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भोई
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भोई, जिन्हें कुछ क्षेत्रों में बौरी भी कहा जाता है, भारत के ओडिशा राज्य में निवास करने वाला एक जातीय समुदाय है, जिसकी मातृभाषा मुख्यतः ओड़िया है। भारत सरकार की सामाजिक वर्गीकरण व्यवस्था में इस समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अंतर्गत शामिल किया गया है।Bhoi अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान http://www.scstrti.in/index.php/communities/sc-communities/108-sc-communities/344-bhoi भुवनेश्वर 2021-07-12 20 मई 2026 https://web.archive.org/web/20260520141731/https://scstrti.in/index.php/communities/sc-communities/108-sc-communities/344-bhoi dead रमेश पी. मोहंती Dalits Development and Change: An Empirical Study https://books.google.com/books?id=tMCEOmVXhLkC&pg=PR15 2003 डिस्कवरी पब्लिशिंग हाउस 978-81-7141-696-7 15 परंपरागत रूप से भोई समुदाय के लोग हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों और मांगलिक अवसरों पर शंखवादन करते रहे हैं तथा बड़ी संख्या में कृषि श्रमिकों के रूप में भी कार्यरत रहे हैं।https://sg.inflibnet.ac.in/jspui/bitstream/10603/189767/11/11_chapter%25204.pdf sg.inflibnet.ac.in Bhoi होम http://www.scstrti.in/index.php/communities/sc-communities/108-sc-communities/344-bhoi 2020-08-30 20 मई 2026 https://web.archive.org/web/20260520141731/https://scstrti.in/index.php/communities/sc-communities/108-sc-communities/344-bhoi dead Dalits Development and Change: An Empirical Study रमेश पी. मोहंती डिस्कवरी पब्लिशिंग हाउस 2003 978-8-17141-696-7 https://books.google.com/books?id=tMCEOmVXhLkC&pg=PR7 vii समय के साथ इनके पारंपरिक व्यवसायों में परिवर्तन आया है और आज समुदाय के सदस्य विभिन्न प्रकार के व्यवसायों एवं सेवाओं से जुड़े हुए हैं।
ओडिशा के अतिरिक्त गुजरात और महाराष्ट्र में भी भोई समुदाय के लोग पाए जाते हैं। इन क्षेत्रों में उनका पारंपरिक व्यवसाय पालकी वाहक (पालकी उठाने वाले) के रूप में कार्य करना माना जाता था।kshatriya, the brave and Social Change in Gujarat Dimensions of Social Life: Essays in Honor of David G. Mandelbaum पॉल हॉकिंग्स वाल्टर डी ग्रुइटर 1987 978-3-11084-685-0 https://books.google.com/books?id=ERQp5YCXiWsC&pg=PA499 499
इसके अलावा, इस समुदाय की उपस्थिति असम में भी दर्ज की गई है,North-East India: Land, People and Economy कमल रामप्रीत दीक्षित जुट्टा के। दीक्षित स्प्रिंगर साइंस एंड बिजनेस मीडिया 2013 978-9-40077-055-3 https://books.google.com/books?id=iorHBAAAQBAJ&pg=PA370 370 जहाँ स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप उनके व्यवसाय और जीवन-शैली में विविधता देखने को मिलती है।
ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि "भोई" अथवा "भोइमुल" शब्द का प्रयोग ओडिशा में एक भिन्न संदर्भ में भी किया जाता था। ऐतिहासिक रूप से यह उपाधि करण समुदाय के लेखकों और प्रशासकीय अधिकारियों को उनके पद अथवा कार्य के आधार पर प्रदान की जाती थी।पटनायक निहार रंजन https://books.google.com/books?id=1AA9W9_4Z9gC&dq=bhoi+karan+caste&pg=PA155 Economic History of Orissa 1997 इंडस पब्लिशिंग. 978-81-7387-075-0 en यह एक कार्यात्मक उपाधि थी, न कि भोई (बौरी) जातीय समुदाय का पर्याय। करण समुदाय सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से एक प्रतिष्ठित वर्ग माना जाता था तथा उसका अपना शासक वंश भी था। इतिहास में ओडिशा पर शासन करने वाले भोइमुला राजवंश का संबंध इसी करण समुदाय से माना जाता है। अतः भोई (बौरी) समुदाय और करण समुदाय के "भोई/भोइमुल" शीर्षकधारी व्यक्तियों को एक-दूसरे से भिन्न ऐतिहासिक और सामाजिक पहचान के रूप में समझना चाहिए।
सन्दर्भ
श्रेणी:महाराष्ट्र के सामाजिक समूह
श्रेणी:गुजरात के सामाजिक समुदाय