 'Hindi imposition', 85-year-old farmer sets himself on fire outside DMK office India Today en https://web.archive.org/web/20230821154058/https://www.indiatoday.in/india/story/tamil-nadu-news-protesting-hindi-imposition-farmer-sets-himself-fire-outside-dmk-office-2301995-2022-11-26 2023-08-21 2023-08-21
सुझाए गए उपचार
तमिल नाडु के मुख्यमन्त्री एम॰ के॰ स्टालिन और केरल के मुख्यमन्त्री पिनाराई विजयन, दोनों ने माँग की है कि संविधान की अष्टम अनुसूची में सूचीबद्ध सभी भाषाओं को समान व्यवहार प्राप्त हो। विजयन ने विशेष रूप से कहा है कि मानकीकृत परीक्षाओं के प्रश्नपत्र सभी भाषाओं में तैयार किए जाने चाहिए, जबकि स्टालिन ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह सभी भाषाओं का संवर्धन करे तथा सभी भाषाओं के वक्ताओं के लिए समान शैक्षिक और जीविका अवसर बनाए रखे।।
सम्बन्धित विषय
भाषाई साम्राज्यवाद
हिन्दी-उर्दू विवाद
बांग्ला भाषा आन्दोलन
अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस
सन्दर्भ
श्रेणी:हिन्दी
श्रेणी:Pages with unreviewed translations